03/06/2026
शर्मनाक....अर्थव्यवस्था संभाल नही पा रही मोदी सरकार.. सोना बेचा I
76 साल में पहली बार देश का सोना बेचकर सरकार अपने खर्चे चलाने और अर्थतंत्र को मज़बूत करने की कोशिश कर रही है।
परंपरागत रूप से घर का सोना बेचना कंगाली और बदहाली की तरफ़ इशारा करता है।ये तब है जब खुद प्रधानमंत्री जी जनता से सोना ना ख़रीदने के लिए कह चुके हैं।
सरकार ने 1.14 लाख करोड़ का सोना चुपके से बेच दिया।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, 22 मई को समाप्त सप्ताह के दौरान RBI ने लगभग लगभग 1.14 लाख करोड़ रुपये का सोना बेचा है।
क्या भारत फिर से उसी दौर में लौट गया है जहां उसे अपना सोना बेचने और सोना गिरवी रखने की जरूरत है?
पहले तो झूठ बोलना बंद होना चाहिए कि यह सारी स्थिति सिर्फ युद्ध की वजह से है। जिस दौर में दक्षिण कोरिया और ताइवान ने मार्केट कैप के मामले में भारत को पीछे छोड़ दिया, डॉलर रोज मजबूत हो रहा है, तब आप बहाना बनाना बंद करिए कि सब युद्ध का असर है। युद्ध का असर सिर्फ आपके ही ऊपर हो रहा है?
भारत की अर्थव्यवस्था पिछले कई साल से नीचे जा रही है। पिछले 2 साल से भारतीय शेयर बाजार कोई रिटर्न नहीं दे रहा है। युद्ध एक ट्रिगर भर है जिसने संकट को गहरा किया। लेकिन असली समस्या जो है उसपर ईमानदारी से बात किए बिना, झूठ बोल कर इसका हल नहीं हो सकता।
असल बात यह है कि भारत पूरी तरह आयात आधारित इकॉनमी बन चुका है। आपकी मैन्युफैक्चरिंग घट रही है। आपका निर्यात घट रहा है। आपका रुपया नीचे जा रहा है। लोगों की आय घट रही है। बेरोजगारी बढ़ रही है। जो रोजगार पैदा हो रहे हैं वे बहुत कम वेतन वाली अस्थायी नौकरियां हैं।
12 साल पहले एक अर्थशास्त्री को ट्रोल करने के लिए जो नरेंद्र मोदी महान अर्थशास्त्री बनकर घूमते थे, आज वे सारी समस्याओं पर मौन हैं।
मेरा निष्कर्ष है की अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर यह सरकार नोटबंदी के बाद से ही हार चुकी है और अर्थव्यवस्था सुधारना इनके बस की बात नहीं है।
1991 में भी सोना गिरवी रखा गया था; देश के इतिहास में किसी भी सरकार ने कभी सोना नहीं बेचा।
क्या सरकार इतनी ज़्यादा कंगाल हो गई है? पिछले 76 साल में कई ऐसे मौके आए जब देश कठिन स्थिति में था। लेकिन देश का सोना तो कभी नहीं बेचा गया। इसका मतलब हालात बहुत ज़्यादा ख़राब हैं?
सरकार कुछ बताती क्यो नहीं? देश के क्या हालात हैं? मोदी जी कहते हैं कि वो तो झोला उठा के चल देंगे। पर हमें तो यहीं रहना है, इसी देश में रहना है।