Sitamau (deven)

Sitamau (deven) Sitamau is a town and a nagar panchayat Sitamau is a Town in Sitamau Mandal , Mandsaur District , Madhya Pradesh State .

Sitamau is 30.4 km distance from its District Main City Mandsaur . And 226 km distance from its State Main City Bhopal . . Sitamau , Dhodhar , Gadriya , Galiyara , Gelana , Gopalpura , ... . are the villages along with this village in the same Sitamau Mandal

Near By Villages of this Village with distance are Kheda(2.2 k.m.) ,Laduna(2.9 k.m.) ,Rajnagar(5.3 k.m.) ,Chikla(6.8 k.m.) ,Dalawada(7.2 k.m

.) ,. Near By towns are Sitamau(0 k.m.) ,Mandsaur(28.8 k.m.) ,Malhargarh(45.8 k.m.) ,Garoth(46.1 k.m.) ,

Sitamau Pin Code is 458990 and Post office name is . Other villages in Post Office (458990,) are Sitamau , Kheda , Khetakheda , Bilatri , Rathana , ... . .

 #रेगुलेटरहो सकता है कुछ लोगों को पता हो लेकिन मेरे जैसे बहुत से लोगों को शायद पता भी नही हो ! क्योंकि मुझे खुद कल पता च...
18/11/2025

#रेगुलेटर

हो सकता है कुछ लोगों को पता हो लेकिन मेरे जैसे बहुत से लोगों को शायद पता भी नही हो ! क्योंकि मुझे खुद कल पता चला इसका !

मेरे रसोई गैस चूल्हे का रेगुलेटर पाँच- साथ दिन से खराब हो गया, खराब मतलब ऑन-ऑफ करने वाला स्वीच टूट गया ! जिससे on-ऑफ करने में पलाश की मदद लेना पड़ रहा था !

बाजार में नया रेगुलेटर 450/- रुपये से 800/- रुपये तक मिलते है, मैं किसी काम से गैस एजेंसी के पास ही गया हुआ था तो सोचा यँहा से ही नया रेगुलेटर खरीद लेते है !

एजेंसी वालों को पूछा तो उन्होंने कहा आपके नाम से यदि कनेक्शन है तो आपको सिर्फ 120/- रुपये चार्ज लगेगा और नया रेगुलेटर मिल जाएगा, पुराना वाला आपको जमा करवाना होगा । और आपकी डायरी ( कनेक्शन ) में ऐड भी हो जाएगा, अन्यथा 480/- रुपये में रेगुलेटर मिलेगा ।

यानि 500- 600/- रुपये में मिलने वाला रेगुलेटर सिर्फ 120/- रुपये में आपको आपके गैस कनेक्शन वाली कंपनी बदलकर देगी। अगर पाइप भी लेना चाहो तो सिर्फ 90/- रुपये देने है।

दोनों चीजें उसी गैस एजेंसी से लेने पर आपके पैसे की तो बचत होगी ही होगी, साथ मे गैस कनेक्शन लेने पर एक बीमा कवरेज देती है। और वो बीमा तभी अपडेट होता है जब आप गैस एजेंसी से अपने कनेक्शन में समय-समय पर पाइप, रखरखाव अपडेट करवाते है।

तो अबकी बार रेगुलेटर या पाइप खराब हो तो मार्केट के बजाय आपकी गैस एजेंसी से संपर्क करना।

 #जरूर_पढ़ें जिस पल आपकी मृत्यु हो जाती है, उसी पल से आपकी पहचान एक "बॉडी" बन जाती है।अरे-"बॉडी" लेकर आइये, "बॉडी" को उठा...
11/08/2022

#जरूर_पढ़ें
जिस पल आपकी मृत्यु हो जाती है,
उसी पल से आपकी पहचान
एक "बॉडी" बन जाती है।
अरे-
"बॉडी" लेकर आइये,
"बॉडी" को उठाइये,
ऐसे शब्दो से आपको पुकारा जाता है,
वे लोग भी आपको
आपके नाम से नही पुकारते ,
जिन्हे प्रभावित करने के लिये आपने अपनी पूरी जिंदगी खर्च कर दी।

इसीलिए

जीवन में आने वाली हर चुनौती को स्वीकार करें।......
अपनी पसंद की चीजों के लिये
खर्चा करें।......
इतना हंसिये के पेट दर्द हो जाये।....

आप कितना भी बुरा नाचते हो ,
फिर भी नाचिये।......
उस खुशी को महसूस कीजिये।......
फोटोज् के लिये पागलों वाली
पोज् दीजिये।......
बिल्कुल छोटे बच्चे बन जाइये ।

क्योंकि मृत्यु जिंदगी का सबसे
बड़ा लॉस नहीं है।
लॉस तो वो है
के जिंदा होकर भी आपके अंदर
जिंदगी जीने की आस
खत्म हो चुकी है।.....

हर पल को खुशी से जीने को ही जिंदगी कहते है।

"जिंदगी है छोटी,पर" हर पल में खुश हूँ "काम में खुश हूं,"आराम में खुश हूँ ,

"आज पनीर नहीं," दाल में ही खुश हूं,
"आज गाड़ी नहीं," पैदल ही खुश हूं,

"दोस्तों का साथ नहीं," अकेला ही खुश हूं,
"आज कोई नाराज है,"
उसके इस अंदाज से ही खुश हूं,

"जिस को देख नहीं सकता,"
उसकी आवाज से ही खुश हूं ..."

तस्वीर में एक संदेश❤️
07/06/2022

तस्वीर में एक संदेश❤️

मृत्यु का बदलता पैटर्नएक बेहतरीन गायक और शानदार शख्सियत कृष्णकुमार कुन्नाथ 'केके' मात्र 53 वर्ष की आयु में आज अचानक उस व...
02/06/2022

मृत्यु का बदलता पैटर्न

एक बेहतरीन गायक और शानदार शख्सियत कृष्णकुमार कुन्नाथ 'केके' मात्र 53 वर्ष की आयु में आज अचानक उस वक्त अपने फैंस को स्तब्ध छोड़कर हमेशा हमेशा के लिए शांत हो गए जब वे कोलकाता के एक लाइव कार्यक्रम में मंच पर परफॉर्म कर रहे थे। अपना सबसे पसंदीदा काम करते हुए यानी गाने गाते हुए उन्होंने आखिरी साँसें ली,एक यही बात सोचकर उनके फैंस जरा सी तसल्ली महसूस कर सकते हैं। केके अपने पीछे परिवार में पत्नी व दो छोटे बच्चे छोड़ गए हैं। सोचती हूँ अन्य सेलेब्रिटीज़ की तरह उन्होंने भी आज हैल्दी ब्रेकफास्ट लिया होगा,दैनिक व्यायाम, योगा या जिम वर्कआउट किया होगा। कुछेक लोगों के साथ व्यावसायिक मीटिंग्स की होंगीं। आज के कार्यक्रम के लिए टिपटॉप तैयार होकर मंच पर पहुंचे होंगे जहाँ उन्हें एक यादगार हाई एनर्जी परफॉर्मेंस देनी थी। उनके शेड्यूल में अगले कुछ महीनों के कार्यक्रम पूर्व निर्धारित रहे होंगे। एक तिरेपन वर्षीय हैंडसम सेलेब्रिटी की जिंदगी शायद इससे भी अधिक व्यस्त रही होगी जितनी मैं सोच पा रही हूँ।

2 सितंबर,2021 को इसी तरह 40 वर्षीय परफैक्टली फिट नजर आनेवाले अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला की हार्ट अटैक से मौत ने भी दर्शकों को चौंका कर रख दिया था। उन्होंने आधी रात को अपनी माँ से सीने में हल्का दर्द होने की शिकायत की और अस्पताल ले जाए जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था।

कन्नड़ फिल्मों के सुपरस्टार और जानेमाने समाजसेवी 46 वर्षीय पुनीत राजकुमार की 26 अक्टूबर को बैंगलुरू में अचानक उस समय कार्डियक अरैस्ट के कारण मृत्यु हो गई जब वे प्रतिदिन की भाँति जिम में वर्कआउट कर रहे थे। वे कन्नड़ फैंस के दिलों में इस गहराई तक बसे हुए हैं कि आज उनकी मृत्यु के नौ महीने बाद भी हर गली,हर चौराहे पर गोलगप्पे बेचनेवाले से लेकर बड़े बड़े शोरूम वालों ने भी उनकी श्रद्धांजलि में बड़े-2 पोस्टर लगा रखे हैं।

इन तीनों ही सेलेब्रिटीज़ ने अपने जीवन में हर मुमकिन वह कोशिश की होगी जिससे वे एक लंबा व स्वस्थ, सफल जीवन अपने परिवार के साथ बिता सकें। निस्संदेह ये सभी खानपान के परहेज से लेकर कसरत आदि सभी प्रयासों के द्वारा एक अनुशासित जीवन का पालन करते रहे होंगे। फिर भी किसी को 53,किसी को 46 तो किसी को 40 वर्ष में बहुत भागदौड़ कर कमाई हुई सारी संपत्ति,इतना स्ट्रैस लेकर,तिकड़में भिड़ाकर अर्जित किया हुआ सारा वैभव अचानक ही छोड़कर जाना पड़ा। ऐसा नहीं है कि जीवनभर भागदौड़ करके उन्होंने कोई गलती की। दुख मात्र यह होता है कि ये प्यारे-2 लोग अपनों से यह भी ना कह पाए कि अब चलता हूँ,अपना ख्याल रखना। जाते समय अपने बच्चों को सीने से नहीं लगा पाए,उन्हें आखिरी पप्पियाँ नहीं दे पाए। दो चार दिन बीमार भी नहीं पड़े रहे कि कुछ आभास हो जाता तो माँ,पिता, पत्नी,दोस्तों से आखिरी बार अपने मन की कुछ साध कह लेते।

कुछ वर्षों पहले तक जब मैनें अपने बुजुर्गों को अंतिम यात्रा पर जाते देखा था,मुझे याद है वे आराम से हमारे सर पर हाथ रखकर हमें असीसते हुए,गीता का सोलहवां अध्याय सुनते हुए शांतिपूर्वक अंतिम सांसें लेते थे। कौन सी करधनी किस नातिन को तो कौन सा गुलूबंद किस बहू को देना है, बहुत संतोषपूर्वक मैनें अपनी दादी को मृत्युशैया पर बताते देखा। गौदान का संकल्प भी होश रहते ले लिया करते थे। आजकल मृत्यु का पैटर्न बदल गया है। अब मृत्यु गीता का सोलहवां अध्याय सुनने सुनाने का सुअवसर नहीं देती। अब बेटे बहू,यार दोस्तों से हँसते बतियाते हुए जाने की साध पूरी होती नहीं देखी जा रही। बहुत से लोग तो इतनी युवावस्था में जा रहे हैं कि बहू,दामाद,नाती,पोतों जैसे सुख और कर्तव्यों का आनंद एक दिवास्वप्न ही रह गया है।

एक ही आग्रह है। किसी से रूठकर ना बिछड़ें। किसी को रुलाकर ना सोएं। किसी को अपमानित करके बड़प्पन ना महसूस करें। किसी को दबाकर, किसी की स्थिति का फायदा उठाकर मूँछों पर ताव ना दें। हो सकता है जब तक हमें अपनी गलती महसूस हो तब तक वह जिसके प्रति हमसे अपराध हुआ है,अगर इस संसार को अलविदा कह दे तो हम किससे अपने अपराध क्षमा करवाएंगे,किससे माफी मांगेंगे। हम अपना मन उदार रखें। छोटीछोटी बातों को दिल से ना लगाएं। चोट और धोखा बेशक किसी से ना खाएं पर इतने तंगदिल भी ना हो जाएं कि प्रेम के दो बोल भी हमसे सुनने के लिए हमारे संपर्क में आनेवाले तरस जाएं। तनी हुई भृकुटि में तो हमारी अंतिम तस्वींरें भी सुंदर नहीं आएंगीं।

सर्वे भवंतु सुखिनः
साभार

एक जमाना था...खुद ही स्कूल जाना पड़ता था क्योंकि साइकिल बस आदि से भेजने की रीत नहीं थी, स्कूल भेजने के बाद कुछ अच्छा बुर...
17/05/2022

एक जमाना था...

खुद ही स्कूल जाना पड़ता था क्योंकि साइकिल बस आदि से भेजने की रीत नहीं थी, स्कूल भेजने के बाद कुछ अच्छा बुरा होगा ऐसा हमारे मां-बाप कभी सोचते भी नहीं थे...
उनको किसी बात का डर भी नहीं होता था,
🤪 पास/नापास यही हमको मालूम था... *%* से हमारा कभी भी संबंध ही नहीं था...
😛 ट्यूशन लगाई है ऐसा बताने में भी शर्म आती थी क्योंकि हमको ढपोर शंख समझा जा सकता था...
🤣🤣🤣
किताबों में पीपल के पत्ते, विद्या के पत्ते, मोर पंख रखकर हम होशियार हो सकते हैं ऐसी हमारी धारणाएं थी...
☺️☺️ कपड़े की थैली में...बस्तों में..और बाद में एल्यूमीनियम की पेटियों में...
किताब कॉपियां बेहतरीन तरीके से जमा कर रखने में हमें महारत हासिल थी.. ..
😁 हर साल जब नई क्लास का बस्ता जमाते थे उसके पहले किताब कापी के ऊपर रद्दी पेपर की जिल्द चढ़ाते थे और यह काम...
एक वार्षिक उत्सव या त्योहार की तरह होता था.....
🤗 साल खत्म होने के बाद किताबें बेचना और अगले साल की पुरानी किताबें खरीदने में हमें किसी प्रकार की शर्म नहीं होती थी..
क्योंकि तब हर साल न किताब बदलती थी और न ही पाठ्यक्रम...
🤪 हमारे माताजी पिताजी को हमारी पढ़ाई बोझ है..
ऐसा कभी लगा ही नहीं....
😞 किसी एक दोस्त को साइकिल के अगले डंडे पर और दूसरे दोस्त को पीछे कैरियर पर बिठाकर गली-गली में घूमना हमारी दिनचर्या थी....
इस तरह हम ना जाने कितना घूमे होंगे....

🥸😎 स्कूल में मास्टर जी के हाथ से मार खाना, पैर के अंगूठे पकड़ कर खड़े रहना, और कान लाल होने तक मरोड़े जाते वक्त हमारा ईगो कभी आड़े नहीं आता था.... सही बोले तो ईगो क्या होता है यह हमें मालूम ही नहीं था...
🧐😝 घर और स्कूल में मार खाना भी हमारे दैनंदिन जीवन की एक सामान्य प्रक्रिया थी.....

मारने वाला और मार खाने वाला दोनों ही खुश रहते थे...
मार खाने वाला इसलिए क्योंकि कल से आज कम पिटे हैं और मारने वाला इसलिए कि आज फिर हाथ धो लिए 😀......

😜 बिना चप्पल जूते के और किसी भी गेंद के साथ लकड़ी के पटियों से कहीं पर भी नंगे पैर क्रिकेट खेलने में क्या सुख था वह हमको ही पता है...

😁 हमने पॉकेट मनी कभी भी मांगी ही नहीं और पिताजी ने कभी दी भी नहीं....इसलिए हमारी आवश्यकता भी छोटी छोटी सी ही थीं....साल में कभी-कभार दो चार बार सेव मिक्सचर मुरमुरे का भेल, गोली टॉफी खा लिया तो बहुत होता था......उसमें भी हम बहुत खुश हो लेते थे.....
😲 छोटी मोटी जरूरतें तो घर में ही कोई भी पूरी कर देता था क्योंकि परिवार संयुक्त होते थे ..
🥱 दिवाली में लगी पटाखों की लड़ी को छुट्टा करके एक एक पटाखा फोड़ते रहने में हमको कभी अपमान नहीं लगा...

😁 हम....हमारे मां बाप को कभी बता ही नहीं पाए कि हम आपको कितना प्रेम करते हैं क्योंकि हमको आई लव यू कहना ही नहीं आता था...
😌 आज हम दुनिया के असंख्य धक्के और टाॅन्ट खाते हुए......
और संघर्ष करती हुई दुनिया का एक हिस्सा है..किसी को जो चाहिए था वह मिला और किसी को कुछ मिला कि नहीं..क्या पता..
😀 स्कूल की डबल ट्रिपल सीट पर घूमने वाले हम और स्कूल के बाहर उस हाफ पेंट मैं रहकर गोली टाॅफी बेचने वाले की दुकान पर दोस्तों द्वारा खिलाए पिलाए जाने की कृपा हमें याद है.....
वह दोस्त कहां खो गए , वह बेर वाली कहां खो गई....
वह चूरन बेचने वाली कहां खो गई...पता नहीं..

😇 हम दुनिया में कहीं भी रहे पर यह सत्य है कि हम वास्तविक दुनिया में बड़े हुए हैं हमारा वास्तविकता से सामना वास्तव में ही हुआ है...

🙃 कपड़ों में सलवटें ना पड़ने देना और रिश्तों में औपचारिकता का पालन करना हमें जमा ही नहीं......
सुबह का खाना और रात का खाना इसके सिवा टिफिन में अखबार में लपेट कर रोटी ले जाने का सुख क्या है, आजकल के बच्चों को पता ही नही ...
😀 हम अपने नसीब को दोष नहीं देते....जो जी रहे हैं वह आनंद से जी रहे हैं और यही सोचते हैं....और यही सोच हमें जीने में मदद कर रही है.. जो जीवन हमने जिया...उसकी वर्तमान से तुलना हो ही नहीं सकती ,,,,,,,,

😌 हम अच्छे थे या बुरे थे नहीं मालूम , पर हमारा भी एक जमाना था

🙏 और Most importantly , आज संकोच से निकलकर , दिल से अपने साक्षात देवी _देवता तुल्य , प्रात स्मरणीय , माता _ पिता , भाई एवं बहन को कहना चाहता हूं कि मैं आपके अतुल्य लाड, प्यार , आशीर्वाद , लालन पालन व दिए गए संस्कारो का ऋणी हूं 🙏,
🙏🏻☺😊
एक बात तो तय मानिए को जो भी👆🏻 पूरा पढ़ेगा उसे अपने बीते जीवन के कई पुराने सुहाने पल अवश्य याद आयेंगे।🙏🏻

कभी बारातों में दूल्हे की पसन्दीदा और एकमात्र गाड़ी हुआ करती थी...! 🚛किस-किस को अनुभव रहा है...!! 😄 😍Dashrath Singh Rams...
16/05/2022

कभी बारातों में दूल्हे की पसन्दीदा और एकमात्र गाड़ी हुआ करती थी...! 🚛
किस-किस को अनुभव रहा है...!! 😄 😍

Dashrath Singh Ramseen √

भूख उम्र नहीं देखती साहब दोस्तों इस उम्र में भी कोई काम करता दिखाई दे तो उनके पास रुके और उनसे बात करें अक्सर ऐसे लोगों ...
06/05/2022

भूख उम्र नहीं देखती साहब
दोस्तों इस उम्र में भी कोई काम करता दिखाई दे तो उनके पास रुके और उनसे बात करें अक्सर ऐसे लोगों का कोई अपना नहीं होता है और जब हम अपनापन दिखाते हैं तो यह बहुत प्रसन्न होते हैं जब भी मिलो तो इनकी खुद्दारी को नमन करना और इनसे जरूर कुछ ना कुछ लेना ऐसे लोग बस दो वक्त की रोटी के लिए मेहनत करते हैं, दोस्तों भूख उम्र नहीं देखते..!

04/05/2022
25/04/2022

पंछी कभी अपने बच्चों को भविष्य के लिए घोसला बनाकर नहीं देते,
वे बस उन्हें उड़ने की कला सिखातें हैं..!!

ग्रीष्म ऋतु के स्वागत का लोकपर्व कच्ची केरी आने पर हार्दिक बधाई शुभकामनाएं
14/04/2022

ग्रीष्म ऋतु के स्वागत का लोकपर्व कच्ची केरी आने पर हार्दिक बधाई शुभकामनाएं

वो शरारत, वो मस्ती का दौर था,वो बचपन का मज़ा ही कुछ और था। 🙂
10/04/2022

वो शरारत, वो मस्ती का दौर था,
वो बचपन का मज़ा ही कुछ और था। 🙂

यह लेख नही  था कुदरत  का ।                                         चालाकी और लालच है इंसानो  की 😣
16/02/2022

यह लेख नही था कुदरत का ।
चालाकी और लालच है इंसानो की 😣

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