Mahatma Gandhi Govt. School, Sbnr

Mahatma Gandhi Govt. School, Sbnr यत्नवान् सुखमेधते।

Congratulations It is pleased to know you all . Raghav got selected for Navodaya vidyalay
27/08/2025

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23/08/2025

Robotics
New initiative in Mahatma Gandhi government school Sri Vijayanagar

महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय श्री विजयनगरशिक्षा, खेल, कला, योग और संस्कार – हर क्षेत्र में उत्कृष्टता की मिसालजहां आज भ...
18/07/2025

महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय श्री विजयनगर
शिक्षा, खेल, कला, योग और संस्कार – हर क्षेत्र में उत्कृष्टता की मिसाल

जहां आज भी कई माता-पिता शिक्षा के लिए निजी विद्यालयों की ओर रुख करते हैं, वहीं श्रीविजयनगर का महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय सरकारी शिक्षा व्यवस्था की ताकत और सफलता की जीती-जागती मिसाल बन गया है। इस विद्यालय ने न सिर्फ परीक्षा परिणामों में परचम लहराया, बल्कि खेल, योग, कला, पर्यावरण और समाजसेवा जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की हैं।

शिक्षा में श्रेष्ठता-बोर्ड परीक्षा में रिकॉर्ड सफलता

विद्यालय का इस वर्ष का बोर्ड परीक्षा परिणाम अभूतपूर्व रहा। कक्षा 12वीं के सभी विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। विद्यालय के टॉपर छात्र ने 96% अंक प्राप्त कर पूरे क्षेत्र में नाम रोशन किया। कक्षा 10वीं का रिजल्ट भी बेहद प्रभावशाली रहा, जिसमें टॉपर छात्र ने 97.20% अंक प्राप्त किए। कक्षा 10वीं के अधिकांश विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में रहे, केवल 2 छात्र द्वितीय श्रेणी में रहे, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। यह सफलता केवल विद्यार्थियों की मेहनत नहीं, बल्कि शिक्षकों के समर्पण, अनुशासन और विद्यालय के सकारात्मक वातावरण का प्रतिफल है।

बिना शारीरिक शिक्षक के राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विद्यालय की धमक
इस विद्यालय की सबसे प्रेरक कहानी है, शारीरिक प्रशिक्षण प्रशिक्षक के बिना खेलों में शानदार प्रदर्शन। विद्यालय में शुरू से कोई स्थायी शारीरिक शिक्षक नहीं है, लेकिन फिर भी विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय खेलों में हिस्सा लिया और कई पदक भी जीते।
विद्यालय के 25 विद्यार्थियों का चयन राज्य स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में हुआ, जबकि 2 विद्यार्थियों ने शतरंज और वेट लिफ्टिंग में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। 8 विद्यार्थियों का चयन कला उत्सव और योगा ओलंपियाड जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में हुआ, जिससे साबित होता है कि यह विद्यालय विद्यार्थियों के समग्र विकास पर बल देता है।यह सफलता केवल शैक्षणिक ही नहीं, बल्कि योग, कला जैसी गतिविधियों से मिली है।
इस बदलाव के नायक हैं, अध्यापक श्री रामचंद्र, जिन्होंने व्यक्तिगत रूप से बच्चों को निर्देशन देकर विद्यालय की छवि को खेलों के क्षेत्र में भी ऊपर उठाया। बच्चों को शतरंज, दौड़, पावर लिफ्टिंग, वेट लिफ्टिंग, बॉक्सिंग, योगा और लोक नृत्य में हिस्सा दिलवाकर उनकी प्रतिभा को जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया।

हर जन्मदिन पर एक पौधा – प्रकृति से जुड़ाव की अनूठी पहल

विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक अभिनव परंपरा शुरू की गई है। हर विद्यार्थी के जन्मदिन पर एक पौधा रोपा जाता है, जिसकी देखरेख स्वयं विद्यार्थी करता है। अब तक बहुत से पौधे स्कूल परिसर में लगाए जा चुके हैं। इससे न केवल विद्यालय परिसर हराभरा हुआ है, बल्कि विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति भावनात्मक जुड़ाव भी उत्पन्न हुआ है।

अभिभावक शिक्षक संवाद, संपूर्ण विकास की योजना

विद्यालय में आयोजित अभिभावक-शिक्षक बैठकों की विशेष बात यह है कि हर बच्चे के अभिभावक से व्यक्तिगत रूप से चर्चा की जाती है।
इसमें बच्चे के डेली रूटीन, स्वभाव, लर्निंग लेवल, रुचियाँ और यहां तक कि उसकी डाइट पर भी बातचीत होती है। प्रत्येक विद्यार्थी के लिए एक वैयक्तिक विकास रिपोर्ट तैयार की जाती है, और उसी आधार पर आगे की शैक्षणिक व नैतिक योजना बनाई जाती है। इससे बच्चों की संपूर्ण प्रगति सुनिश्चित होती है।

संगीत से संस्कार – प्रार्थना सभा बनी अद्भुत अनुभव

विद्यालय में प्रतिदिन की प्रार्थना सभा को एक अनूठे रूप में आयोजित किया जाता है। यह सभा म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट्स के साथ होती है, जहां बच्चे खुद हारमोनियम, तबला, ढोलक और अन्य वाद्ययंत्र बजाते हैं। प्रधानाचार्य श्री नरेंद्र कुमार के सानिध्य में बच्चों को सुरों की शिक्षा दी जा रही है। प्रार्थना सभा का संचालन, गायन से लेकर म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट्स बजाने तक, हर भूमिका विद्यार्थियों द्वारा निभाई जाती है। इससे न केवल उनके आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, बल्कि अनुशासन और सांस्कृतिक चेतना भी विकसित होती है।

प्रधानाचार्य श्री नरेंद्र कुमार का योगदान प्रेरणा

विद्यालय की इस बुलंद उड़ान के पीछे एक मजबूत और दूरदर्शी नेतृत्व है, प्रधानाचार्य श्री नरेंद्र कुमार का। उन्होंने शिक्षकों में टीम भावना, अनुशासन और नवाचार की संस्कृति विकसित की है। उनके नेतृत्व में अध्यापक न केवल शिक्षण कार्य में बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी में भी विशेष योगदान दे रहे हैं।

सामाजिक सहभागिता और सामुदायिक जुड़ाव

विद्यालय में स्वच्छता अभियान, रचनात्मक प्रतियोगिताएं, सामूहिक योग अभ्यास, बाल सभाएं और अभिभावक-संवाद कार्यक्रम जैसे आयोजन होते रहते हैं। अभिभावक अब खुद को स्कूल का हिस्सा मानते हैं, और समाज के सहयोग से यह विद्यालय एक शिक्षा-धाम बन चुका है। भामाशाहों द्वारा भवन निर्माण से लेकर विद्यालय में सीसीटीवी कैमरा, फर्नीचर इत्यादि मूलभूल आवश्यकताओं को पूरा किया गया है।

31/05/2025
नाम - अर्थ कुमार पिता का नाम गणेश  कुमारमाता का नाम - पूनम देवी कक्षा:  12th विज्ञान वर्ग प्राप्तांक प्रतिशत - 96 % विद्...
25/05/2025

नाम - अर्थ कुमार
पिता का नाम गणेश कुमार
माता का नाम - पूनम देवी
कक्षा: 12th विज्ञान वर्ग
प्राप्तांक प्रतिशत - 96 %
विद्यालय का नाम- महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय श्री विजयनगर
लक्ष्य - प्रोफेसर गणित

नाम - युवराज सिंहपिता का नाम गजराज सिंहमाता का नाम - आनंद कंवर  कक्षा:  12th विज्ञान वर्ग प्राप्तांक प्रतिशत - 92.20 विद...
25/05/2025

नाम - युवराज सिंह
पिता का नाम गजराज सिंह
माता का नाम - आनंद कंवर
कक्षा: 12th विज्ञान वर्ग
प्राप्तांक प्रतिशत - 92.20
विद्यालय का नाम- महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय श्री विजयनगर
लक्ष्य - N D A officer

"अर्थकुमार की कहानी- सपनों की उड़ान और विद्यालय परिवार की सोच"कहते हैं, "जहाँ चाह होती है, वहाँ राह भी होती है।" लेकिन क...
23/05/2025

"अर्थकुमार की कहानी- सपनों की उड़ान और विद्यालय परिवार की सोच"

कहते हैं, "जहाँ चाह होती है, वहाँ राह भी होती है।" लेकिन कई बार चाह तो हमारे भीतर होती है, पर राह की इजाजत बाहरी दुनिया नहीं देती। यह कहानी है एक ऐसे विद्यालय और एक ऐसे छात्र की, जिन्होंने मिलकर यह साबित कर दिया कि अगर नीयत साफ हो, सोच सकारात्मक हो और साथ देने वाले मिल जाएँ, तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।

यह कहानी है अर्थकुमार की " एक ऐसे छात्र की, जो बारहवीं कक्षा में 96% अंक के साथ अपने विद्यालय का टॉपर है। वह उतना ही गंभीर है अपनी पढ़ाई को लेकर, जितना जुनूनी है अपने शौक शतरंज के लिए।

एक दिन वह संकोच भरे कदमों से अपने स्कूल के खेल प्रभारी के पास पहुँचा। आँखों में एक सपना था ,जिला स्तरीय शतरंज प्रतियोगिता में भाग लेने का। पर दिल में डर था ,कहीं स्कूल ये न कह दे कि "तुम पढ़ाई में टॉप करते हो, तुम्हें खेल की नहीं, अच्छे रिजल्ट की ज़रूरत है।"

पर हुआ कुछ और ही।

खेल प्रभारी और प्रिंसिपल सर ने बिना किसी संकोच के उसे इजाजत दे दी। क्योंकि उनका मानना था कि विद्यालय सिर्फ अच्छे अंकों की फैक्ट्री नहीं होता, बल्कि एक ऐसी जगह होता है जहाँ बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है।

अर्थकुमार ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और शानदार प्रदर्शन के कारण उसका चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हो गया। पर यह आसान नहीं था। अब उसे फिर 8 दिन की छुट्टी लेनी थी, यानी कुल 16 दिन की पढ़ाई से दूरी, क्योंकि जिला स्तरीय प्रतियोगिता में वो अपने बेशकीमती 8 दिन पहले ही दे चुका था। एक बार फिर वो उलझन में था "क्या जाना सही होगा?" पर विद्यालय ने फिर उसका हौसला बढ़ाया "अर्थकुमार, ये यादें हमेशा तुम्हारे साथ रहेंगी। कभी पीछे मुड़कर देखोगे, तो गर्व होगा कि तुमने अपने सपनों को जिया था।"

प्रतियोगिता के दिनों में अर्थ सुबह जल्दी उठता, अभ्यास करता, और शाम को जब बाकी छात्र खेलते या आराम करते, वो अपने दोस्तों से व्हाट्सएप पर पढ़ाई का सारा होमवर्क मंगवाकर अपनी पढ़ाई में जुट जाता।

आज, एक ही वर्ष में अर्थकुमार के पास कई उपलब्धियाँ हैं:-
राज्य स्तरीय शतरंज प्रतियोगिता में भाग लेने का गौरव
अच्छे अंकों से बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने का गर्व
और प्रतिष्ठित जेईई परीक्षा में चयन होने का सपना साकार करने का आत्मविश्वास।

यह सिर्फ एक छात्र की नहीं, एक सोच की जीत है।

यह कहानी हमें सिखाती है कि अगर हम बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित रखेंगे, तो हम उन्हें उनकी असली उड़ान से वंचित कर देंगे। हर बच्चा एक बीज की तरह होता है, जिसे सही वातावरण, सही पोषण और थोड़ा विश्वास चाहिए होता है। तब वह एक मजबूत वृक्ष बनकर न सिर्फ फल देता है, बल्कि दूसरों को छाया भी देता है।

विद्यालयों और अभिभावकों को यह समझना होगा कि अंकों की दौड़ में अगर हम बच्चों से उनकी पहचान छीन लेंगे, तो हम समाज को केवल 'पढ़े-लिखे रोबोट' देंगे, सोचने वाले इंसान नहीं।

शिक्षक और माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को रट्टू तोता न बनाएं, बल्कि उन्हें ऐसा माहौल दें जिसमें वे सपने देख सकें, उन्हें पूरा कर सकें और हारकर भी दोबारा उठ सकें।

अर्थकुमार की कहानी एक मिसाल है —
कि पढ़ाई और पैशन साथ-साथ चल सकते हैं,
कि सपने कभी समय की परवाह नहीं करते,
और सबसे बढ़कर यह कि एक अच्छा विद्यालय वही होता है जो बच्चों को उनके सपनों के लिए उड़ान देता है, न कि उनके पंख कतरता है।
अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे भी जीवन में कुछ बड़ा करें, तो उन्हें सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, अपने जीवन से भी कुछ सीखने का अवसर दीजिए। क्योंकि...
"सपने देखने वालों की कभी हार नहीं होती, और सपनों को जीने वालों की कोई सीमा नहीं होती।"
महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय श्री विजयनगर बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
"तस्वीर उस समय की जब अर्थकुमार ने कोटा में आयोजित राज्यस्तरीय शतरंज प्रतियोगिता में अपने जिले अनूपगढ़ का प्रतिनिधित्व किया था।"
रामचंद्र झटवाल ✍️

20/04/2025

Class starts from 21.4.25

Hello Don’t miss the opportunity
11/04/2025

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