18/07/2025
महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय श्री विजयनगर
शिक्षा, खेल, कला, योग और संस्कार – हर क्षेत्र में उत्कृष्टता की मिसाल
जहां आज भी कई माता-पिता शिक्षा के लिए निजी विद्यालयों की ओर रुख करते हैं, वहीं श्रीविजयनगर का महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय सरकारी शिक्षा व्यवस्था की ताकत और सफलता की जीती-जागती मिसाल बन गया है। इस विद्यालय ने न सिर्फ परीक्षा परिणामों में परचम लहराया, बल्कि खेल, योग, कला, पर्यावरण और समाजसेवा जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की हैं।
शिक्षा में श्रेष्ठता-बोर्ड परीक्षा में रिकॉर्ड सफलता
विद्यालय का इस वर्ष का बोर्ड परीक्षा परिणाम अभूतपूर्व रहा। कक्षा 12वीं के सभी विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। विद्यालय के टॉपर छात्र ने 96% अंक प्राप्त कर पूरे क्षेत्र में नाम रोशन किया। कक्षा 10वीं का रिजल्ट भी बेहद प्रभावशाली रहा, जिसमें टॉपर छात्र ने 97.20% अंक प्राप्त किए। कक्षा 10वीं के अधिकांश विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में रहे, केवल 2 छात्र द्वितीय श्रेणी में रहे, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। यह सफलता केवल विद्यार्थियों की मेहनत नहीं, बल्कि शिक्षकों के समर्पण, अनुशासन और विद्यालय के सकारात्मक वातावरण का प्रतिफल है।
बिना शारीरिक शिक्षक के राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विद्यालय की धमक
इस विद्यालय की सबसे प्रेरक कहानी है, शारीरिक प्रशिक्षण प्रशिक्षक के बिना खेलों में शानदार प्रदर्शन। विद्यालय में शुरू से कोई स्थायी शारीरिक शिक्षक नहीं है, लेकिन फिर भी विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय खेलों में हिस्सा लिया और कई पदक भी जीते।
विद्यालय के 25 विद्यार्थियों का चयन राज्य स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में हुआ, जबकि 2 विद्यार्थियों ने शतरंज और वेट लिफ्टिंग में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। 8 विद्यार्थियों का चयन कला उत्सव और योगा ओलंपियाड जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में हुआ, जिससे साबित होता है कि यह विद्यालय विद्यार्थियों के समग्र विकास पर बल देता है।यह सफलता केवल शैक्षणिक ही नहीं, बल्कि योग, कला जैसी गतिविधियों से मिली है।
इस बदलाव के नायक हैं, अध्यापक श्री रामचंद्र, जिन्होंने व्यक्तिगत रूप से बच्चों को निर्देशन देकर विद्यालय की छवि को खेलों के क्षेत्र में भी ऊपर उठाया। बच्चों को शतरंज, दौड़, पावर लिफ्टिंग, वेट लिफ्टिंग, बॉक्सिंग, योगा और लोक नृत्य में हिस्सा दिलवाकर उनकी प्रतिभा को जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया।
हर जन्मदिन पर एक पौधा – प्रकृति से जुड़ाव की अनूठी पहल
विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक अभिनव परंपरा शुरू की गई है। हर विद्यार्थी के जन्मदिन पर एक पौधा रोपा जाता है, जिसकी देखरेख स्वयं विद्यार्थी करता है। अब तक बहुत से पौधे स्कूल परिसर में लगाए जा चुके हैं। इससे न केवल विद्यालय परिसर हराभरा हुआ है, बल्कि विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति भावनात्मक जुड़ाव भी उत्पन्न हुआ है।
अभिभावक शिक्षक संवाद, संपूर्ण विकास की योजना
विद्यालय में आयोजित अभिभावक-शिक्षक बैठकों की विशेष बात यह है कि हर बच्चे के अभिभावक से व्यक्तिगत रूप से चर्चा की जाती है।
इसमें बच्चे के डेली रूटीन, स्वभाव, लर्निंग लेवल, रुचियाँ और यहां तक कि उसकी डाइट पर भी बातचीत होती है। प्रत्येक विद्यार्थी के लिए एक वैयक्तिक विकास रिपोर्ट तैयार की जाती है, और उसी आधार पर आगे की शैक्षणिक व नैतिक योजना बनाई जाती है। इससे बच्चों की संपूर्ण प्रगति सुनिश्चित होती है।
संगीत से संस्कार – प्रार्थना सभा बनी अद्भुत अनुभव
विद्यालय में प्रतिदिन की प्रार्थना सभा को एक अनूठे रूप में आयोजित किया जाता है। यह सभा म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट्स के साथ होती है, जहां बच्चे खुद हारमोनियम, तबला, ढोलक और अन्य वाद्ययंत्र बजाते हैं। प्रधानाचार्य श्री नरेंद्र कुमार के सानिध्य में बच्चों को सुरों की शिक्षा दी जा रही है। प्रार्थना सभा का संचालन, गायन से लेकर म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट्स बजाने तक, हर भूमिका विद्यार्थियों द्वारा निभाई जाती है। इससे न केवल उनके आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, बल्कि अनुशासन और सांस्कृतिक चेतना भी विकसित होती है।
प्रधानाचार्य श्री नरेंद्र कुमार का योगदान प्रेरणा
विद्यालय की इस बुलंद उड़ान के पीछे एक मजबूत और दूरदर्शी नेतृत्व है, प्रधानाचार्य श्री नरेंद्र कुमार का। उन्होंने शिक्षकों में टीम भावना, अनुशासन और नवाचार की संस्कृति विकसित की है। उनके नेतृत्व में अध्यापक न केवल शिक्षण कार्य में बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी में भी विशेष योगदान दे रहे हैं।
सामाजिक सहभागिता और सामुदायिक जुड़ाव
विद्यालय में स्वच्छता अभियान, रचनात्मक प्रतियोगिताएं, सामूहिक योग अभ्यास, बाल सभाएं और अभिभावक-संवाद कार्यक्रम जैसे आयोजन होते रहते हैं। अभिभावक अब खुद को स्कूल का हिस्सा मानते हैं, और समाज के सहयोग से यह विद्यालय एक शिक्षा-धाम बन चुका है। भामाशाहों द्वारा भवन निर्माण से लेकर विद्यालय में सीसीटीवी कैमरा, फर्नीचर इत्यादि मूलभूल आवश्यकताओं को पूरा किया गया है।