01/05/2026
चार लेबर कोड को रद्द करो_अमित कुमार*
1 मई मजदूर दिवस के अवसर पर सिवान शहर में मार्च निकाला गया मार्च का नेतृत्व कर रहे है सफाई मजदूर यूनियन राज्य सचिव अमित कुमार ने कहा आज पूरे विश्व में मजदुर दिवस मनाया जा रहा है। हम देख रहे है कि देश और पूरे दुनिया के मजदूर अपने मेहनत और लगन से कार्य करते है लेकिन उनके कार्य का समान व्यवहार और न वेतन नहीं मिल पता है उनका हमेशा से शोषण होते आ रहा है पहले मजदूरों को 16_18 घंटा कार्य करवाया जाता था और जिसके खिलाफ एक बहुत बड़ी लड़ाई लड़ी गई और मजदूरों की इसमें जीत हुई और कार्य करने का समय 8 घंटा किया गया। आज देख रहे है कैसे सरकार 4 श्रम बिल लाकर मजदूरों का शोषण करना चाहती है और फिर से 15_18 घंटा कार्य करवाना चाहती है इसके विरोध भी मजदूर वर्ग लड़ाई लड़ेगा और इस गलत नीति का विरोध करेगा। मजदूरों को ठेका पर रखा जा रहा है ताकि अपनी मर्जी से अपने अनुसार 14 से 16 घंटा कार्य करवाया जाए और अपने हिसाब से वेतन दिया जाए इसके विरोध हमारी लड़ाई है कि ठेका प्रथा बंद हो और उनको स्थाई किया जाए और सम्मान जनक वेतन दिया जाए ताकि मजदूरों का शोषण न हो
मई दिवस और मजदूरों की कुर्बानियों के इतिहास के बीच यह भी गौरतलब है कि लड़ कर हासिल तमाम मजदूर अधिकारों का आज छीनने का दौर चल रहा है.8 घण्टे काम का अधिकार हो या यूनियन बनाने का अधिकार, सब धीरे-धीरे खत्म किये जा रहे हैं.जहां मजदूर इन अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं,वहां उन पर बर्बर दमन ढाया जा रहा है. वाइट कॉलर नौकरीपेशा लोगों की एक बड़ी जमात है,जो स्वयं को मजदूर कहलाना पसंद नही करती,लेकिन पूंजी के शोषण की भरपूर मार झेलती है.मजदूर अधिकारों और श्रम कानूनों पर हमले के इस दौर में अथाह कुर्बानियों से हासिल इन अधिकारों को बचाने के लिए मजदूरों के एकताबद्ध संघर्ष ही एकमात्र रास्ता हैं.
दुनिया में मजदूर अधिकारों का संघर्ष और भारत मे मजदूर अधिकारों के संघर्ष का इतिहास बताता है कि दुनिया भर में मजदूरों ने एक ही तरह से लड़ कर अपने अधिकार हासिल किए हैं.इसलिये आज जो मई दिवस को बाहरी बता रहे हैं,वे मजदूरों की कुर्बानियों के समूचे इतिहास को ही मिटा देना चाहते हैं.वे मजदूरो के पक्षधर लोग नही हैं.वे मजदूरों के जायज हकों पर डाका डालने वाले,सत्ता में बैठे बाउंसर हैं.श्रम की लूट करने वाली बाहरी या भीतरी नही होता,वह सिर्फ लुटेरा होता है.उसी तरह मजदूर भी बाहरी या भीतरी नही होता,वह सिर्फ मजदूर होता है.इसलिए मजदूरों के कुर्बानियों के इतिहास में दरार पैदा करने की कोशिशों के खिलाफ मजदूरों की एकता के जरिये मुंहतोड़ जवाब दिया जाए. आज इस ऐतिहासिक दिवस पर हम सभी सरकार से मांग करते है कि जितने भी संविदा,दैनिक कर्मी बिहार में लंबे समय से कार्य कर रहे है उनको स्थाई किया जाए ठेका प्रथा को खत्म किया जाए और मजदूरों के स्वास्थ्य की गारंटी किया जाए मजदूरों के बच्चों के शिक्षा की गारंटी किया जाय
इस मार्च में छात्र नेता अनीश कुशवाहा,नीरज कुमार,कल्लू कुमार ,सन्नी कुमार,मंतोष,गोविंद,दुर्गा बांसफोर,संजय रावत,रघु,सिकंदर,गुड़िया सहित सैकड़ों कर्मी शामिल रहे।