14/09/2025
आजकल कुछ लोग किसानों की आवाज़ को दबाने में लगे हैं। युद्धवीर सिंह उनमें सबसे खतरनाक हैं। भले ही उनके पास “राष्ट्रीय महासचिव” का टाइटल है, लेकिन असली तस्वीर यही है कि उन्होंने सत्ता और पैसों के लिए किसानों को बार-बार बेचा।
2016 का जाट आरक्षण मामला कोई भूल नहीं सकता। 2023 में उन्होंने खुलकर समाज में फूट डालने की कोशिश की। उनका बयान—“जाट गांवों में मंदिर नहीं होते थे, पंडितों की पूजा धोखाधड़ी है”—ये सिर्फ शब्द नहीं, जहर है। जाट और ब्राह्मण के बीच मतभेद पैदा करना उनका खेल है, और समाज में शड्यंत्र का जाल बिछाने का उनका असली एजेंडा है।
लेकिन रवि आज़ाद? ये किसी पहचान के पीछे नहीं भागते। ये खुद पहचान हैं। ये हर छोटे किसान की आवाज़ को बुलंद करते हैं, हर अन्याय के खिलाफ खड़े होते हैं और दिखा देते हैं कि सच्ची ताकत पद, नाम या पदवी में नहीं, संघर्ष और साहस में है।
जहाँ युद्धवीर सिंह भ्रम और फूट फैलाते हैं, वहीं रवि आज़ाद ने किसानों को एकजुट किया। उन्होंने हर किसान की छोटी आवाज़ को ताकत बनाया और समाज में न्याय का सूरज उगाया।
ऐसे में युद्धवीर सिंह की हैसियत ही क्या जो रवि आजाद पर आरोप लगने की बात भी करे और यह भी साफ है कि हरियाणा के लोग इतने निरबल नहीं कि वे शड्यंत्र के जाल को तोड़ न पाएं। हरियाणा के किसान और समाज अब जाग चुके हैं, और ऐसे फरेबी एजेंडों को किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।
किसानों के लिए जो आवाज़ हमेशा सच्चाई और न्याय के पक्ष में खड़ी रहती है, वो रवि आज़ाद हैं।