16/02/2019
किसी गांव में एक चूहा था..! जो एक कसाई के घर में बिल बना कर रहता था..! एक दिन चूहे ने देखा.! कि उस कसाई और उसकी पत्नी एक थैले से कुछ निकाल रहे हैं..! चूहे ने सोचा..! कि शायद कुछ खाने का सामान है..! तो उत्सुकतावश देखने पर उसने पाया..! कि वो एक चूहेदानी थी..! डर के मारे ख़तरा भाँपने पर..! उस चुहे ने पिछवाड़े में जा कर कबूतर को यह बात बताई..! कि घर में चूहेदानी आ गयी है..! तब कबूतर ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा..! कि मुझे क्या..! मुझे कौन सा उस में फँसना है..? निराश होकर चूहा ये बात मुर्गे को बताने गया..! मुर्गे ने भी उसकी खिल्ली उड़ाते हुए कहा, " जा भाई..! जा यहां से..! ये मेरी समस्या नहीं है..! अब बेचारा हताश चूहे ने बाड़े में जा कर यह बात बकरे को ये बात बताई..! और बकरा यह सून कर हँसते हँसते लोटपोट होने लगा..! अपना मजाक बनता देख, चूहा उस घर को छोड़ जंगल की ओर निकल गया..!
ठीक उसी रात चूहेदानी में "खटाक" की आवाज़ हुई..! जिस में गलती से एक ज़हरीला साँप फंस गया था..! अँधेरे में उसकी पूँछ को चूहा समझ कर..! उस कसाई की पत्नी ने जैसे ही उसे निकाला..! तभी साँप ने उसे डस लिया..! तबीयत बिगड़ने पर उस कसाई ने हकीम को बुलवाया..! हकीम ने उसे दवाई के साथ कबूतर का सूप पिलाने की सलाह दी..! कबूतर अब पतीले में उबल रहा था..! यह खबर सुनकर उस कसाई के कई रिश्तेदार मिलने आ पहुँचे..! जिनके भोजन प्रबंध हेतु अगले दिन उसी मुर्गे को काटा गया..! कुछ दिनों बाद उस कसाई की पत्नी सही सलामत हो गयी..! तो खुशी में उस कसाई ने अपने कुछ शुभचिंतकों के लिए एक दावत रखी..! फिर खुशी के माहौल बकरे को काटा गया..! लेकिन इधर चूहा अब दूर जा चुका था..! बहुत दूर..!
समझे मित्रो..! अगली बार कोई आपको अपनी समस्या बतायेे..! और आप को लगे..! कि ये मेरी समस्या नहीं है..! तो रुकिए और दुबारा सोचिये..! हो सकता है वही समस्या कल आपके पल्ले आ जाय..! जब समाज का हर एक अंग..! हर एक तबका..! हर एक नागरिक खतरे में है..! तभी तो पूरा देश खतरे में है..! आप सब अपने-अपने दायरे से बाहर निकलिये..! स्वयं तक सीमित मत रहिये..! सामाजिक बनिये..! आज जो समस्या किसी दूसरे की है..! हो सकता है कल वही समस्या आपके साथ उत्पन्न हो जाय..!