02/08/2019
रैमन मैग्ससे पुरुस्कार यानि एशिया का नोबेल प्राईज इस बार एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार श्री रवीश कुमार जी को गया है। इस उपलक्ष्य पर उन्हें कोटि कोटि बधाई। उनका प्राइम टाइम कार्यक्रम भारतीय पत्रकारिता जगत का सबसे अधिक देखे जाना वाला तथा पसन्द किया जाने वाला कार्यक्रम है। विपरीत स्थितियों में जब यह कार्यक्रम अपने आधार पर टिका रहा तो यह सम्मान उन्हें यकीनन मिलना ही था। सरकार ने इस चैनल पर लगाम लगाने हेतु तमाम हथकंडे अपनाए, सीबीआई, इनकम टैक्स, तमाम सर्वाधिकार, सबको पीछे छोड़ दिये कई बार प्रसारण बन्द करवाया, बीजेपी के प्रवक्ताओं को मंच छोड़कर जाना पड़ा, आईटीसेल व भक्तों द्वारा भी सबसे अधिक ट्रोल किये गए जिन्हें कि सरकार द्वारा मूक समर्थन भी प्राप्त था। मगर चैनल व रवीश जी के सिंद्धान्त हमेशा अडिग रहे।
जिस तरह का माहौल था इस लिहाज से जीटीवी के सुधीर चौधरी या फिर अन्य जैसे रजत शर्मा, अर्नब गोस्वामी, अंजना ओम कश्यप आदि को यह पुरस्कार जाना तय था मगर मैग्ससे सम्मान देने वालों धन्यबाद जिन्होंने जमीनी हकीकत पर अवश्य ही विचार और कार्य किये होंगे। पत्रकारिता का अर्थ ही सरकार से पूछना है व सरकार को हर मुददे पर घेरना होता है न कि सरकार की वाहवाही करना। दूसरा काम साम्प्रदायिक बहस से दूर रहना तथा तथा जनता में सौहार्द कायम करना। जिसे इस चैनल ने हमेशा कायम रखा। सबसे बड़ी बात यह सम्मान रवीश जी को मिलने के बाद बाकि पत्रकार शायद पत्रकारिता के अर्थ को समझने का प्रयास करेंगे।
आपको बता दूं रैमन पुरुस्कार 1957 से फिलीपींस के राष्ट्रपति रैमन मैग्ससे की याद में दिया जाता है। अबतक कुल 56 भारतीयों को यह पुरस्कार दिया जा चुका है। रवीश जी जो यह पुरस्कार जर्नलिज्म, लिट्रेचर और क्रिएटिव कम्युनिकेशन आर्ट्स की श्रेणी में दिया गया है। इस श्रेणी में पुरस्कार पाने वालों में रवीश कुमार 11वें भारतीय हैं जबकि केवल पत्रकारिता की श्रेणी में ऐसे छठे पत्रकार हैं। इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह पुरस्कार मिल चुका है। एकबार फिर से रवीश जी को पत्रकारिता जिंदा रखने और इस पुरस्कार को हासिल करने के लिए बहुत बहुत बधाई।
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