Ajit Kumar Nitharwal

Ajit Kumar Nitharwal You know here about our country problem and solution.

08/11/2021
16/02/2021

विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती जी की आराधना के महापर्व "बसंत पंचमी" की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं
#बसंतपंचमी

29/04/2020

I think this one is good video for fight or motivate angaist covid19.

भारत माता की जय बोलते हुए आप किसी औरत को पीटते हैं तो लानत है ऐसी देशभक्ति पर. और इतनी ही देशभक्ति है तो मुँह पर नक़ाब क...
09/01/2020

भारत माता की जय बोलते हुए आप किसी औरत को पीटते हैं तो लानत है ऐसी देशभक्ति पर.

और इतनी ही देशभक्ति है तो मुँह पर नक़ाब किस बात का लगाए हो.

जिन्हें लगता है कि ये दक्षिणपंथी गुंडे नहीं थे तो आप अपनी बुद्धि का इलाज कराएँ. और दिल्ली पुलिस से पूछें कि ये कौन गुंडे थे जिन्हें उन्होंने गेट से बाहर लाठियों के साथ निकल कर जाने दिया.

वो कौन लोग थे जो पुलिस के सामने योगेन्द्र यादव से मार पीट करते रहे और पुलिस देखती रही.

हिंसा अगर वामपंथियों ने की तो पुलिस ने जाकर रोका क्यों नहीं. इसलिए मूर्खतापूर्ण और बचकाने सवाल अपने वाट्सएप के लिए रखें.

और याद रखें. यूपी में पहले मुसलमानों के घर घुसे. जेएनयू में छात्रों के हॉस्टलों में घुसे. अब दलितों की बारी है और फिर आपकी बारी है. तब चिल्लाते रहना भारत माता की जय.

कोई नहीं सुनेगा. कह देता हूँ.
✍ Ajit kumar

04/01/2020

वह लड़की

स्कूल के सामने बहुत ट्रैफ़िक थी । इसलिये एक अस्पताल के सामने रोड पर उसने अपनी आटोरिक्शा लगायी और जल्दी जल्दी वह स्कूल के तरफ़ चलने लगा । स्कूल से लगातार फ़ोन आ रहें थे उसे ।

उसकी बेटी अब सातवीं कक्षा में पढ़ रही थी । वह खुद कम पढ़ा था पर अपनी इकलौती बेटी खुब पढ़े, बहुत बड़ी बन जाये यहीं उसकी इच्छा थी । इसलिये शहर के एक बड़े स्कूल में उसने अपनी बेटी का एडमिशन लिया था । बहुत श्रम कष्ट कर वह उसके सब ख़र्च उठा रहा था ।

बेटी भी प्रतिभाशाली थी, खुब पढ़ाई कर रहीं थीं । क्लास में हमेशा फ़र्स्ट आती थी ।

कल रात उसके बेटी ने बताया । ग़र फ़ी नहीं भरीं तों उसे स्कूल से निकाला जायेगा । बढ़ी फ़ी और बिमारी के कारण इस साल वह फ़ी भर नहीं पाया । सुबह से कुछ उधार लेकर उसने २५ हज़ार रूपये जमा किए और वहीं पैसे लिए वह स्कूल के तरफ़ जाने लगा ।

जातें जातें अस्पताल के दरवाज़े के सामने उसके बेटी के उम्र की एक लड़की डाक्टर को विनती करते बोल रही थी, “डाक्टर प्लीज़ मुझे मदद किजीए । मेरे पास इतने पैसे नहीं । मेरे माँ को बचाइये ।”
उसके आँखों से आँसू बह रहे थे । डाक्टर उसे बोले, “मैं
कुछ नहीं कर सकता । आपरेशन के २५,००० भर दो, हम फ़ौरन आपरेशन कर देंगे ।”

न जाने क्यों पर वह वहीं ठहर गया । उस लड़की के पास जाकर उसने उससे सब पुँछ लिया । बिना कुछ सोचे उस ने पॉकेट से पैसे निकाले और आपरेशन के लिए भर दिए । लड़की ने हाथ जोड़कर उसके आभार मान लिये ।

स्कूल में प्रवेश करते वक्त उसकी धड़कनें तेज़ हो गयीं थी । अब क्या होगा? मैंने ये क्या किया? मेरी बेटी को स्कूल से निकाल तो नहीं देंगे? सोचते सोचते वो स्कूल में गया । उसे स्कूल के संचालिका ने ऑफ़िस बुलाया था ।

ऑफ़िस में प्रवेश करते ही संचालिका ने पुछा, “ सुबह से आप को फ़ोन कर रहे हैं हम । फ़ोन क्यों नहीं उठाया?”

“मुझे माफ़ कीजिए ।” बोलते बोलते उसकी नज़र नीचे झुक गयी । वह पसीने से पुरी तरह से भीग गया था। अब इन्हें मैं क्या बताऊँ ?

तभी संचालिका बोलीं, “आपके लिए एक अच्छी ख़बर है । एक बड़ी कंपनीने एक प्रतियोगिता लियी थी और आपके बेटी के साथ और दो लड़कियाँ सिलेक्ट हो गयीं । इन लड़कियों का ग्रैजुएशन तक का सब ख़र्चा कंपनी उठायेगी और साथ ही हर महीने एक हज़ार स्कॉलरशिप भी उसे मिलेगी ।”

हाथ जोड़ते खुशीसे उसने आँखें बंद कर दी और उसी क्षण उसे हाथ जोड़े उसके आभार मानतीं वह लड़की याद आयी ।

Copied from
प्रमोद वाघमारे
आपके अभिप्राय ज़रूर लिखें 🙏🙏

क्रिसमस   की   छुट्टी   के   कारण   होटल   में   चेक   इन   के   लिए   बहुत   भीड़   जमा   हो   गई   थी   ।   एकदम   से   बहुत   लोग   आ.....

04/01/2020

वह लड़की

स्कूल के सामने बहुत ट्रैफ़िक थी । इसलिये एक अस्पताल के सामने रोड पर उसने अपनी आटोरिक्शा लगायी और जल्दी जल्दी वह स्कूल के तरफ़ चलने लगा । स्कूल से लगातार फ़ोन आ रहें थे उसे ।

उसकी बेटी अब सातवीं कक्षा में पढ़ रही थी । वह खुद कम पढ़ा था पर अपनी इकलौती बेटी खुब पढ़े, बहुत बड़ी बन जाये यहीं उसकी इच्छा थी । इसलिये शहर के एक बड़े स्कूल में उसने अपनी बेटी का एडमिशन लिया था । बहुत श्रम कष्ट कर वह उसके सब ख़र्च उठा रहा था ।

बेटी भी प्रतिभाशाली थी, खुब पढ़ाई कर रहीं थीं । क्लास में हमेशा फ़र्स्ट आती थी ।

कल रात उसके बेटी ने बताया । ग़र फ़ी नहीं भरीं तों उसे स्कूल से निकाला जायेगा । बढ़ी फ़ी और बिमारी के कारण इस साल वह फ़ी भर नहीं पाया । सुबह से कुछ उधार लेकर उसने २५ हज़ार रूपये जमा किए और वहीं पैसे लिए वह स्कूल के तरफ़ जाने लगा ।

जातें जातें अस्पताल के दरवाज़े के सामने उसके बेटी के उम्र की एक लड़की डाक्टर को विनती करते बोल रही थी, “डाक्टर प्लीज़ मुझे मदद किजीए । मेरे पास इतने पैसे नहीं । मेरे माँ को बचाइये ।”
उसके आँखों से आँसू बह रहे थे । डाक्टर उसे बोले, “मैं
कुछ नहीं कर सकता । आपरेशन के २५,००० भर दो, हम फ़ौरन आपरेशन कर देंगे ।”

न जाने क्यों पर वह वहीं ठहर गया । उस लड़की के पास जाकर उसने उससे सब पुँछ लिया । बिना कुछ सोचे उस ने पॉकेट से पैसे निकाले और आपरेशन के लिए भर दिए । लड़की ने हाथ जोड़कर उसके आभार मान लिये ।

स्कूल में प्रवेश करते वक्त उसकी धड़कनें तेज़ हो गयीं थी । अब क्या होगा? मैंने ये क्या किया? मेरी बेटी को स्कूल से निकाल तो नहीं देंगे? सोचते सोचते वो स्कूल में गया । उसे स्कूल के संचालिका ने ऑफ़िस बुलाया था ।

ऑफ़िस में प्रवेश करते ही संचालिका ने पुछा, “ सुबह से आप को फ़ोन कर रहे हैं हम । फ़ोन क्यों नहीं उठाया?”

“मुझे माफ़ कीजिए ।” बोलते बोलते उसकी नज़र नीचे झुक गयी । वह पसीने से पुरी तरह से भीग गया था। अब इन्हें मैं क्या बताऊँ ?

तभी संचालिका बोलीं, “आपके लिए एक अच्छी ख़बर है । एक बड़ी कंपनीने एक प्रतियोगिता लियी थी और आपके बेटी के साथ और दो लड़कियाँ सिलेक्ट हो गयीं । इन लड़कियों का ग्रैजुएशन तक का सब ख़र्चा कंपनी उठायेगी और साथ ही हर महीने एक हज़ार स्कॉलरशिप भी उसे मिलेगी ।”

हाथ जोड़ते खुशीसे उसने आँखें बंद कर दी और उसी क्षण उसे हाथ जोड़े उसके आभार मानतीं वह लड़की याद आयी ।

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प्रमोद वाघमारे post

आपके अभिप्राय ज़रूर लिखें 🙏🙏🙏

क्रिसमस   की   छुट्टी   के   कारण   होटल   में   चेक   इन   के   लिए   बहुत   भीड़   जमा   हो   गई   थी   ।   एकदम   से   बहुत   लोग   आ.....

जय भारतपटवारी  सच जानता हैपटवारी - कानूनगो को बताता है की 100% किसान दुःखी है,कानूनगो - नायब तहसीलदार को बताता है कि 90%...
02/08/2019

जय भारत
पटवारी सच जानता है
पटवारी - कानूनगो को बताता है की 100% किसान दुःखी है,
कानूनगो - नायब तहसीलदार को बताता है कि 90% किसान दुःखी हैं,
नायब तहसीलदार - तहसीलदार को बताता है कि 80% किसान दुःखी हैं,
तहसीलदार - कलेक्ट्रेट को बताता है 60% किसान दुःखी हैं,
कलेक्ट्रेट - मंत्री को बताता है कि सिर्फ 40% किसान दुःखी हैं,
मंत्री - मुख्यमंत्री को बताता है कि बस 20% किसान दुखी हैं,
मुख्यमंत्री - प्रधानमंत्री को बताता है कि only 10% किसान दुःखी हैं,

प्रधानमंत्री वापिस किसान को बताता है कि मित्रो अब कोई किसान दुःखी नहीं है, सबके अच्छे दिन आ गए, किसान स्वर्ग में है, स्वर्ग में।।।

किसान ये सुन कर रस्सी ले कर खेत में चला जाता है, शायद स्वर्ग का रस्ता खेत से ही जाता होगा।
लेकिन वहां रस्सी का क्या काम?

साथ में एक तस्वीर चिपका रहा हूं बाकी की सारी बातें यह तस्वीर बयां कर.....

रैमन मैग्ससे पुरुस्कार यानि एशिया का नोबेल प्राईज इस बार एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार श्री रवीश कुमार जी को गया है। इस उपल...
02/08/2019

रैमन मैग्ससे पुरुस्कार यानि एशिया का नोबेल प्राईज इस बार एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार श्री रवीश कुमार जी को गया है। इस उपलक्ष्य पर उन्हें कोटि कोटि बधाई। उनका प्राइम टाइम कार्यक्रम भारतीय पत्रकारिता जगत का सबसे अधिक देखे जाना वाला तथा पसन्द किया जाने वाला कार्यक्रम है। विपरीत स्थितियों में जब यह कार्यक्रम अपने आधार पर टिका रहा तो यह सम्मान उन्हें यकीनन मिलना ही था। सरकार ने इस चैनल पर लगाम लगाने हेतु तमाम हथकंडे अपनाए, सीबीआई, इनकम टैक्स, तमाम सर्वाधिकार, सबको पीछे छोड़ दिये कई बार प्रसारण बन्द करवाया, बीजेपी के प्रवक्ताओं को मंच छोड़कर जाना पड़ा, आईटीसेल व भक्तों द्वारा भी सबसे अधिक ट्रोल किये गए जिन्हें कि सरकार द्वारा मूक समर्थन भी प्राप्त था। मगर चैनल व रवीश जी के सिंद्धान्त हमेशा अडिग रहे।

जिस तरह का माहौल था इस लिहाज से जीटीवी के सुधीर चौधरी या फिर अन्य जैसे रजत शर्मा, अर्नब गोस्वामी, अंजना ओम कश्यप आदि को यह पुरस्कार जाना तय था मगर मैग्ससे सम्मान देने वालों धन्यबाद जिन्होंने जमीनी हकीकत पर अवश्य ही विचार और कार्य किये होंगे। पत्रकारिता का अर्थ ही सरकार से पूछना है व सरकार को हर मुददे पर घेरना होता है न कि सरकार की वाहवाही करना। दूसरा काम साम्प्रदायिक बहस से दूर रहना तथा तथा जनता में सौहार्द कायम करना। जिसे इस चैनल ने हमेशा कायम रखा। सबसे बड़ी बात यह सम्मान रवीश जी को मिलने के बाद बाकि पत्रकार शायद पत्रकारिता के अर्थ को समझने का प्रयास करेंगे।

आपको बता दूं रैमन पुरुस्कार 1957 से फिलीपींस के राष्ट्रपति रैमन मैग्ससे की याद में दिया जाता है। अबतक कुल 56 भारतीयों को यह पुरस्कार दिया जा चुका है। रवीश जी जो यह पुरस्कार जर्नलिज्म, लिट्रेचर और क्रिएटिव कम्युनिकेशन आर्ट्स की श्रेणी में दिया गया है। इस श्रेणी में पुरस्कार पाने वालों में रवीश कुमार 11वें भारतीय हैं जबकि केवल पत्रकारिता की श्रेणी में ऐसे छठे पत्रकार हैं। इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह पुरस्कार मिल चुका है। एकबार फिर से रवीश जी को पत्रकारिता जिंदा रखने और इस पुरस्कार को हासिल करने के लिए बहुत बहुत बधाई।

।।

05/05/2019

मुझे केजरीवाल पसंद हैं नही है, लेकिन उन्हें लगातार थप्पड़ खाने पर मुझे दुख हुआ।
ये जनता नपुंसक है, इसे पता है केजरीवाल को थप्पड़ मारना आसान है, हिम्मत है तो जाकर राज ठाकरे, राजा भैया, अमितशाह योगीआदित्यनाथ, जैसो को थप्पड़ मारकर दिखाओ, बदले में पूरा घर ने पीटा गया तो बताना।
केजरीवाल ने ऐसा कौन सा बड़ा पाप कर दिया है, लाखों करोड़ो का घोटाला है उसपर?? हत्या लूट छेड़खानी जालसाजी जैसे किसी भी संगीन अपराध में नाम है??
दिल्ली को बेच डाला है क्या??
झुग्गियों बस्तियों को जलवा दिया है क्या?? कौन सा इतना बड़ा पाप किया है जिसके लिए थप्पड़ मारा जा रहा??
इस देश की एक ख़ासियत है, जो सौ जूते मारता है उसके आगे सर झुकाए खड़े रहते है लेकिन जिसने शराफ़त दिखा दी, उसके सर पर चढ़ के मूतने लगते है।

दिल से ज्यादा उपजाऊ ओर कोई जगह नही हो सकती,बाकी आप पे निर्भर करता है कि आप प्यार बोते है या नफरतAKJAT
22/12/2018

दिल से ज्यादा उपजाऊ ओर कोई जगह नही हो सकती,
बाकी आप पे निर्भर करता है कि आप प्यार बोते है या नफरत
AKJAT

Netflix से भी ज्यादा tv ad भाजपा द्वारा दिये जा रहे हैं। इसके लिए गर्व करें एसा मुझे तो कुछ नजर नहीं आता। फिर भी मुझे लग...
25/11/2018

Netflix से भी ज्यादा tv ad भाजपा द्वारा दिये जा रहे हैं। इसके लिए गर्व करें एसा मुझे तो कुछ नजर नहीं आता। फिर भी मुझे लगता है कि आप इस बारे मैं सोचे। Netflix तो कुछ ना कुछ बेच रही हैं लेकिन भाजपा क्या बेच रही हैं।

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