01/05/2026
#विश्व_मजदूर_दिवस:
आज 1 मई है, दुनिया मज़दूर दिवस मना रही है। पर क्या हमें पता है कि आज का असली मज़दूर कौन है? इतिहास गवाह है कि जब किसान अपने खेत छोड़कर शहर गया, तो वह मज़दूर बना। तब वह संगठित था, उसकी एक आवाज़ थी। पर आज मज़दूर की शक्ल बदल दी गई!
आज का मज़दूर वो किसान का पोता है, जिसने गाँव की ज़मीन बेचकर या बैंकों का कर्जा लेकर बीटेक-एमबीए की डिग्रियां लीं। उसे लगा वो 'साहब' बन गया, पर असल में वो बस एक 'पढ़ा-लिखा ट्रेंड क्लास लेबर' बन के रह गया।
इन साहबों की बाजीगरी तो देखो हाथ में माउस है, बदन पर कोट है और ऑफिस में AC है। पर जेब में एक भूखा क्रेडिट कार्ड है और सिर पर गाड़ियों और फ्लैट्स की किस्तों का बोझ। पैसे वालों ने बड़ी चालाकी से इन्हें 'मैनेजर' और 'इंजीनियर' का नाम दे दिया ताकि इन्हें कभी अहसास ही न हो कि ये भी मज़दूर हैं।
आज कंपनियों को सिर्फ लेबर नहीं, बल्कि 'पढ़ा-लिखा ट्रेंड क्लास लेबर' चाहिए। यह पैसे वालों की सबसे बड़ी बाज़ीगरी है कि उन्होंने मज़दूर को यह अहसास ही नहीं होने दिया कि वह मज़दूर है।
आज के इस 'विकसित मज़दूर' की हकीकत देखिए:
** इसके पास सड़क से भी अच्छी गाड़ी है, लेकिन वो लोन पर है।
** इसके पास ज़मीन की कीमत से कई गुना महंगा फ्लैट है, जिसकी किस्तें ताउम्र चलनी हैं।
** इसके पास बच्चों के महंगे स्कूल और अस्पतालों के भारी भरकम बिल हैं।
और इन सबसे ऊपर है एक 'भूखा क्रेडिट कार्ड', जिसे भरने के लिए इसे दिन-रात मशीन की तरह काम करना पड़ता है।
चाहे वह हाथ में माउस लिए बैठा सॉफ्टवेयर इंजीनियर हो, कोट पहनकर खड़ा एंकर हो, या एयरप्लेन के इकॉनमी क्लास में फाइलें निपटाती कॉर्पोरेट गर्ल — ये सब 'उनके' ट्रेंड लेबर्स हैं। और भी बहुत सारे उदाहरण भरे पड़े है! हमारे आस-पास हमको रोज देखने को मिलते है! इनके लिए मज़दूर दिवस सिर्फ एक 'मदर्स डे' या 'फादर्स डे' जैसा एक स्टेटस डालने का दिन बनकर रह गया है।
लेकिन सच तो ये है दोस्त... पसीना चाहे धूप में बहे या AC के कमरे में, जब तक आप किसी और की तिजोरी भरने के लिए अपनी मेहनत बेच रहे हो, आप मज़दूर ही हो। अपनी हकीकत पहचानो, और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करो।
दुनिया भर के तमाम मेहनतकशों और इस नए दौर के ट्रेंड क्लास मज़दूरों को भी मज़दूर दिवस की क्रांतिकारी बधाई! ✊❣️
मज़दूर-किसान एकता ज़िंदाबाद! ✊
Abid Husain
Mangej Choudhary Nohar
Amra Ram
Balwan Poonia