Neeraj Sharma

Neeraj Sharma नीरज शर्मा
प्रधान - ग्राम पँचायत पंतेह

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! #स्वतंत्रता दिवस
15/08/2025

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!
#स्वतंत्रता दिवस

दीपोत्सव  #दीपावाली की हार्दिक शुभकामनाएं!
31/10/2024

दीपोत्सव #दीपावाली की हार्दिक शुभकामनाएं!

07/09/2024

हर वर्ष की भांति स्व. श्री संकेत भारती जी की याद में कल परनाल में रक्तदान शिविर होने जा रहा है।
आप सभी से निवेदन है कि अधिक से अधिक संख्या में रक्तदान करें।

ईश ना नहीं - केवल कृष्णा...Ishna nahi only  ...कभी जीसज से तो डांडिया करवाओ,तब तक श्री कृष्ण जन्माष्टमी तो मनाओ!!जीसज को...
26/08/2024

ईश ना नहीं - केवल कृष्णा...
Ishna nahi only ...
कभी जीसज से तो डांडिया करवाओ,
तब तक श्री कृष्ण जन्माष्टमी तो मनाओ!!
जीसज को माखन मिश्री का प्रसाद खिलाएं,
धर्मरक्षक कान्हा जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!!
#श्रीकृष्ण #जन्माष्टमी

भारत गणराज्य के 78वें स्वतंत्रता दिवस की समस्त भारतीयों को हार्दिक शुभकामनाएं!आशा है कि हम सब अपनी अपनी जिम्मेवारी और भा...
15/08/2024

भारत गणराज्य के 78वें स्वतंत्रता दिवस की समस्त भारतीयों को हार्दिक शुभकामनाएं!
आशा है कि हम सब अपनी अपनी जिम्मेवारी और भागीदारी सुनिश्चित कर भारत को विकसित राष्ट्र बनाकर अपने अधिकारों की ओर बढ़ें।

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!!
15/08/2024

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!!

17 जून/पुण्यतिथिशिवाजी की निर्माता माँ जीजाबाई यों तो हर माँ अपनी सन्तान की निर्माता होती है; पर माँ जीजा ने अपने पुत्र ...
17/06/2024

17 जून/पुण्यतिथि
शिवाजी की निर्माता माँ जीजाबाई

यों तो हर माँ अपनी सन्तान की निर्माता होती है; पर माँ जीजा ने अपने पुत्र शिवाजी के केवल शरीर का ही निर्माण नहीं किया, अपितु उनके मन और बुद्धि को भी इस प्रकार गढ़ा कि वे आगे चलकर भारत में मुगल शासन की चूलें हिलाकर हिन्दू साम्राज्य की स्थापना में सफल हुए।

जीजा का जन्म महाराष्ट्र के सिन्दखेड़ ग्राम में 12 जनवरी, 1602 (पौष शुक्ल पूर्णिमा) को हुआ था। उनके पिता लखूजी जाधव अन्य मराठा सरदारों की तरह निजामशाही की सेवा करते थे। इन सरदारों को निजाम से जमींदारी तथा उपाधियाँ प्राप्त थीं; पर ये सब एक-दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास करते रहते थे। इनमें परस्पर युद्ध भी होते रहते थे।

एक बार रंगपंचमी पर लखूजी के घर में उत्सव मनाया जा रहा था। अनेक सरदार वहाँ सपरिवार आये थे। लखूजी की पुत्री जीजा तथा उनके अधीन कार्यरत शिलेदार मालोजी के पुत्र शहाजी आपस में खूब खेल रहे थे। लखूजी ने कहा - वाह, इनकी जोड़ी कितनी अच्छी लग रही है। मालोजी ने लखूजी से कहा, इसका अर्थ है कि हम आपस में समधी हो गये।

इस पर लखूजी बिगड़ गये। उन्होंने कहा कि मैंने तो यह मजाक में कहा था। मेरे जैसे सरदार की बेटी तुम्हारे जैसे सामान्य शिलेदार की बहू कैसे बन सकती है ? इस पर मालोजी नाराज हो गये। उन्होंने कहा, अब मैं यहाँ तभी आऊँगा, जब मेरा स्तर भी तुम जैसा हो जाएगा। मालोजी ने लखूजी की नौकरी भी छोड़ दी।

अब वे अपने गाँव आ गये; पर उनका मन सदा उद्विग्न रहता था। एक रात उनकी कुलदेवी जगदम्बा ने स्वप्न में उन्हें आशीर्वाद दिया। अगले दिन जब वे अपने खेत में खुदाई कर रहे थे, तो उन्हें स्वर्ण मुद्राओं से भरे सात कलश मिले। इससे उन्होंने 2,000 घोड़े खरीदे और 1,000 सैनिक रख लिये। उन्होंने ग्रामवासियों तथा यात्रियों की सुविधा के लिए अनेक मन्दिर, धर्मशाला तथा कुएँ बनवाये। इससे उनकी ख्याति सब ओर फैल गयी।

यह देखकर निजाम ने उन्हें ‘मनसबदार’ का पद देकर शिवनेरी किला तथा निकटवर्ती क्षेत्र दे दिया। अब वे मालोजी राव भोंसले कहलाने लगे। उधर लखूजी की पत्नी अपने पति पर दबाव डाल रही थी कि जीजा का विवाह मालोजी के पुत्र शहाजी से कर दिया जाये। लखूजी ने बड़ी अनिच्छा से यह सम्बन्ध स्वीकार किया। कुछ समय बाद मालोजी का देहान्त हो गया और उनके बदले शहाजी निजाम के अधीन सरदार बनकर काम करने लगे।

जीजाबाई के मन में यह पीड़ा थी कि उसके पिता और पति दोनों मुसलमानों की सेवा कर रहे हैं; पर परिस्थिति ऐसी थी कि वह कुछ नहीं कर सकती थी। जब वह गर्भवती हुई, तो उन्होंने निश्चय किया कि वे अपने पुत्र को ऐसे संस्कार देंगी, जिससे वह इस परिस्थिति को बदल सके।

शहाजी प्रायः युद्ध में व्यस्त रहते थे, इसलिए उन्होंने जीजाबाई को शिवनेरी दुर्ग में पहुँचा दिया। वहाँ उन्होंने रामायण और महाभारत के युद्धों की कथाएँ सुनीं। इससे गर्भस्थ बालक पर वीरता के संस्कार पड़े।

19 फरवरी, 1630 को शिवाजी का जन्म हुआ। आगे चलकर छत्रपति शिवाजी ने मुगल राजशाही को परास्त कर 6 जून, 1674 को भारत में हिन्दू पद पादशाही की स्थापना की। जीजाबाई मानो इसी दिन के लिए जीवित थीं। शिवाजी को सिंहासन पर विराजमान देखने के बारहवें दिन 17 जून, 1674 (ज्येष्ठ कृष्ण 9) को उन्होंने आँखें मूँद लीं।
साभार: विजय नड्डा जी

ग्राम पँचायत पँतेहड़ा के पीएम श्री राजकीय प्राथमिक केंद्रीय विद्यालय में पढ़ने वाली गांव सौंखर से सुभाष चंद की बिटिया कनि...
16/06/2024

ग्राम पँचायत पँतेहड़ा के पीएम श्री राजकीय प्राथमिक केंद्रीय विद्यालय में पढ़ने वाली गांव सौंखर से सुभाष चंद की बिटिया कनिका ने स्वर्ण जयंती छात्रवृति योजना का पहला चरण उत्तीर्ण कर लिया हैं।
विद्यालय के समस्त आचार्यवृंद के सफल प्रयासों तथा कनिका के माता - पिता को हार्दिक शुभकामनाएं।
मैं इस बच्ची के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं।

नीरज शर्मा
प्रधान ग्राम पंचायत पंतेहड़ा

सूचनाग्राम पँचायत पँतेहड़ा के छ्यावीं गांव से मोहिंदर आज फिर सुबह 5 बजे से घर से कहीं चला गया है।मोहिंदर दिमागी तौर पर पू...
15/06/2024

सूचना
ग्राम पँचायत पँतेहड़ा के छ्यावीं गांव से मोहिंदर आज फिर सुबह 5 बजे से घर से कहीं चला गया है।
मोहिंदर दिमागी तौर पर पूर्णतया अस्वस्थ है लेकिन बहुत ही सीधा साधा है।
आप सभी से निवेदन है कि यदि आपने इसको कहीं देखा है या फिर आपको कहीं भी मोहिंदर दिखाई देता है तो उसे अपने पास रोक लें और हमें 8580409751 नंबर पर संपर्क करें।
इसके घरवाले बहुत परेशान हैं।

हिमाचल शिक्षा समिति द्वारा संचालित सरस्वती विद्या मन्दिरों के NEET 2024 परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले सभी पूर्व छात्र भैया/...
11/06/2024

हिमाचल शिक्षा समिति द्वारा संचालित सरस्वती विद्या मन्दिरों के NEET 2024 परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले सभी पूर्व छात्र भैया/बहिनों को बहुत बहुत शुभकामनाएं।💐

नीरज शर्मा
प्रांत प्रमुख
पूर्व छात्र परिषद
विद्या भारती हिमाचल

#विद्या_भारती_हिमाचल

खुशखबरी!समस्त इलाकावासियों को सूचित किया जाता है कि लोगों की लंबे समय से चंडीगढ़ के लिए बस डिमांड को पूरा कर दिया गया है...
09/06/2024

खुशखबरी!
समस्त इलाकावासियों को सूचित किया जाता है कि लोगों की लंबे समय से चंडीगढ़ के लिए बस डिमांड को पूरा कर दिया गया है।
जिसके लिए हम मंत्री श्री Rajesh Dharmani जी तथा हिमाचल पथ परिवहन निगम प्रबंधन का साधुवाद व्यक्त करते हैं।
बिलासपुर डिपो की इस बस के एवज में बेला रूट बंद कर दिया गया है जोकि जाहू से चलकर चार धाम यात्रा करके घुमारवीं के लिए जाता था।
इसके बदले अब हमें जाहू से सुबह ठीक सवा सात बजे घुमारवीं और चंडीगढ़ के लिए वाया भराड़ी, दधोल फोरलेन होते हुए कनेक्टिविटी मिल चुकी है।
घुमारवीं से चंडीगढ के लिए चलने का समय सुबह 08:50 मिनट पर है
बापसी में चंडीगढ़ से जाहू के लिए चलने का समय दोपहर 02:50 और घुमारवीं से जाहू के लिए समय शाम 06:10 का रहेगा।
इस बस का सफल ट्रायल हो चुका है और अब आप कल से सुचारू रूप से इस सामान्य बस का लाभ उठा सके हैं।
कल आपको बस रूट पर उपलब्ध मिलेगी।

***************** *श्री गुरु जी ****************                  *(5 जून,1973/ पुण्य-तिथि)*                  संघ के संस...
05/06/2024

***************** *श्री गुरु जी ****************
*(5 जून,1973/ पुण्य-तिथि)*
संघ के संस्थापक परम् पूजनीय डा. हेडगेवार जी ने अपने देहान्त से पूर्व जिनके समर्थ कन्धों पर संघ का भार सौंपा, वे थे श्री माधवराव गोलवलकर, जिन्हें सब प्रेम से श्री गुरुजी कहकर पुकारते हैं। आज उनकी 48 वीं पुण्य-तिथि है|
श्रीगुरुजी का जन्म 19 फरवरी, 1906 (विजया एकादशी) को नागपुर में अपने मामा के घर हुआ था। उनके पिता श्री सदाशिव गोलवलकर उन दिनों नागपुर से 70 कि.मी. दूर रामटेक में अध्यापक थे।
माधव बचपन से ही अत्यधिक मेधावी छात्र थे। उन्होंने सभी परीक्षाएँ सदा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं। कक्षा में हर प्रश्न का उत्तर वे सबसे पहले दे देते थे। अतः उन पर यह प्रतिबन्ध लगा दिया गया कि जब कोई अन्य छात्र उत्तर नहीं दे पायेगा, तब ही वह बोलेंगे |
उच्च शिक्षा के लिए काशी जाने पर उनका सम्पर्क संघ से हुआ। वे नियमित रूप से शाखा पर जाने लगे। जब डा. हेडगेवार जी काशी आये, तो उनसे वार्तालाप में माधव का संघ के प्रति विश्वास और दृढ़ हो गया। एम-एस.सी. करने के बाद वे शोधकार्य के लिए मद्रास गये; पर वहाँ का मौसम अनुकूल न आने के कारण वे काशी विश्वविद्यालय में ही प्राध्यापक बन गये।
उनके मधुर व्यवहार तथा पढ़ाने की अद्भुत शैली के कारण सब उन्हें ‘गुरुजी’ कहने लगे और फिर तो यही नाम उनकी पहचान बन गया। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक मालवीय जी भी उनसे बहुत प्रेम करते थे। कुछ समय काशी रहकर वे नागपुर आ गये और कानून की परीक्षा उत्तीर्ण की। उन दिनों उनका सम्पर्क रामकृष्ण मिशन से भी हुआ और वे एक दिन चुपचाप बंगाल के सारगाछी आश्रम चले गये। वहाँ उन्होंने विवेकानन्द के गुरुभाई स्वामी अखंडानन्द जी से दीक्षा ली।
स्वामी जी के देहान्त के बाद वे नागपुर लौट आये तथा फिर पूरी शक्ति से संघ कार्य में लग गये। उनकी योग्यता देखकर डा. हेडगेवार जी ने उन्हें 1939 में सरकार्यवाह का दायित्व दिया। अब पूरे देश में उनका प्रवास होने लगा। 21 जून, 1940 को डा. हेडगेवार के देहान्त के बाद श्री गुरुजी सरसंघचालक बने। उन्होंने संघ कार्य को गति देने के लिए अपनी पूरी शक्ति झोंक दी।
1947 में देश आजाद हुआ; पर उसे विभाजन का दंश भी झेलना पड़ा। 1948 में गांधी जी हत्या का झूठा आरोप लगाकर संघ पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। श्री गुरुजी को जेल में डाल दिया गया; पर उन्होंने धैर्य से सब समस्याओं को झेला और संघ तथा देश को सही दिशा दी। इससे सब ओर उनकी ख्याति फैल गयी। संघ-कार्य भी देश के हर जिले में पहुँच गया।
श्री गुरुजी का धर्मग्रन्थों एवं हिन्दू दर्शन पर इतना अधिकार था कि एक बार शंकराचार्य पद के लिए उनका नाम प्रस्तावित किया गया था; पर उन्होंने विनम्रतापूर्वक उसे अस्वीकार कर दिया। 1970 में वे कैंसर से पीड़ित हो गये। शल्य चिकित्सा से कुछ लाभ तो हुआ; पर पूरी तरह नहीं। इसके बाद भी वे प्रवास करते रहे; पर शरीर का अपना कुछ धर्म होता है। उसे निभाते हुए श्री गुरुजी ने *5 जून,1973* को रात्रि में शरीर छोड़ दिया।
श्रीगुरुजी, अपनी विचार शक्ति व कार्यशक्ति से विभिन्न क्षेत्रों एवम् संघटनाओं के कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत बनें। श्रीगुरुजी का जीवन अलौकिक था, राष्ट्रजीवन के विभिन्न पहलुओं पर उन्होंने मूलभुत एवम् क्रियाशील मार्गदर्शन किया। “सचमुच ही श्रीगुरूजी का जीवन ऋषि-समान था।
साभार

Address

Shimla

Telephone

+918580409751

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Neeraj Sharma posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share