Vivek Raj Singh Kukrele , IPS

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Vivek Raj Singh Kukrele , IPS 2006 batch IPS of Assam cadre . Worked in Bihar, Assam and Madhya Pradesh Cadre .
(4)

20/06/2026

Mist, Mountains, A river that never stops moving. Neither do I. 🏞️💪

सुबह सुबह , भैरवकुंड की वादियों में — जहां सड़क खत्म होती है, वही असली अभ्यास शुरू होता है।

This isn't a gym video. There's no equipment rack, no mirrors, no crowd. Just a misty road, a wild river, a traditional gada (the same tool our wrestlers and warriors have trained with for centuries), some rocks nature left behind — and the will to show up.

कोई बहाना नहीं। सिर्फ अनुशासन।

Because here's what nobody tells you about fitness:
➡️ The best gym is sometimes the one you build with what's around you.
➡️ Tradition and modern training aren't opposites — the gada and the dumbbell serve the same purpose.
➡️ A body that can lift a riverstone can carry real responsibility too.

मैं एक पुलिस वाला हूं — लेकिन हर सुबह, वर्दी पहनने से पहले, मैं खुद को तैयार करता हूं। क्योंकि कमज़ोर शरीर मज़बूत फैसले नहीं ले सकता।

The river doesn't pause for the rocks in its way. It just finds another path. That's the lesson Bhairavkund teaches every single morning.

🔁 Share this with someone who needs to see that no gym, no excuse.
💬 Comment your one non-negotiable morning habit.
❤️ Save this for the day motivation runs low.

13/06/2026
The road moves. The mind observes. The officer acts.हर सफर में एक सबक छुपा होता है — if you're paying attention.Years in...
08/06/2026

The road moves. The mind observes. The officer acts.

हर सफर में एक सबक छुपा होता है — if you're paying attention.

Years in uniform teach you one thing above all else: luck is a myth. Observation, alignment, and deliberate action are not.

7 things service and the road have taught me:

1. Your body is your first uniform. Fitness is not vanity in this profession. It is operational readiness. Jo khud ko nahi sambhal sakta — woh doosron ko kya sambhaleyga.

2. Observation is the real superpower — not rank. The street, the crowd, the silence before tension — these aren't in any manual. Slow your scrolling. Speed up your noticing.

3. Clarity of objective cuts wasted effort by half. Most people confuse activity with progress. Before strategy comes the question — what exactly am I trying to achieve?

4. Smart hardwork beats blind hardwork — every time. Effort aligned with objective is not just efficient. तब मेहनत भी energising हो जाती है।

5. The present moment is a tactical advantage. The best officers I've known weren't the most decorated. They were the most present.

6. Design your environment — or it will design you. Jo apna environment control karta hai, woh apna outcome control karta hai.

7. Service is not sacrifice. It is the highest form of purpose. Purpose sustains what willpower cannot. A life directed toward others is a life that never runs empty.

जिंदगी एक सफर है। Observe it. Align with it. Act within it.

What one habit has sharpened your thinking? Drop it below — I read every comment. Tag someone who leads with purpose 👇

SmartWork LifeInUniform PublicService DisciplineIsFreedom IndianPolice

48 किलो कम... लेकिन आत्मविश्वास कई गुना ज़्यादा! ⚖️🔥ऊपर वाली तस्वीर 2018 की है, जब मैं एसपी सिवनी (मध्य प्रदेश) के रूप मे...
04/05/2026

48 किलो कम... लेकिन आत्मविश्वास कई गुना ज़्यादा! ⚖️🔥

ऊपर वाली तस्वीर 2018 की है, जब मैं एसपी सिवनी (मध्य प्रदेश) के रूप में कार्यरत था। नीचे वाली तस्वीर आज की है। इन दो तस्वीरों के बीच सिर्फ वजन का अंतर नहीं है, बल्कि यह कहानी है कठोर अनुशासन और अटूट संकल्प की।

अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं कि यह कैसे मुमकिन हुआ? इसका कोई शॉर्टकट नहीं था:

 1. अनुशासन (Discipline): मैंने मेहनत को अपना साथी बनाया।

 2. सही ज्ञान (Nutrition): सिर्फ कम खाना काफी नहीं है, शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को समझना सबसे जरूरी है।

 3. खुद के लिए समय: चाहे कितनी भी व्यस्तता हो, खुद को रोज़ थोड़ा समय देना ही होगा।

वजन 48 किलो कम जरूर हुआ है, लेकिन देश और समाज की सेवा करने का जज्बा और आत्मविश्वास पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। मेरा मानना है कि अगर हम खुद को बेहतर बना सकते हैं, तभी हम समाज के निर्माण में प्रभावी योगदान दे सकते हैं।

मेरे उन सभी साथियों के लिए एक संदेश जो बदलाव चाहते हैं:

 * कभी उम्मीद मत हारिए।

 * सीखना कभी बंद मत कीजिए (Life is a continuous learning process)।

 * सकारात्मक रहें और अपना सर्वश्रेष्ठ देते रहें।

अगर आप आज खुद को बदलने का फैसला लेते हैं, तो आने वाला कल आपका होगा। 🇮🇳

क्या आप भी अपनी लाइफ में कोई बदलाव लाना चाहते हैं? कमेंट्स में अपनी राय ज़रूर बताएं! 👇

#प्रेरणा #अनुशासन WeightLossJourney Discipline

15 साल बाद आज फिर मुलाकात हुई—सिर्फ एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि उन यादों से…जब हम ASP सासाराम–SDPO भभुआ और SP औरंगाबाद–SDP...
03/04/2026

15 साल बाद आज फिर मुलाकात हुई—सिर्फ एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि उन यादों से…
जब हम ASP सासाराम–SDPO भभुआ और SP औरंगाबाद–SDPO औरंगाबाद के रूप में नक्सलवाद के सबसे कठिन दौर में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे।

आज वही साथी, श्री संजय जी, असम चुनाव ड्यूटी में कमांडेंट के रूप में—और उनकी टीम BTAD क्षेत्र में तैनात। समय बदल गया… हालात बदल गए… और सबसे बड़ी बात—वो क्षेत्र, जो कभी भय और संघर्ष का प्रतीक था, आज शांति और विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।

ये सिर्फ यादें नहीं हैं… ये उस विश्वास की कहानी है कि जब नीयत मजबूत हो, टीम सच्ची हो और देश पहले हो—तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

बिहार और असम की धरती ने हमें सिखाया है कि संघर्ष अस्थायी होता है, लेकिन राष्ट्र निर्माण का संकल्प स्थायी होता है।

युवाओं से बस एक ही आग्रह—
👉 अपने अंदर की ऊर्जा को पहचानिए
👉 देश के लिए कुछ करने का जज़्बा रखिए
👉 और जहां भी रहें, बदलाव का हिस्सा बनिए

क्योंकि मजबूत राष्ट्र केवल नीतियों से नहीं, बल्कि निष्ठा, साहस और कर्म से बनता है। 🇮🇳

28/03/2026

जब दुनिया सो रही होती है…
तब कुछ लोग अपनी किस्मत लिख रहे होते हैं।

ना ज़िंदगी आसान है…
ना रास्ते सीधे हैं…
लेकिन जो हर हालात में खुद को ढाल लेता है,
वही असली विजेता बनता है।

हर दिन परफेक्ट नहीं होता…
लेकिन हर दिन को बेहतर बनाया जा सकता है।

खुद के लिए मेहनत करो…
अपनों के लिए आगे बढ़ो…
और उस सपने के लिए जियो
जो आपको चैन से बैठने नहीं देता।

याद रखो —
कोई ना कोई है…
जो आपकी सफलता पर खुश होगा,
और आपको जीतते हुए देखना चाहता है।

रुकना मत…
क्योंकि आपकी कहानी अभी बाकी है। 🔥

भारत शायद उन विरले देशों में से एक है जहाँ सिविल सेवा या अन्य सरकारी नौकरियों की तैयारी के लिए युवाओं की एक बड़ी आबादी अ...
08/03/2026

भारत शायद उन विरले देशों में से एक है जहाँ सिविल सेवा या अन्य सरकारी नौकरियों की तैयारी के लिए युवाओं की एक बड़ी आबादी अपने जीवन के सबसे ऊर्जावान, सबसे रचनात्मक और सबसे संभावनाओं से भरे वर्षों को समर्पित कर देती है।
एक तरफ यह सरकारी सेवाओं की सामाजिक प्रतिष्ठा और स्थिर आय के प्रति समाज के गहरे आकर्षण को दर्शाता है, तो दूसरी तरफ यह हमारी शिक्षा और करियर मार्गदर्शन व्यवस्था की उस कमी की ओर भी संकेत करता है जहाँ युवाओं की विविध क्षमताओं को पहचानने और उन्हें अलग-अलग दिशाओं में विकसित करने की संस्कृति अभी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई है।
हममें से बहुतों ने भी अपने जीवन का एक लंबा और बहुमूल्य समय इन्हीं परीक्षाओं की तैयारी में लगाया है। पीछे मुड़कर देखता हूँ तो कभी-कभी लगता है कि वही समय किसी अन्य दिशा में लगाया जाता तो शायद अलग प्रकार के सृजनात्मक और उत्पादक परिणाम भी सामने आ सकते थे।
सफलता मिल जाने के बाद हम उस समय को एक निवेश मानकर संतोष कर लेते हैं—और शायद यह स्वाभाविक भी है। लेकिन जब सफलता नहीं मिलती, तब वही समय कई युवाओं के मन में निराशा, हताशा और कभी-कभी अवसाद का कारण भी बन जाता है।
इसीलिए मेरा एक सच्चा और आत्मीय आग्रह उन सभी युवाओं से है जो आज प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं या इसकी योजना बना रहे हैं—
निश्चित रूप से इन परीक्षाओं में भाग लीजिए। पूरी लगन, अनुशासन और ईमानदारी से प्रयास कीजिए।
लेकिन साथ-साथ जीवन के वैकल्पिक रास्तों के लिए भी स्वयं को तैयार रखिए।
अपनी क्षमताओं को केवल एक परीक्षा तक सीमित मत कीजिए। अपने कौशल को विकसित कीजिए, नए ज्ञान से स्वयं को समृद्ध कीजिए, बदलती दुनिया के साथ अपने भीतर नवीनता और लचीलापन बनाए रखिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात— अपने आत्मविश्वास को किसी एक परिणाम के साथ मत बाँधिए।
जीवन की संभावनाएँ किसी एक परीक्षा से कहीं बड़ी हैं। और कई बार रास्ते बदलना हार नहीं होता, बल्कि अपने वास्तविक सामर्थ्य की दिशा में आगे बढ़ना होता है।
याद रखिए— आपका जीवन किसी एक परिणाम से परिभाषित नहीं होता। आपकी मेहनत, आपकी सीख, आपका चरित्र और आगे बढ़ने की आपकी क्षमता ही आपकी वास्तविक पहचान है।
अगर यह बात कुछ युवाओं तक पहुँच जाए, और उन्हें समय रहते अपने जीवन के विकल्पों को देखने का साहस मिल जाए— तो शायद हम सब मिलकर कई अनावश्यक निराशाओं को जन्म लेने से रोक सकते हैं।
विवेक राज सिंह (कुकरेले) ,
भा. पु. से.
पुलिस महानिरीक्षक असम



01/03/2026

10 KM की योजना थी … 15 KM की सीख मिल गई।
Life doesn’t ask how tired you are.
It only asks — Are you willing to continue?

लगभग 100000KM की यात्रा .
15 KM run.
3 Battalions का भ्रमण .
Endless conversations - learning , experience and wishdom .
One message — Don’t Stop.

Failure is not final.
Direction may change.
Distance may increase.
But commitment must stay constant.

For every aspirant preparing for Civil Services, Police, Defence or any competitive exam —
Your struggle is building you. Keep going.
Day ended with meeting and spending time with my Training SP and elder with Vikas Vaibhav Sir









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