Mamta Mehra

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09/07/2021

एमपीएचडब्ल्यू, एएनएम, जीएनएम के एग्जाम न होने के कारण तहसीलदार को सौपा ज्ञापन
जींद, 9 जुलाई।
एमपीएचडब्ल्यू छात्र संघर्ष समिति संबंधित (SFI) के विद्यार्थियों ने एमपीएचडब्ल्यू, एएनएम, जीएनएम के एग्जाम न होने के कारण विक्रमजीत की अध्यक्षता में तहसीलदार को ज्ञापन सौपा। पेपर न होने के कारण छात्रों ने मीटिंग कर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा, उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए एमपीएचडब्ल्यू के विद्यार्थियों ने एमपीएचडब्ल्यू छात्र संघर्ष समिति संबंधित (SFI) के बैनर तले न्यायिक परिसर जींद में स्थित पार्क में मीटिंग की। सभा को संबोधित करते हुए छात्र विक्रमजीत ने बताया कि एडमिशन हुए दो साल हो गए, लेकिन अभी तक प्रथम वर्ष के भी एग्जाम नही हुए। लेकिन एच एन आर सी की गलती के कारण अभी तक कोई भी एग्जाम नही लिया गया है। जिसके कारण दो साल का कोर्स चार साल में पूरा होगा। इस कारण विद्यार्थियों के दो साल खराब हो जाएंगे। विद्यार्थियों को समय के साथ - साथ आर्थिक, मानसिक व सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एम पी एच डब्ल्यू को छोड़कर लगभग सभी कोर्सों के एग्जाम लगातार हो रहे हैं या उनकी डेट शीट आ गई है इसी विषय को लेकर तहसीलदार को ज्ञापन दिया।उन्होंने कहा कि अगर जल्द से जल्द हमारी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो विद्यार्थियों को इकट्ठा कर सड़कों पर उतरेंगे। आज मुख्य रूप से एस एफ आई सचिव मनीष, विक्रमजीत, निखिल, सुमित, नवीन, साहिल व एमपीएचडब्ल्यू, ए एन एम,जीएनएम के अन्य छात्र उपस्थित रहे।

04/07/2021

ये भी 70 साल में पहली बार हुआ है😂😂

26/06/2021

नेता बिका
अभिनेता बिका
बिका क्रिकेट का भगवान
जो नहीं बिका, वो है किसान

एसएफआई ने सभी इच्छुक नागरिकों के लिए वैक्सीन उपलब्ध हो इसके लिए किया ऑनलाइन प्रदर्शन जींद, 13 मई।आज स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ ...
13/05/2021

एसएफआई ने सभी इच्छुक नागरिकों के लिए वैक्सीन उपलब्ध हो इसके लिए किया ऑनलाइन प्रदर्शन
जींद, 13 मई।
आज स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया जिला कमेटी द्वारा कोरोना वायरस की दूसरी लहर से प्रभावित जनता के साथ व स्वास्थ्य सेवाओं में हो रही कालाबजारी पर रोक लगवाने हेतु और भी मांगों को लेकर ऑनलाइन पोस्टर प्रदर्शन किया जिसमें सैकड़ों नौजवानों ने इसमें हिस्सा लिया और मनोहर लाल खट्टर को ईमेल के माध्यम से भी सैकड़ों ज्ञापन भेजे गए। जिला प्रधान पूनम जांगड़ा ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर पहले की लहर से कहीं अधिक भयंकर साबित हो रही है। संक्रमितों की संख्या व इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव ने संकट को ज्यादा गंभीर बनाया है। लोग इलाज के अभाव में भारी परेशानियां झेल रहे हैं। ऐसे हालात में गरीब जनता व किसान, मजदूर , छात्र , नौजवानों को यह संकट दोतरफा ढंग से प्रभावित कर रहा है। एक तरफ बीमारी से लड़ना व बचना है और दूसरी तरफ भूखे मरने से बचना है क्योंकि जीवनयापन के लिए आर्थिक गतिविधियां काफी कम‌ हो गई है। इसका सबसे बुरा असर उन पर दिखा है जो हर दिन काम करके गुजारा करते हैं । इसलिए आपदा के समय स्टूडैंट्स फैडरेशन आॅफ इंडिया के माध्यम से पत्र लिखकर कुछ फौरी सुझाव दे रहे हैं। हम कहना चाहते हैं कि कोरोना वायरस के संक्रमण के समय काम कर रहे चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सिंग स्टाफ , आशा वर्कर्स, सफाई कर्मी, मजदूर, छात्रों और कर्मचारियों की निजी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। इस बारे कोई भी ढील अथवा लापरवाही घातक सिद्ध हो सकती है ।
राज्य सह-सचि दीपक बेैरीवाल ने कहा बताया कि इसके अतिरिक्त कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए यह आवश्यक है कि राज्य में जितने भी संदिग्ध लोग हस्पतालों में आते हैं उनका टेस्ट किया जाना सुनिश्चित किया जाए। क्योंकि अभी भी हस्पतालों के अंदर मरीजों की सही तरीके से जांच नहीं हो पा रही है । सभी जरुरतमंद मरीजों के लिए ऑक्सीजन व जरूरी दवाइयों और रेमडेसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित हो तथा इसकी कालाबाजारी पर रोक लगाई जाए। इसलिए हम‌ आपके समक्ष निम्नलिखित बिन्दु रखना चाहते है तथा उम्मीद करते हैं कि राज्य सरकार इस दिशा में त्वरित कार्यवाही हेतू कदम उठाएगी:-

1. सभी जरूरतमंद मरीजों के लिए ऑक्सीजन व जरूरी दवाइयों और रीमेडेसिवर इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित हो तथा इनकी कालाबाजारी पर रोक लगाई जाए। होम आइसोलेशन के मरीजों के लिए भी ऑक्सीजन उपलब्ध करवाई जाए। सिविल हस्पताल में आक्सीजन प्लांट तुरंत शुरू किया जाए।
2. सभी गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर उपलब्ध हो, सिविल अस्पताल के सभी वेंटीलेटर शुरू किए जाएं और जल्द ही नए वेंटिलेटर मंगवाए जाएं। जो भी मरीज नागरिक हस्पताल में इलाज के लिए आता है उसका ईलाज करना सरकार की जिम्मेदारी है इसके लिए बेड कम है तो सरकार बेड़ों की संख्या बढाये या प्राइवेट हस्पताल से बेड अधिग्रहण करें ।
3. डॉक्टर्स, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती जल्द से जल्द की जाए।
4. निजी अस्पतालों की लूट , खसोट पर रोक लगे और ऑक्सीजन व आईसीयू बेड के चार्जेस कम किए जाएं। प्राइवेट हस्पताल में ईलाज ले रहे सभी मरीजों का पूरा खर्च सरकार वहन करे।
5. कोविड मरीजों की जानकारी, ऑक्सीजन बेड की उपलब्धता, वेंटीलेटर व अन्य जानकारियां सिंगल विंडो पर उपलब्ध हो ताकि मरीजों और उनके सम्बन्धियों को भटकना न पड़े।
6. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र , उप स्वास्थ्य केंद्रों को पूरी सुविधाएं प्रदान करते हुए मजबूत बनाया जाए ताकि करोना काल में प्रोटोकॉल मेंटेन किया जा सके। विकेंद्रीकरण के माध्यम से कोरोनावायरस की चेन ब्रेक की जा सके।
7. लॉकडाउन की वजह से और कोविड के चलते बड़ी संख्या में मजदूर और छोटे किसानों की आमदनी बंद हो गई है। इसलिए उन्हें 7500₹ प्रति महीना प्रति परिवार 6 महीने तक दिए जाएं और सभी को 10 किलो अनाज प्रति व्यक्ति प्रति महीना व अन्य जरूरत की वस्तुएं दी जाए।
8. प्रवासी मजदूर जो लॉकडाउन के समय अपने घर जाना चाहते हैं उनके घर जाने का प्रबंध किया जाए।
9. सभी इच्छुक नागरिकों के लिए वैक्सीन उपलब्ध हो।
10. PHC स्तर पर हर रोज कोविड सैंपलिंग की व्यवस्था हो।

-जिला सचिव मनीष ने बताया है की स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया ( SFI) छात्र संगठन के कार्यकर्ता अलग-अलग जिलों में प्रशासन से सम्पर्क कर रहे हैं और हर प्रकार से अपनी सेवाएं देने को तैयार हैं। हम आपको भी एक बार फिर आश्वस्त कर रहे हैं कि हमारा संगठन इस आपदा के समय में हर प्रकार से सरकार की मदद के लिए तत्पर रहेगा।

11/05/2021

on 13th May Demanding

11/05/2021

टिकरी कांड के बहाने किसान आंदोलन को बदनाम करने की साजिश का पर्दाफाश

टिकरी कांड में पीड़िता के पिता की जुबानी सुनिए पुलिस की साजिश का पूरा खुलासा

पुलिस ने चार बेकसूरों को बिना शिकायत के बना दिया गुनाहगारटिकरी कांड में पीड़िता के पिता की जुबानी सुनिए पुलिस की साजिश का पूरा खुलासा

टिकरी कांड के बहाने किसान आंदोलन को बदनाम करने की साजिश का पर्दाफाश पीड़िता के पिता ने कहा जब शिकायत दो के खिलाफ दी तो छ...
11/05/2021

टिकरी कांड के बहाने किसान आंदोलन को बदनाम करने की साजिश का पर्दाफाश
पीड़िता के पिता ने कहा जब शिकायत दो के खिलाफ दी तो छह के खिलाफ कैसे हो गया मामला दर्ज

कुलदीप श्योराण
टिकरी बॉर्डर। खरी खरी न्यूज़ ने आज सुबह मुरथल कांड की तरह टिकरी कांड को किसान आंदोलन को बदनाम करने का जो अंदेशा जताया था वह शाम होते होते सच साबित हुआ है।
आज शाम को टिकरी कांड में पीड़िता के पिता ने मीडिया से बातचीत करते हुए पुलिस और प्रशासन पर सवालिया निशान खड़ा करते हुए कहा कि जब उन्होंने 2 लोगों के खिलाफ शिकायत दी थी तो छह के लोगों के खिलाफ मामला f.i.r. कैसे दर्ज कर दी गई‌। उन्होंने कहा कि 4 लोगों ने तो उनकी बेटी की मदद की थी, ऐसे में उन्हें फंसाने का काम पुलिस ने क्यों किया यह उनकी समझ से बाहर है। उन्होंने अंकुर, जगदीश, कविता और योगिता को बेकुसूर बताते हुए पुलिस में दोबारा से अपनी ओर से लिखित में बयान भी दर्ज कराया है।
पीड़िता के पिता के बयान से जाहिर है कि "बड़े" ऊपरी दबाव के चलते पुलिस प्रशासन ने किसान आंदोलन को बदनाम करने के मकसद से 6 लोगों के खिलाफ बिना किसी जांच के तुर्ता-फुर्ती में एफ आई आर दर्ज कर दी।
इस मामले में आरोपित अनूप चानौत ने भी मीडिया को बताया कि सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ छेड़खानी की शिकायत आई थी जिसे संगठन से तुरंत बाहर कर दिया गया था। इसके बाद पांच और लोगों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज करना पूरी तरह से किसान आंदोलन को बदनाम और कमजोर करने की साजिश का हिस्सा है।
पीड़िता के पिता के बयान और आरोपित अनूप चानौत की बातों ने यह साफ कर दिया है कि सरकार लंबे समय से किसान आंदोलन की छवि धूमिल करने के लिए जो बहाना ढूंढ रही थी वह उसे टिकरी कांड की एक शिकायत के जरिए नजर आया और उसने उसे दोनों हाथों से लपकते हुए तिल का ताड़ बनाते हुए सनसनीखेज गैंगरेप कांड का अमलीजामा पहना दिया।
गोदी मीडिया ने भी अपने आकाओं के इशारे पर मामले को इतना सनसनीखेज और संगीन बना दिया कि किसान आंदोलन को एक ही दिन में चौतरफा आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
बड़ी बदनामी के कारण किसान नेताओं के भी होश उड़ गए और उन्होंने मामले की तह में पूरी तरह जाने के बजाए पुलिस की एफ आई आर के बलबूते पर ही सभी छह युवाओं को मामले में शामिल मानते हुए उन्हें कड़ी सजा दिलाने की मांग कर दी। उन्हें भी नहीं पता था कि वह 6 महीने से उनके साथ कंधे से कंधा मिला रहे चार बेकसूर युवाओं को बिना वजह अपराधी करार दे रहे हैं।
एक बड़े गोदी मीडिया अखबार ने दो 6 सामान्य घरों के लड़के,लड़कियों को किसान नेताओं का दर्जा देते हुए पूरी किसान आंदोलन की अगुवाई कर रही नेताओं की जमात को ही कटघरे में खड़ा करने में कोई कोताही नहीं बरती।
दैनिक जागरण ने इसे राष्ट्रीय आपदा की तरह दिखाते हुए लगभग 2 पेजों में अनाप-शनाप खबरें छापते हुए इस पूरे मामले को मुरथल कांड की तरह बेहद कलंकित और गिरा हुआ साबित करने में एड़ी से चोटी तक का जोर लगा दिया। पीड़िता के पिता के बयान ने साफ कर दिया कि उन्हें सिर्फ 2 लोगों के खिलाफ शिकायत दी थी बाकी चार लोगों के खिलाफ किस तरह से पुलिस ने बिना किसी जांच के, बिना किसी शिकायत के दर्ज किया यह पुलिस और सरकार की मंशा पर सवालिया निशान खड़ा करने के लिए काफी है।
जाहिर सी बात है कि किसान आंदोलन को किसी भी तरह से कमजोर कर पाने और डिगा पाने में नाकाम रही सरकार ने इस शिकायत की आड़ में पूरे किसान आंदोलन और सभी किसान नेताओं को उसी तरह बदनाम करने का षड्यंत्र रच दिया जिस तरह से जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान फर्जी मुरथल कांड के जरिए पूरी जाट कौम को पूरी दुनिया में बदनाम करने का काला कारनामा गाया गया। मुरथल कांड की तरह टिकरी छेड़छाड़ मामले को गैंगरेप का दर्जा देकर पूरे किसान आंदोलन की 6 महीने की तपस्या को मिट्टी में मिलाने के लिए पुलिस, सरकार और गोदी मीडिया ने कोई कसर नहीं रखी लेकिन अब यह साफ हो गया है कि यह मामला गैंगरेप का नहीं होकर बल्कि एक या दो व्यक्तियों की नीच हरकत से संबंधित है और इसे जानबूझकर पुलिस ने गैंगरेप का नाम दिया है।
किसान आंदोलन को फेल करने की साजिश के तहत इसे गैंगरेप का नाम दिया गया और बेकसूर युवाओं को संगीन आरोपों के तहत आरोपी बनाने का काम किया गया।
खरी खरी न्यूज़ के पास भी इस बात का सबूत है कि पीड़िता के पिता ने सिर्फ 2 लोगों के नाम ही अपनी शिकायत में लिखवाए थे बाकी लोगों का उनकी लिखित शिकायत में कोई नाम नहीं था।
4 लोगों के नाम केवल कोलकाता जाने और लड़की के साथ वापस आने के तौर पर लिखे गए थे लेकिन पुलिस ने पूरी किसान बिरादरी को कलंकित करने और 2 लोगों के खिलाफ शिकायत को छह लोगों के गैंगरेप का दर्जा देकर पूरे मामले को बेहद सनसनीखेज बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह सारी कवायद किसान आंदोलन और किसान नेताओं को बदनाम और कलंकित करने के लिए रची गई थी और आज इसका पर्दाफाश हो गया

Khari khari news

02/05/2021

जब मैं छोटी चोरी करता था, उस दिन मेरी मां ने रोका होता तो मै इतना बड़ा लुटेरा न बनता ।
🎅🎅🤣

02/05/2021

निकल यहां से ...😝😝🙈🙈 चौकीदार
#बंगाल

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