25/09/2026
जिस राजनीति में कुर्सी जनता की सेवा का माध्यम होनी चाहिए, वहाँ परिवार के लिए कुर्सी सबसे बड़ा लक्ष्य बन जाए तो फर्क समझना मुश्किल नहीं।
राहुल गाँधी के व्यंग्य की आड़ में बुज़ुर्गों के सम्मान और सार्वजनिक शालीनता को निशाना बनाना राजनीति को हास्य नहीं, बल्कि गिरते राजनीतिक संवाद की तस्वीर बनाता है।