Uttarakhand Alert

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उत्तराखंड के पहाड़ों की ज़मीनी सच्चाई।
नेटवर्क, सड़क, पानी, अस्पताल, स्कूल — जो मीडिया नहीं दिखाता, वो यहाँ।”

bahut sunder
12/04/2026

bahut sunder

⚠️ जादूगर के जादू में फंसा प्रशासन और शिक्षा विभाग! ⚠️पिथौरागढ़ में हैरान करने वाला मामला सामने आया है —स्कूल के बच्चों ...
12/04/2026

⚠️ जादूगर के जादू में फंसा प्रशासन और शिक्षा विभाग! ⚠️

पिथौरागढ़ में हैरान करने वाला मामला सामने आया है —
स्कूल के बच्चों से 20-20 रुपये जमा कराने के आदेश जारी!😡

👉 सवाल ये है कि
क्या अब बच्चों की पढ़ाई छोड़कर “जादू शो” कराना जरूरी हो गया?
👉 किसके कहने पर ये आदेश जारी हुआ?
👉 बच्चों से पैसे वसूलने का अधिकार किसने दिया?

सबसे बड़ी बात —
रेडक्रॉस समिति के अध्यक्ष को भी इस आदेश की भनक तक नहीं!

यानी साफ है…
👉 कहीं न कहीं बड़ा खेल चल रहा है
👉 और जिम्मेदार लोग आंख बंद करके बैठे हैं

⚠️ मामला खुलने के बाद अब सफाई दी जा रही है…
लेकिन सवाल ये है —

👉 पहले गलती क्यों हुई?
👉 बच्चों से पैसे लेने की नौबत आई ही क्यों?

ये सिर्फ 20 रुपये का मामला नहीं है…
ये शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई और लापरवाही का आईना है!

⚠️ दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, वरना ऐसे फैसले आगे भी बच्चों पर थोपे जाएंगे!

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🚨 डीडीहाट में जाम से जनता परेशान… अब याद आया बाईपास? 🚨डीडीहाट में सालों से लोग जाम की समस्या झेल रहे हैं, लेकिन समाधान अ...
12/04/2026

🚨 डीडीहाट में जाम से जनता परेशान… अब याद आया बाईपास? 🚨

डीडीहाट में सालों से लोग जाम की समस्या झेल रहे हैं, लेकिन समाधान अब जाकर सूझा — बाईपास बनाया जाएगा!

👉 सवाल ये है कि अब तक क्या किया जा रहा था?
👉 जब शहर रोज जाम में घुट रहा था, तब जिम्मेदार लोग कहाँ थे?

तीन किलोमीटर लंबा बाईपास बनाने की बात हो रही है, सर्वे भी शुरू हो गया…
लेकिन जनता पूछ रही है —

⚠️ क्या ये सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेगा या सच में काम होगा?

उधर पार्किंग का हाल भी बेहाल…
अधूरा काम, लापरवाही और ढीला सिस्टम —
और भुगत रही है आम जनता 😡

👉 अगर समय रहते काम हुआ होता, तो आज ये हालत नहीं होती।

⚠️ अब जरूरत है सिर्फ घोषणा नहीं, जमीन पर काम दिखाने की!












शर्मनाक! इंसानियत मर चुकी है क्या?पिथौरागढ़ में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक बेटे ने अपने ही पिता को ...
12/04/2026

शर्मनाक! इंसानियत मर चुकी है क्या?

पिथौरागढ़ में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक बेटे ने अपने ही पिता को हथौड़े से मारकर मौत के घाट उतार दिया!** 😡

👉 छोटी सी कहासुनी… और सीधे हत्या?
👉 क्या अब रिश्तों की कोई कीमत नहीं बची?
👉 क्या गुस्सा अब इतना खतरनाक हो गया है कि लोग अपने ही परिवार को खत्म कर दें?

ये सिर्फ एक हत्या नहीं है…
ये **समाज के गिरते स्तर और खत्म होती संवेदनाओं** का सबूत है।

जिस पिता ने जिंदगी दी…
उसी को बेटे ने इस तरह मार डाला — इससे ज्यादा शर्मनाक क्या हो सकता है?

⚠️ अगर अब भी समाज नहीं जागा, तो ऐसे अपराध और बढ़ते जाएंगे।

👉 **कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए, ताकि कोई दोबारा ऐसा करने की हिम्मत न करे!**

🙏 भगवान दिवंगत आत्मा को शांति दे…










12/04/2026

सभी हमारे पेज उत्तराखण्ड अलर्ट के साथियों से माफ़ी चाहते है की 4 दिन से कोई समाचार नहीं डाल पा रहे थे आज से शुरू कर दिया है

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पोर्टर भर्ती में बेरोजगारी का कड़वा सच!🚨धारचूला में पोर्टर भर्ती के लिए देश के अलग-अलग राज्यों (हरियाणा, राजस्थान, एमपी,...
07/04/2026

पोर्टर भर्ती में बेरोजगारी का कड़वा सच!🚨

धारचूला में पोर्टर भर्ती के लिए देश के अलग-अलग राज्यों (हरियाणा, राजस्थान, एमपी, यूपी) से 2000 से ज्यादा युवा पहुंचे, लेकिन पद सिर्फ 600 थे।

👉 सबसे चौंकाने वाली बात — 525 अभ्यर्थी दौड़ में ही फेल हो गए!**

सोचिए…
इतनी ठंड, लंबा सफर, उम्मीदों के साथ पहुंचे युवा…
और फिर निराश होकर वापस लौटने को मजबूर 😔

👉 क्या यही है हमारे देश के युवाओं का भविष्य?
👉 क्या रोजगार के नाम पर सिर्फ संघर्ष ही मिलेगा?
👉 सरकार और सिस्टम कब जागेगा?

यह सिर्फ एक भर्ती नहीं…
यह **बेरोजगारी की हकीकत** है, जो हर दिन हजारों युवाओं को तोड़ रही है।

⚠️ जरूरत है रोजगार के ठोस अवसर देने की, सिर्फ वादों की नहीं।














🚨 **चंपावत में संदिग्ध मौत – क्या सिस्टम जिम्मेदार है?** 🚨चंपावत के इंडेन गैस एजेंसी प्रबंधक **दयाल सिंह रावत** की संदिग...
07/04/2026

🚨 **चंपावत में संदिग्ध मौत – क्या सिस्टम जिम्मेदार है?** 🚨

चंपावत के इंडेन गैस एजेंसी प्रबंधक **दयाल सिंह रावत** की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

परिजनों का साफ कहना है कि **सिलेंडर वितरण के दबाव और मानसिक तनाव** के कारण वे लंबे समय से परेशान थे। बताया जा रहा है कि उन्होंने कई बार उच्च अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

👉 क्या कर्मचारियों पर इतना दबाव डालना सही है?
👉 क्या विभाग अपनी जिम्मेदारी से बच सकता है?
👉 आखिर एक जिम्मेदार अधिकारी की जान जाने के बाद कौन जवाब देगा?

यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है। अगर समय रहते समस्याओं को सुना जाता, तो शायद आज एक परिवार उजड़ने से बच जाता।

⚠️ **मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।**

🙏 ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दें और परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति दे।














पहाड़ की कोख पर सिस्टम का प्रहार: अस्पतालों में सुविधाएं, फिर भी एक साल में 600 गर्भवती महिलाएं 'रेफर'! आखिर हमारी माताओ...
05/04/2026

पहाड़ की कोख पर सिस्टम का प्रहार: अस्पतालों में सुविधाएं, फिर भी एक साल में 600 गर्भवती महिलाएं 'रेफर'! आखिर हमारी माताओं-बहनों की जान से कब तक खेलेगा प्रशासन?

पिथौरागढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के सरकारी दावे धरातल पर दम तोड़ रहे हैं। जिला महिला अस्पताल से लेकर धारचूला, मुनस्यारी, बेरीनाग और गंगोलीहाट जैसे बड़े केंद्रों तक—हर जगह से गर्भवती महिलाओं को हायर सेंटर रेफर करने का खूनी खेल जारी है। 108 आपातकालीन सेवा के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक साल में 600 महिलाओं को जान जोखिम में डालकर 130 किलोमीटर दूर तक का सफर तय करने पर मजबूर किया गया।

सिस्टम की पोल खोलती कड़वी हकीकत:

🔹 रेफरल का आतंक: कनालीछीना PHC प्रसव कराने में सबसे फिसड्डी साबित हुई है। हैरानी की बात यह है कि स्टाफ और जरूरी उपकरण होने के बावजूद अस्पताल के कर्मचारी हाथ खड़े कर देते हैं और महिलाओं को गंभीर स्थिति बताकर रेफर कर दिया जाता है।

🔹 एम्बुलेंस बनी 'लेबर रूम': बीते एक साल में 45 गर्भवती महिलाओं का प्रसव एम्बुलेंस के भीतर ही हुआ। सलाम है उन 108 कर्मियों को जिन्होंने अपनी सूझबूझ से जच्चा-बच्चा की जान बचाई, लेकिन धिक्कार है उन अस्पतालों पर जिन्होंने प्रसव कराने से इनकार कर दिया!

🔹 जिम्मेदारों की लीपापोती: सीएमओ (CMO) कह रहे हैं कि स्टाफ पर्याप्त है और रेफर करना गलत है। अगर सब कुछ सही है, तो फिर ये 600 महिलाएं रेफर क्यों हुईं? क्या अधिकारियों की बातों और धरातल की सच्चाई में कोई तालमेल नहीं है?

🔹 जानलेवा सफर: पिथौरागढ़ मुख्यालय पहुँचने के लिए महिलाओं को 20 से 130 किलोमीटर तक का खतरनाक पहाड़ी रास्ता तय करना पड़ता है। रास्ते में हालत बिगड़ने पर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

सरकार और स्वास्थ्य विभाग से हमारे सीधे सवाल:

📍 Minister Uttarakhand: जब अस्पतालों में सुविधाएं और स्टाफ है, तो फिर 600 महिलाएं रेफर क्यों की गईं? क्या आपके पास इन लापरवाह केंद्रों के खिलाफ कोई ठोस कार्ययोजना है?

📍 लापरवाह स्टाफ पर कार्रवाई कब? जो विशेषज्ञ और कर्मचारी प्रसव कराने से पीछे हट रहे हैं, उन्हें कुर्सी पर बैठने का क्या हक है? क्या उन्हें सिर्फ रेफरल पर्ची काटने के लिए वेतन दिया जा रहा है?

📍 Singh Dhami जी: पहाड़ की मातृशक्ति सुरक्षित प्रसव के लिए तरस रही है। क्या आपका 'विकास' केवल फाइलों और विज्ञापनों तक ही सीमित है?

पहाड़ की महिलाएं अब इस लापरवाही को और नहीं सहेंगी। हमें रेफरल की पर्ची नहीं, बल्कि अपने ही क्षेत्र के अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव की गारंटी चाहिए!

इस पोस्ट को इतना शेयर करें कि यह पिथौरागढ़ से देहरादून तक हर जिम्मेदार अधिकारी के कानों में गूँजे!

आपदा प्रभावितों का सब्र टूटा: दो साल बीते, मानसून सिर पर है, लेकिन 'विस्थापन' का वादा आज भी कागजों में दफन!  Singh Dhami...
05/04/2026

आपदा प्रभावितों का सब्र टूटा: दो साल बीते, मानसून सिर पर है, लेकिन 'विस्थापन' का वादा आज भी कागजों में दफन! Singh Dhami जी, क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार है?

मुनस्यारी के आपदा प्रभावित गांवों की चीख सरकार के बहरे कानों तक नहीं पहुँच रही है। शनिवार को धापा और मालूपाती समेत कई गांवों के ग्रामीणों ने एसडीएम दफ्तर पर प्रदर्शन कर अपनी बेबसी और आक्रोश दर्ज कराया। दो साल से ये लोग अपने सुरक्षित विस्थापन का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की सुस्ती इन्हें फिर से मौत के साये में धकेलने को तैयार है।

सिस्टम की बेशर्मी के कुछ उदाहरण:

🔹 आश्वासन का खेल: दो साल बीत जाने के बाद भी बोना, गोल्फा और अन्य प्रभावित क्षेत्रों के परिवार आज भी टकटकी लगाए बैठे हैं कि उन्हें कब सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा।

🔹 धनराशि पर कुंडली: धापा और मालूपाती के प्रभावितों को तो विस्थापन के लिए दूसरी किस्त तक जारी नहीं की गई है। क्या सरकार ने आपदा प्रभावितों के बजट पर ताला लगा दिया है?

🔹 मानसून का डर: कुछ ही समय बाद मानसून शुरू हो जाएगा और इन क्षेत्रों में रहना जान जोखिम में डालना है। क्या प्रशासन तब जागेगा जब पहाड़ दरकेंगे और जान-माल का नुकसान होगा?

🔹 चेतावनी: जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि विक्रम दानू के नेतृत्व में ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर दो सप्ताह के भीतर सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो वे उग्र धरना-प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे।

सरकार और प्रशासन से सीधे सवाल:

📍 Singh Dhami जी: विस्थापन की फाइलें सचिवालय की धूल कब तक फांकती रहेंगी? क्या सीमांत की जनता की जान की कोई कीमत नहीं है?

📍 Magistrate Pithoragarh: विस्थापन की दूसरी किस्त रोकने का क्या औचित्य है? क्यों आपदा प्रभावितों को अपने हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है?

📍 जनप्रतिनिधि कहाँ हैं? चुनाव के समय हाथ जोड़ने वाले माननीय आज इन गांवों की सुध क्यों नहीं ले रहे?

मुनस्यारी की जनता अब जुमलों से नहीं बहलेगी। हमें सुरक्षित ठिकाना चाहिए और वो भी मानसून आने से पहले!
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