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13/07/2026
 #धुरंधर2 : मनोरंजन का असली धमाका!अगर आप वही घिसी-पिटी, रोने-धोने वाली फिल्में देखकर थक गए हैं, तो 'धुरंधर 2' आपके लिए त...
21/03/2026

#धुरंधर2 : मनोरंजन का असली धमाका!
अगर आप वही घिसी-पिटी, रोने-धोने वाली फिल्में देखकर थक गए हैं, तो 'धुरंधर 2' आपके लिए ताजी हवा के झोंके जैसी है। यह फिल्म चीख-चीख कर कहती है—"सिनेमा मतलब सिर्फ मनोरंजन!"
1. हीरो का अनमैच्ड स्वैग
फिल्म के हीरो ने इस बार साबित कर दिया है कि 'धुरंधर' सिर्फ एक नाम नहीं, एक ब्रांड है। उनकी एंट्री पर जो सीटियां बजती हैं, वो थिएटर की छत हिला देने के लिए काफी हैं। जब वो स्क्रीन पर आते हैं, तो बाकी सब धुंधला लगने लगता है। भाई का स्टाइल, वो चश्मा उतारने का तरीका और उनके चलने का अंदाज़... कसम से, पैसा वसूल है!
2. एक्शन ऐसा कि रोंगटे खड़े हो जाएं
हॉलीवुड की फिल्में इसके सामने फीकी हैं! फिल्म के स्टंट्स इतने ग्रैंड हैं कि आप पलक झपकाना भूल जाएंगे। बाइक चेज़ हो या अकेले सौ लोगों को धूल चटाना, हर सीन में एक अलग ही एनर्जी है। इसे कहते हैं असली मसाला एक्शन—जो सीधा दिल में उतरता है, दिमाग में नहीं!
3. विलेन और डायलॉग्स की जुगलबंदी
जितना तगड़ा हीरो है, उतना ही खूंखार विलेन। दोनों के बीच की जो 'टक्कर' दिखाई गई है, वो इस फिल्म की जान है। और डायलॉग्स? भाई साहब, एक-एक लाइन ऐसी है कि आप उसे अपना व्हाट्सएप स्टेटस बना लेंगे।
> "धुरंधर रुकता नहीं, थकता नहीं... वो सिर्फ तबाही मचाता है!"
>
4. विजुअल्स और म्यूजिक
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर इतना धाकड़ है कि कमजोर दिल वाले भी खुद को बाहुबली समझने लगें। गानों में जो भव्यता है और जो लोकेशन्स दिखाई गई हैं, वो आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाती हैं।
निष्कर्ष: क्यों देखें?
'धुरंधर 2' उन लोगों के लिए है जो सिनेमा हॉल में खुश होने, तालियां बजाने और फुल-टू-मस्ती करने जाते हैं। यह फिल्म हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी लॉजिक को घर छोड़कर सिर्फ 'मैजिक' देखना चाहिए।
मेरा फैसला: इसे घर के छोटे टीवी पर नहीं, बल्कि बड़े पर्दे पर दोस्तों के शोर के साथ देखें। यह फिल्म नहीं, एक त्योहार है! 🎬🔥

फिल्म 'सरदार' (Sardar) एक पावर-पैक्ड स्पाय थ्रिलर है जो जासूसी की दुनिया के साथ-साथ एक बहुत ही गहरे सामाजिक संदेश को जोड़...
20/03/2026

फिल्म 'सरदार' (Sardar) एक पावर-पैक्ड स्पाय थ्रिलर है जो जासूसी की दुनिया के साथ-साथ एक बहुत ही गहरे सामाजिक संदेश को जोड़ती है। अगर आप सस्पेंस, एक्शन और थोड़े 'माइंड-गेम' वाली फ़िल्में पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक ट्रीट है।
यहाँ इस फिल्म का एक विस्तृत रिव्यू दिया गया है:
कहानी का सार (Plot Summary)
फिल्म की कहानी दो किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है—एक है विजय प्रकाश, जो एक पब्लिसिटी का भूखा पुलिस अफसर है, और दूसरा है 'सरदार', एक पूर्व रॉ (RAW) एजेंट जो सालों से जेल में गुमनाम है।
कहानी तब मोड़ लेती है जब पानी के निजीकरण (Water Privatization) और 'वन नेशन, वन पाइपलाइन' जैसी एक खतरनाक साजिश का पर्दाफाश होता है। कैसे एक जासूस अपनी पहचान और परिवार को दांव पर लगाकर देश को एक बड़े कॉर्पोरेट स्कैम से बचाता है, यही फिल्म का मुख्य आधार है।
फिल्म की खूबियां (Highlights)
* कार्थी का दमदार अभिनय: कार्थी ने इस फिल्म में दोहरी भूमिका निभाई है। जहाँ विजय प्रकाश के रूप में वह चुलबुले और मॉडर्न दिखते हैं, वहीं 'सरदार' के रूप में उनका बुजुर्ग और अनुभवी लुक रोंगटे खड़े कर देता है। उनके अलग-अलग भेष (Disguises) फिल्म को असली जासूसी वाला अहसास देते हैं।
* कहानी का मुद्दा: फिल्म सिर्फ मार-धाड़ वाली नहीं है। यह 'वॉटर माफिया' और प्लास्टिक की बोतलों के पानी से होने वाले नुकसान जैसे गंभीर विषय को उठाती है, जो आज के समय में बहुत प्रासंगिक है।
* बैकग्राउंड स्कोर: जी.वी. प्रकाश कुमार का म्यूजिक फिल्म के सस्पेंस को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाता है। खासकर एक्शन सीन्स के दौरान बीजीएम (BGM) काफी इम्पैक्ट डालता है।
* डायरेक्शन: पी.एस. मित्रन ने स्क्रिप्ट को बहुत ही बारीकी से लिखा है। फिल्म में पास्ट (1980s) और प्रेजेंट के बीच का तालमेल बहुत स्मूथ है।
कमजोर कड़ियां (Weak Points)
* फिल्म की लंबाई: फिल्म लगभग 2 घंटे 40 मिनट की है, जो कुछ जगहों पर थोड़ी खिंची हुई लग सकती है, खासकर इंटरवल के ठीक बाद।
* जटिलता: जासूसी की बारीकियों और तकनीकी शब्दों के कारण कुछ दर्शकों को कहानी समझने में थोड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है।
फाइनल वर्डिक्ट (Final Verdict)
रेटिंग: 4/5 ⭐
'सरदार' एक ऐसी फिल्म है जो आपको मनोरंजन के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर करती है। यह केवल एक मसाला फिल्म नहीं है, बल्कि एक इंटेलिजेंट सिनेमा है। अगर आप 'कैथी' (Kaithi) या 'विक्रम' जैसी फिल्मों के फैन हैं, तो इसे मिस न करें।
> देखें या नहीं? जरूर देखें! यह फिल्म अपनी बेहतरीन सिनेमैटोग्राफी और कार्थी की शानदार एक्टिंग के लिए देखी जानी चाहिए।
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पेट्रोल पंप पर अक्सर हम देखते है कि 95% लोगो का तैल डलवाने का अलग ही स्टाइल है वो कभी भी 200 , 100 , 50 का तैल नहीं डलवा...
04/02/2026

पेट्रोल पंप पर अक्सर हम देखते है कि 95% लोगो का तैल डलवाने का अलग ही स्टाइल है वो कभी भी 200 , 100 , 50 का तैल नहीं डलवाते

वो लोग हमेशा 55 रुपए , 105 रुपए , 207 रुपए , 505 रुपए का तैल डलवाते है उनको ये भ्रम होता है कि ऐसा करेंगे तो तैल पूरा डालेगा 😁

सीधा 100 , 50 , 200 का डलवाने पर पेट्रोल पंप वाले कम तेल डालते है 😂😁

वैसे ये स्कीम इन लोगों को बताई किसने होगी एक प्रणाम तो बनता है उस महापुरुष को

अरे भाई मशीन में फीड होता है सिस्टम सारा जितने का फीड किया जाएगा उतना ही तैल डालेगा
इतना अंधेर खाता नहीं की मशीन में से प्वाइंट कटवा दे
हर आए नए टैंकर का फिजिकल होता है सेंपल अलग निकाले जाते है मशीन से निकल माप से नापा जाता है
टैंकर में कुछ मिलाया रखा है या नहीं उसके लिए सिल्वर स्टिक को केमिकल लगाकर डीप मारी जाती है

कई तो थोथा मुंह बनाकर बोल देते की फलाने पेट्रोल पंप से तैल मत डलवाना पानी मिलाते है वो 😁😁

पेट्रोल में पानी 😂 अरे भाई

बस आप सेल्समैन से बचिए नहीं वो झाड़ा लगा देगा आपको

😁😁🙏✍️✍️

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