21/03/2026
1921 मे मिथिला राज्य की मांग को लेकर बने प्रस्ताव में महाराजा रमेश्वर सिंह ने मिथिला के तीन प्रतिनिधि विद्वानों का जिक्र किया, जिनमें से एक नाम विद्यापति का था। उसके बाद ही विद्यापति की पांडूलिपि को सबसे पहले किताब में उल्लेखित किया महाराजकुमार गुणेश्वर सिंह के पुत्र बाबू ललितेश्वर सिंह ने और विद्यापति पर शोध करनवाले पहले शोधकर्त्ता थे कवीश्वर चन्दा झा। विद्यापति की पदावली के पहले सम्पादक और प्रस्तोता थे नगेन्द्र नाथ गुप्त, विद्यापति के नाम पर पहला संस्था बनाया आचार्य रामलोचन शरण, मिथिला के पूर्णिया और मोरंग मे प्रचलित विदापति नाच को संरक्षित करने का पहला प्रयास किया फणीश्वरनाथ रेणु ने।विद्यापति पर विस्तारित शोधकर्ता राज पुस्तरकालयाध्यक्ष आचार्य रमानाथ झा थे..विद्यापति को मिथिला साहित्य का प्रतीक बनाने की पहल कांचिनाथ झा किरण ने की, विद्यापति के नाम पर पटना में पहली संस्था जनकवि बाबा नागार्जुन ने स्थापित की ...
विद्यापति के गीतों को सबसे पहले शास्त्रीय रूप से दरभंगा घराना के ध्रुपद गायक राधाकृष्ण और कर्ताराम मल्लिक ने गया। मिथिला के महान गायक मगन खबास ने विद्यापति की रचनाओं को ख्याल गायकी तक पहुंचाया..और विद्यापति गीत की प्रचलित धुन चनौर गांव के गंगानंद सिंह झा का संगीतबद्ध किया हुआ है। शारदा सिन्हा विद्यापति गीत गानेवाली सबसे लोकप्रिय गायिका हैं। विद्यापति गीत का सबसे पुराना लय गानेवाली गायिका पूर्णिया राज घराने की शैली सिंह है।विद्यापति लिखित गीत की रिकार्डिंग सबसे पहले केएल सहगल के आवाज में ग्रामोफोन कंपनी ने की.. विद्यापति पर पहली फिल्म 1937 में बनी.. विद्यापति के गीतों पर भावनृत्य करनेवाली पहली नृत्यांगना डॉ रमा दास हुई। चेतना समिति के लिए चंद्रेश्वर झा की छवि को आधार बनाकर बनि थी विद्यापति की पहली तस्वीर...