05/04/2026
तुम कोई शरीफ आदमी हो की अफ़सर हो… दिन में मत आना, रात में आओ…. इस वाक्य के बाद जन्म हुआ बिहार की राजनीति में एक राजघराने की!
तो कहानी है अनंत सिंह के बड़े भाई, बड़े सरकार दिलिप सिंह की! दिलिप सिंह RJD से दो बार विधायक और 1995-2000 तक बिहार सरकार में मंत्री रहे थे।
तो आखिर दिलिप सिंह के बनने की कहानी क्या है? बात है उस समय की की जब कांग्रेस राज था, गाड़ियाँ कम ही थी, तस्करियाँ ज़्यादा!
ऐसे में दिलिप सिंह के पास घोड़े की तो कमी नहीं थी, यानी साधन थे। इलाक़े में दबदबा था कामदेव सिंह का, दिलिप सिंह पहले कामदेव के साथ हो लिए, धीरे-धीरे काम और दबदबा दोनों बढ़ने लगा। बाद में कामदेव की मृत्यु हो गई और कामदेव की जगह अब दिलिप सिंह हो गए और यहाँ से कहानी बदली।
दरअसल, कामदेव के उपर भी एक BOSS थे। उस समय के वर्तमान मोकामा के कांग्रेस विधायक “श्याम सुंदर सिंह धीरज”
कामदेव के जाने के बाद दिलिप,विधायक के डायरेक्ट संपर्क में आए गए और चुनाव कैसे जितना है, बूथ कैसे मजबूत करना है,सब दिलिप सिंह के जिम्मे आ गया। यह काम कैसे होता था, आप सब समझदार है, समझ जाइएगा।
बात तब बिगड़ी जब श्याम सुंदर जी मंत्री बने और पटना आवास पर आराम फ़रमा रहे थे, तभी दिलिप सिंह उनके आवास पर पहुँचे। इससे मंत्री जी नाराज़गी ज़ाहिर की और कहा- तुम लोग ऐसे दिन में ना आया करो, रात के अँधेरे में आओ। लोग देख लेंगे तो क्या सोचेंगे! बस यहीं से दिलिप सिंह का माथा ठनका और वे चुनाव लड़ने का मन बना लिया।
साल 1990 में जनता दल के टिकट पर दिलिप सिंह, श्याम सुंदर सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा और 20 हजार वोटों से चुनाव जीते। 1995 में फिर चुनाव जीता और मंत्री बने। RJD का निर्माण हुआ, वे RJD के सदस्य हुए।
अब आया 2000 का चुनाव तब तक एक और भुमिहार नेता का उत्थान हो चुका था, नाम सुरजभान सिंह! 2000ई के चुनाव में सुरजभान ने दिलिप को निर्दलीय ही हराया।
हालाँकि की RJD ने दिलिप सिंह को 2003 में MLC बनाया लेकिन दिलिप सिंह की मृत्यु 2006 में हो गई।
इसमें दिलचस्प यह है की अनंत सिंह 2005 में JDU में आ गए थे और विधायक भी बन गए थे।