04/06/2026
#मोबाइल
मोबाइल में कैद सबकर जान बा,
गायब हो सबकर अब मुस्कान बा।
एके छत के नीचे सब बइठल बाड़ें,
बाकी सबके अलग जहान बा।
माई पुकारे, बेटा सुने ना कुछ,
रील में डूबल ओकर ध्यान बा।
भोर भइल त पहिले फोन उठेला,
राम-नाम बाद में, नेट महान बा।
खाना ठंढा, फोटो गरम-गरम बा,
पोस्ट करे में सब परेशान बा।
घर के बात अब स्टेटस बन जाला,
लाज-शरम सब वीरान बा।
दुख में साथे केहू आवे ना अब,
इमोजी में पूरा सम्मान बा।
सेल्फी खातिर जान जोखिम में डाले,
ई नया जमाना बड़ा शैतान बा।
दादा जी चुपचाप कोना में बइठल,
पोता खातिर बस गेम मैदान बा।
चिट्ठी, किस्सा, बतकही सब गइल,
चैटिंग में अब पूरा ज्ञान बा।
रिश्ता-नाता सब नेटवर्क पर टिकल,
दिल से दिल तक सुनसान बा।
पाँच मिनट खातिर फोन हटे ना,
एतना भारी का एहसान बा?
साँच कहीं त लोग बुरा मान जाला,
मोबाइल अब नया भगवान बा।
“संध्या” लिखली हँसत-हँसावत ई,
भीतर गूंजत खालीपन के तान बा।
✍️ संध्या वर्मा
लखनऊ, उतर प्रदेश