पुरुआ

पुरुआ "पुरुआ" रउआ के भोजपुरी के मिठास,भोजपुरीया माटी के महक से गमकत संस्कार से मिलाई।www.Youtube.com/puruaa It's the very base of any ancient culture.

कवनो मानव समाज के पहिला पहचान..भाषा होखेला। भाषा रउरा रहन सहन...खान पान संस्कृति संस्कार के परिचय देले। पीढ़ी दर पीढ़ी..भाषा ही नदी नीयर पालन पोसन करे ले। नया भाव नया विचार के आगम के साधन बने ले। भोजपुरिया समाज बहुत दिन उपेक्षा के शिकार रहल बा। जबकि देश के बनावे में भोजपुरिया लोगन के बहुत बड़ योगदान बा। एगो साधारण मजदूर से लेके राष्ट्रपति तक भोजपुरिया समाज शुरू में ही ए देश के देले बा। हमनी के अपना भ

ाषा के हीन भावना से काहें देखत बानी जा...एकरा पर बहुत लंबा...कई तरह से चर्चा हो सकेला। लेकिन सवाल ई बा...कि हीन भावना से बाहर निकले खातिर हमनी के का करत बानी जा। पुरुआ ...एही कुल सोच से जनमल एगो संगठन बा...जवना में दुनिया भर के नवहा भोजपुरिया लोग अपना क्षमता के हिसाब से...तन मन धन..बुद्धि कौशल से...भोजपुरी के गौरव के सभका सामने राखे चाहत बा। बरिसन पहिले..हमनी के पूर्वज ट्रिनिडाड, टुबैगो, मारीशस, सूरीनाम...अंडमान में सजा काटे गइलें। अंगरेजन के अत्याचार रहे। लेकिन अपना जीवटता से ओ सब जगह के लोग विकसित सभ्यता वाला जगह बना दीहल। आईं सभे पुरुआ से जुड़ीं...आ अउरी लोगन के जोड़ीं।

Language is the base of any human civilization. The way we communicate with others defines our character, behavior and culture. Since generations, it's the language which has nourished them like a mother nourishes her child. It's the way we communicate which becomes the very base of our sole existence. It's language upon which we lay the foundations of our bright future for our upcoming generations. Bhojpuri has always remained one of the solid sphere of Indian culture, and has given such a strong support in building the nation through its dedicated sons of the soil. Be it Rajendra Prasad, Vashistha Narayan, Bhikhari Thakur, Rahul Sanskritayan, Premchand or anyone else. But somehow of late, it's been largely neglected by its own people. We have started looking at it with a sense of embarrassment. We feel awkward talking about this in our social circles, may be due to fear of getting typecasted as a villager. But with such an enriched culture, there is absolutely no point in getting embarrassed. Rather we should be embracing it with our both hands. Bhojpuri needs us at this hour. It needs our support. So the point is what could be done to uplift it? That's where Puruaa is formed. It's a platform which has been formed by a group of people to make people aware about the power of Bhojpuri. To make people embrace it with a sense of pride, not embarrassment. We strive to do whatever we could in our capacity. And thats not possible without your support. We need you as much as Bhojpuri needs us. Let's join together and take Bhojpuri to an even higher place. And let's also help us join others in this movement. Your every step to help us will be a small step to uplift Bhojpuri.

 #मोबाइलमोबाइल में कैद सबकर जान बा,गायब हो सबकर अब मुस्कान बा।एके छत के नीचे सब बइठल बाड़ें,बाकी सबके अलग जहान बा।माई पु...
04/06/2026

#मोबाइल

मोबाइल में कैद सबकर जान बा,
गायब हो सबकर अब मुस्कान बा।

एके छत के नीचे सब बइठल बाड़ें,
बाकी सबके अलग जहान बा।

माई पुकारे, बेटा सुने ना कुछ,
रील में डूबल ओकर ध्यान बा।

भोर भइल त पहिले फोन उठेला,
राम-नाम बाद में, नेट महान बा।

खाना ठंढा, फोटो गरम-गरम बा,
पोस्ट करे में सब परेशान बा।

घर के बात अब स्टेटस बन जाला,
लाज-शरम सब वीरान बा।

दुख में साथे केहू आवे ना अब,
इमोजी में पूरा सम्मान बा।

सेल्फी खातिर जान जोखिम में डाले,
ई नया जमाना बड़ा शैतान बा।

दादा जी चुपचाप कोना में बइठल,
पोता खातिर बस गेम मैदान बा।

चिट्ठी, किस्सा, बतकही सब गइल,
चैटिंग में अब पूरा ज्ञान बा।

रिश्ता-नाता सब नेटवर्क पर टिकल,
दिल से दिल तक सुनसान बा।

पाँच मिनट खातिर फोन हटे ना,
एतना भारी का एहसान बा?

साँच कहीं त लोग बुरा मान जाला,
मोबाइल अब नया भगवान बा।

“संध्या” लिखली हँसत-हँसावत ई,
भीतर गूंजत खालीपन के तान बा।

✍️ संध्या वर्मा
लखनऊ, उतर प्रदेश

भोजपुरी कविता - एक तरफा पिरितियातू रहबू प्रेयसी बनि,हम तोहार प्रेमी रहब।तोहरा नेह के छाँव तले,चारो पहर तोहरे तक  रहबघाम ...
04/06/2026

भोजपुरी कविता - एक तरफा पिरितिया

तू रहबू प्रेयसी बनि,
हम तोहार प्रेमी रहब।

तोहरा नेह के छाँव तले,
चारो पहर तोहरे तक रहब

घाम बनि तू उतरिहऽ,
हम तोहार छइयाँ रहब।

दुख के हर अँधियार में,
तोहरे संगे खड़ा रहब ।

जिनगी के राह में सजनी,
हर मुश्किल से लड़त रहब ।

भाग लिखाई चाहे जेतना,
तोहरे नाँव से जुड़ल रहब।

आओ,जन्मजनांतर तक,
तोहरे खातिर जियत रहब ।

तू अगर रूठबू कबहूँ,
गीत बनि के मनावत रहब।

तू मुस्काइबू जे घरी सजनी,
हँसि-हँसि प्राण लुटावत रहब ।

तोहरे सुख खातिर सजनी,
हर दुख-पीरा सहत रहब।

दुनिया चाहे साथ छोड़ दे,
तोहरे संगे चलत रहब ।

भोर होखे , चाहे राति ,
सुमिरन करत उठत सुतब।

चनमा बनि तू चमकत रहबू,
हम तोहार चकोर बनब।

नेह-गगन के उजियार पथ पर,
रात-रात भर ताकत रहब॥

प्रीत-नदी के निर्मल धारा में,
डूबत-उतरत रहब ।

अंतिम साँस तलक ए सजनी,
तोहरे खातिर धड़कत रहब ।

दूर रहबू त का होई,
मन से मन जुड़ल रहब।

तू रहबू प्रेयसी बनि,
हम तोहार प्रेमी रहब॥

✍️ डा० दिनेश प्रसाद सिन्हा
मुजफ्फरपुर, बिहार

 #बहुत_बाबाहर त रिश्तन के मेला बहुत बा,अंदर से आदमी अकेला बहुत बा।सामने से सभे मिलत बाटे हँस के,पीठ पीछे बाकिर खेला बहुत...
02/06/2026

#बहुत_बा

बाहर त रिश्तन के मेला बहुत बा,
अंदर से आदमी अकेला बहुत बा।

सामने से सभे मिलत बाटे हँस के,
पीठ पीछे बाकिर खेला बहुत बा।

कहल बा मुश्किल, सहल बा मुश्किल,
जिनगी में भाई हो झमेला बहुत बा।

मतलब से लोग करत बा याद अब,
सुख में त हितन के रेला बहुत बा।

तरस जात कान सुने के मीठ बोली,
शहर के ज़ुबान में करेला बहुत बा।

'नूरैन' बुझे ना केहु मरम आदमी के,
समय के रीत भी अलबेला बहुत बा।

✍️ नूरैन अंसारी
गोपालगंज, बिहार

 #तोहरे_नाम_ई_जिंदगानी_लिख_दीं​मनवा में बा कि तोहरे नाम ई जिंदगानी लिख दीं,कुछ तू कह, कुछ आपन हम जुबानी लिख दीं।तोर अहसा...
02/06/2026

#तोहरे_नाम_ई_जिंदगानी_लिख_दीं

मनवा में बा कि तोहरे नाम ई जिंदगानी लिख दीं,
कुछ तू कह, कुछ आपन हम जुबानी लिख दीं।
तोर अहसास, हमार ई जज्बात के रवानी लिख दीं,
तू करअ इबादत नियन, हम तोके रूहानी लिख दीं।

तोर अँखिया के समुंदर में जे डूबल बा हिया हमार,
ओही अगाध नेह के एगो अनमोल कहानी लिख दीं।
दुनिया के ई ताम-झाम से हमके का मतलब बा,
तोर निश्छल प्यार के ही आपन निशानी लिख दीं।

साँस के हर तार पे बस तोहरे ही नाव बा गुंजत,
धड़कन के हर ताल पे तोर याद के रवानी लिख दीं।
केहू पढ़े या ना पढ़े, पर ई तय बा कि ए साजन,
आपन हर सुख-दुख तोहरे ही कुरबानी लिख दीं।

लोग कहेला कि प्यार बस देह के एगो बंधन बा,
चलऽ आज रूह से रूह के एगो मीठ नादानी लिख दीं।
आ च़ल फिर से एक बार, ई कसम खा के,
तोहरे कदम में हम आपन ई जिंदगानी लिख दीं।

धूप होखे या होखे चाहे घनघोर बदरा के छाया,
तोर आँचर के छाँह के एगो सुघर कहानी लिख दीं।
दुनिया के ई भीर में जब-जब डेराईल मन हमार,
ओह घड़ी में तोर साथ के एगो अमर निशानी लिख दीं।

मिटिहे ना ई रंग कहियो, चाहे बीत जाए जुग कइय़ो,
ई जनम का, हर जनम के तोहरे निशानी लिख दीं।
किस्मत के पन्ना पे चाहे जौन कुछ लिखल होखे,
हम त ओही पे बस तोहरे नाम के सुल्तानी लिख दीं।

'सौरभ' के दिल के हर एगो कोना में बस तू हउ
चल आज सभे के सामने ई सच के कहानी लिख दीं।
आपन कलम से, आपन धड़कन के हर एगो आहट पे,
सिर्फ तोहरे प्यार के एगो मुकम्मल रवानी लिख दीं।

​✍️ अभियंता सौरभ कुमार
सिवान, बिहार

 ागीघाव नया बा भरे में , समय त लागी.भरोसा फेर से करे में , समय त लागी.सब दिन जिनगी के छाँव में बितल,अब घाम में जरे में ,...
31/05/2026

ागी

घाव नया बा भरे में , समय त लागी.
भरोसा फेर से करे में , समय त लागी.

सब दिन जिनगी के छाँव में बितल,
अब घाम में जरे में , समय त लागी.

अभी त बस पेड़ के ओधी रोपाईल बा,
वृक्ष बनि के फरे में , समय त लागी.

लड़कपन के दिन तोहार अभी ना गईल,
नेमुआ नियन गरे में , समय त लागी.

पहिले अपनी राह पे चले के सीखऽ तू,
दुख दोसरा के हरे में , समय त लागी.

“नूरैन” सुघर सा महल बनि त गईल,
मकान के घर करे में , समय त लागी.

✍️ नूरैन अंसारी
गोपालगंज, बिहार

 #नौतपानौतपा के आग रे, सावधान रहऽ रे…नौतपा के आग रे, सावधान रहऽ रे…लू चले दिन-रात रे, आराम करऽ रे…सूरज बरसे जोर से, धरती...
31/05/2026

#नौतपा

नौतपा के आग रे, सावधान रहऽ रे…
नौतपा के आग रे, सावधान रहऽ रे…

लू चले दिन-रात रे, आराम करऽ रे…
सूरज बरसे जोर से, धरती भइल लाल…
सूखल नदी-नाला सब, लागे बेहाल…
नौतपा के आग रे, सावधान रहऽ रे…
नौतपा के आग रे, सावधान रहऽ रे…

गाछ-बिरिछ मुरझा गइल, पत्ता गइल सूख…
छाँव के खोज में भागे, हर एक मानुस…
नींबू-पानी, पन्ना रस, ठंडक देवे खास…
तरबूज-खरबूज खा के, मिटे सब प्यास…
नौतपा के आग रे, सावधान रहऽ रे…

पंखा-कूलर गरम भइल, हवा देवे धोखा…
धूप में निकलब मत तू, राखऽ अपना मौका…
हल्का-फुल्का भोजन, रखऽ तन के ध्यान…
नौतपा के ई दिन में, संयम ही पहचान…
नौतपा के आग रे, सावधान रहऽ रे…

बुजुर्ग के सेवा करऽ, पानी देके प्यार…
पशु-पंछी के खातिर भी, राखऽ ठंडा द्वार…
धरती के ई तपन में, सीखऽ सब लोग ज्ञान…
संयम जे अपनावे, ओकर ऊँच सम्मान…
नौतपा के आग रे, सावधान रहऽ रे…

✍️ दिनेश प्रसाद सिन्हा
मुजफ्फरपुर, बिहार

 #निर्गुणधन खातिर खखुअइब,कतनों बड़हन पदबी पइब।लोभ-माया में लसरइब, निमन-बाउर से लरछुताइब।।बखान सुनि-सुनि अगरइब,गाभी मरि-म...
30/05/2026

#निर्गुण

धन खातिर खखुअइब,
कतनों बड़हन पदबी पइब।
लोभ-माया में लसरइब,
निमन-बाउर से लरछुताइब।।

बखान सुनि-सुनि अगरइब,
गाभी मरि-मारि धधइब।
आग-पाछ सभ बिसरइब,
आपन जीत प ईतरइब।।

अपन करनी प पछताइब,
पैरथकू होई रोगिअइब।
संघाति नाहिं केहु के पइब,
जब तूं कोठी में छीतरइब।

इहवां के इहवें रहि जाइ ,
करम-धरम साथवा जाइ।
बबुआ-माई-मेहर-भउजाई,
उहवां केहुओ ना भेंटाई ।

हिय में बसाव रघुराई ,
भजल नाम नेह लगाई।
मजधार में नईया डगमगाई,
तोहार भजनवे पार लगाई।

✍️ उमेश कुमार राय
जमुआँव (भोजपुर), बिहार

 #भोजपुरी_दोहाखाय आदमी-आदमी अचरज के ई बात।माँस खवक्कड़ काग जे ऊहो काग ना खात।।ओछन का मुँह जे लगे, अपने जात नसाय।सनकी पुर...
30/05/2026

#भोजपुरी_दोहा

खाय आदमी-आदमी अचरज के ई बात।
माँस खवक्कड़ काग जे ऊहो काग ना खात।।

ओछन का मुँह जे लगे, अपने जात नसाय।
सनकी पुरवा संग लगि, बदरा गइल बिलाय।।

कजरा बहि बदरा भइल, तैरत फिरे अकास।
पिय के पता ना पाइ के, बरसे होइ निरास।।

गइल जवानी ना मिले, घीव-मलीदा खाय।
उतरल पानी ना चढ़े, लाख-करोड़ चुकाय।।

पिय के आवन जानि के, मिटत हिया के पीर।
दरस, परस लागे दवा, छूटे रोग गंभीर।।

सुगना सगुन उचारि के, कागा भेज सनेस।
सावन बरसे आग री, पिया बसे परदेस।।

हरन-मरन में जग कहे, मन में राखऽ धीर।
बाँझ भला का जानिहें, परसोता के पीर।।

ताना मारे गोतिनी, कसे परोसिन बोल।
एके गो तोहरे बिना, पिय हम फूटल ढोल।।

अँसुअन शीत न होइहें, बिरहानल के ताप।
मिलन-मरन दू राह से, छूटत ई संताप।।

जीयत जान न छोड़िहें, बेरहमी यमराज।
तबहूँ मनवाँ चेत ना, हरि गुन करे अकाज।।

✍️ अश्विनी कुमार 'आंसू'
सुगांव (पुर्वी चम्पारण), बिहार

 #नेतवा_फउकत_बा चुल्हा जोरि खरची के फिकिरे,दिने तरेगन लउकत बा। जोजना के भरोसे ताज पहीन के,संसद में नेतवा फउकत बा। गतरे-ग...
29/05/2026

#नेतवा_फउकत_बा

चुल्हा जोरि खरची के फिकिरे,
दिने तरेगन लउकत बा।
जोजना के भरोसे ताज पहीन के,
संसद में नेतवा फउकत बा।

गतरे-गतरे टीसत बा,
नसे-नसे दुख धावत बा।
पेट पुचुक के पीठे सटल,
महंगी गली-गली फीफीयात बा। संसद में........।

बतिया ओकर आग उगले ,
सुनि हीया में लावा धधकत बा।
लोगवा ठगा के कपार धइ,
गांवां-गाई फेकरत बा। संसद में........।

हS में ओकरा ना लुकाइल,
लाल बुझकड़ी अकारथ बा।
जन कलेयान कवनों कइलस,
चेतिह ओकर कवनों सोवारथ बा। संसद में..........।

✍️ उमेश कुमार राय
जमुआँव (भोजपुर), बिहार

कब्बो मृग नयनी बन जालू।कब्बो नयनन से घमंड देखावेलू।कब्बो करुणामई बन जालू।नयनन से प्यार बरसावेलू।कब्बो नयना तरेरे लूं।कब्...
28/05/2026

कब्बो मृग नयनी बन जालू।
कब्बो नयनन से घमंड देखावेलू।
कब्बो करुणामई बन जालू।
नयनन से प्यार बरसावेलू।

कब्बो नयना तरेरे लूं।
कब्बो नयनन से बतियावेलू।
का कही तोहरे नयनन के।
अपने नयनन के हमरे नयनन में बसावेलू।

आ जब हम देखिले तोहरे नयनन के।
हमसे ही नैना चुरावेलु।

✍️ बंदना मिश्रा
देवरिया, उत्तर प्रदेश

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