20/03/2026
मासूम सूरज के लिए न्याय मांग रहे ग्रामीणों पर पुलिस का कहर: भाकपा माले
मनातू पुलिस द्वारा आधी रात को दरवाजे तोड़कर, घर में घुंस कर महिलाओं के साथ मारपीट, अबुआ दिसुम –अबुआ राज, की हकीकत बयान करती है।
भाकपा माले प्रखंड सचिव सह जिला कमिटी सदस्य राजेंद्र मेहता और पत्रकार अनिल भुइयां पर पुलिस का आरोप बेबुनियाद।
पदमा मनातू: भाकपा माले ने पदमा मनातू में पुलिस द्वारा ग्रामीणों पर किए गए अमानवीय और बर्बर अत्याचार की कड़े शब्दों में निंदा करती है। पुलिस असली अपराधियों को गिरफ्तार करने के बजाय न्याय की गुहार लगा रहे आम ग्रामीणों और महिलाओं को प्रताड़ित कर रही है।
विदित हो कि बीते 17 मार्च को एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में 8 वर्षीय मासूम सूरज कुमार की मृत्यु हो गई थी। इस घटना के बाद, जब पुलिस ने दोषियों को पकड़ने में कोताही बरती, तो 18 मार्च को आक्रोशित ग्रामीण अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पदमा की सड़कों पर उतरे।
शांतिपूर्ण तरीके से न्याय मांग रहे ग्रामीणों को डराने के लिए पुलिस ने पहले उन पर बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज किया और फायरिंग भी की।
पुलिस ने जो एफ आई आर किया है उसमें कुल्हाड़ी, धारदार हथियारों से ग्रामीणों को लैस बताया गया है। पत्रकारों की रिपोर्टिंग है, सीसीटीवी फुटेज है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि ग्रामीणों के पास कोई हथियार नहीं था। शायद इसीलिए राष्ट्रीय सागर के पत्रकार अनिल भुइयां पर केस किया गया है, ताकि कोई पत्रकार सच न दिखाए और सिर्फ पुलिस जो बोले वही छापे।
भाकपा माले प्रखंड सचिव राजेंद्र मेहता जो वहां रोड जाम की घटना को सुनका पहुंचे। वो भीड़ को और पुलिस को शांत करने का प्रयास कर रहे थें पर प्रशासन द्वारा उन पर भी केस यह साफ दर्शाता है कि पुलिस किसी प्रभाव में या दूसरी मंशा से काम कर रही है।
18 मार्च की देर रात करीब 2:00 बजे जब पुलिस ने सभी संवैधानिक और कानूनी अधिकारों (विशेषकर महिलाओं की गिरफ्तारी और तलाशी से जुड़े नियम) को धता बताते हुए गांव में धावा बोल दिया। गुंडों की तरह घरों के दरवाजे तोड़े गए और सो रहे निहत्थे ग्रामीण महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के साथ भी क्रूरतापूर्वक मारपीट की गई और दर्जनों ग्रामीणों को रात में दुर्दांत अपराधियों की तरह गिरफ्तार कर लिया। तब यह साफ जाहिर हुआ कि पुलिस की मंशा न्याय की नहीं थी।
महिलाओं के साथ रात के अंधेरे में घर में घुसकर मारपीट करना पुलिस की भयावह और आपराधिक मानसिकता को दर्शाता है। सरकार के 'अबुआ दिशुम अबुआ राज' के नारे की जमीनी हकीकत यही है कि इस राज में रात को अपने घरों में भी महिलाएं पुलिस से भी सुरक्षित नहीं हैं। हम मांग करते हैं कि आधी रात को महिलाओं और बच्चों पर बर्बरता करने वाले, पुलिस कर्मियों पर करवाई हो। ऐसी बर्बरता करने की हिम्मत पुलिस को कैसे मिलती है? इसके लिए जिम्मेवार पदाधिकारियों पर करवाई हो।
पलामू में लगातार आम लोग पुलिसिया हिंसा के शिकार हो रहे हैं, पुलिसिया हिंसा पर अविलंब रोक लगनी चाहिए। पलामू में भाकपा माले सामंती हिंसा के खिलाफ जैसे लड़ी है ठीक वैसे ही पुलिसिया हिंसा के खिलाफ भी व्यापक जन प्रतिरोध तेज किया जाएगा।