19/09/2019
International Day of Democracy
अंतर्राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक दिवस
प्यारे साथियो,
जय भीम, नमो बुद्धाय, सत साहब, जय गुरुदेव, सत श्री अकाल और नमस्कार !
आज 15 सितम्बर है, इसे सम्पूर्ण विश्व में “अंतर्राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक दिवस” -“International day of democracy” के रूप में मनाया जाता है। 15 सितम्बर का दिन पूरे विश्व में पिछले दस साल से मनाया जा रहा है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य है प्रजातन्त्र और उसके सिद्धांतों को बढ़ावा देना। आज यह दिन ‘प्रथम विश्व लोकतंत्र सम्मेलन’ के स्थापना की 20वीं वर्षगांठ के रूप में मनाया जा रहा है।
इस दिवस को मनाने के लिए सरकारी और गैर सरकारी संगठनों (Organizations) द्वारा लोकतन्त्र के प्रचार-प्रसार के लिए मनाया जाता है। इस दिन विभिन्न स्तर पर तर्क संगत विचार गोष्ठियाँ, अभियान और प्रैस विज्ञप्तियों का आयोजन करती है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर पूरे विश्व में इसे क्यों मनाया जाता है ? यह हमारे लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है ?
साथियों,
1. लोकतन्त्र हमें वोट का अधिकार देता है। हम अपनी सरकार स्वयं चुनते हैं।
2. किसी अन्य सरकार द्वारा शासित होने की बजाय हम सरकार में अपने प्रतिनिधि चुन कर भेजते हैं जो हमारी आवाज़ बनते हैं।
3. हमारे प्रतिनिधि हमारी जरूरतों व देशहित में अपना पक्ष रखते हैं और नए कानून बनवाते हैं तथा संशोधन भी करवाते हैं।
परिभाषा :
“लोकतन्त्र” रोमन भाषा के दो शब्दों के जोड़ से बना है। लोग (People) और शक्ति (Power) अर्थात लोगों की सत्ता लोकतन्त्र की सबसे बेहतरीन परिभाषा अमरीका के राष्ट्रपति श्री अब्राहम लिंकन ने दी है :-
“लोगों की लोगों द्वारा लोगों के लिए चुनी हुई सरकार”
“Government of the people, by the people and for the people” is a democratic Government.
लोकतन्त्र, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और विश्व शांति हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य है। इन लक्ष्यो को संविधान में निहित लोकतान्त्रिक तरीके से प्राप्त करना होता है। लोकतन्त्र में सभी निर्णय सामूहिक रूप से विचार विमर्श द्वारा लिए जाते हैं। लोगों की सहमति उनके द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा ली जाती है। राजनीतिक पार्टियां बहुमत हासिल करके सरकार का गठन करती हैं। इस प्रकार प्रत्येक मतदाता सरकार के गठन में अपनी भागीदारी निभाता है। मतदाता की यह ज़िम्मेदारी होती है कि वह एक अच्छी और जिम्मेदार सरकार चुने और उस पर नज़र भी रखे। एक लोकतान्त्रिक सरकार सफलता पूर्वक चले उसके लिए उनका सहयोग भी बहुत जरूरी है। इस देश के मतदाताओं को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं के बारे में ज्ञान होना अति आवश्यक है। हमारी सरकार लोगों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। यद्धपि हमारे लोकतन्त्र के लिए ढेर सारी सस्याएँ इसके अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा हैं :- उदाहरण के लिए – हमारे देश में जाति आधारित व्यवस्था आज भी विद्यमान है जो लोकतन्त्र के आधार को खाये जा रही है। संविधान और सरकार द्वारा बनाए नियम एवं कानून के अंतर्गत जाति व्यवस्था खत्म करने के लिए प्रयास किए गए परंतु जाति भेदभाव अभी भी जारी है।
भारत में लोकतन्त्र का भविष्य केवल और केवल भारतवासियों पर निर्भर करता है क्योंकि सरकार जो नियम कानून बनाए उन्हे लोगों ने ही व्यावहारिक रूप देना है। भारत की जनता को ही जातिभेद, ईर्षा, धर्म, क्षेत्र और रंग भेद से ऊपर उठ कर निष्पक्ष भाव से रह कर देश को उन्नति की तरफ ले जाना है। आज यह भी सामने आया है कि सरकार ही इस भेदभाव को बढ़ावा दे रही है जो भारत के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है।
दुनिया में कुल 17 देश ऐसे हैं जो पूर्ण रूप से लोकतान्त्रिक देश हैं परंतु अफसोस है कि उनमें भारत का नाम नहीं है। 53 देश ऐसे हैं जो त्रुटिपूर्ण लोकतान्त्रिक व्यवस्था से चल रहें हैं और उनमें भारत का नाम भी लिया जाता है। शेष सभी देश गैर लोकतान्त्रिक देश हैं। भारत में जो चल रहा है उस पर आगे चर्चा करूंगा, आज बस इतना ही।
जय भीम ! जय भारत !!
आर के सौराण