17/05/2020
पूरी दुनिया इस बार ऐसी ईद मनाएगी जिसमें "ईद की नमाज़" नहीं होगी , ना हज़ारों हज़ार के वह सजदे होंगे , ना वह रौनक होगी , ना वह 6 ज़ाईद तकबीरें होंगी ना लोग एक दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देंगे , हाथ भी नहीं मिलाएँगे , एक दूसरे के घर जाकर सेवईं भी नहीं खाएँगे , ना बहन बेटियाँ फूलों के बगीचों की तरह रंग बिरंगे नये लिबास में दिखेंगी , ना छोटे छोटे बच्चे चारों ओर रंगबिरंगे फूलों की तरह खिले दिखेंगे , ना पुरुष नये कपड़ों में इत्र लगाए ईदगाह और मस्जिद की ओर जाता दिखेगा और ना वह खुतबा सुनाई देगा
"अल्लाहु अकबर , अल्लाहु अकबर , लाईलाह इल्लल्लाहू"
"अल्लाहु अकबर , अल्लाहु अकबर वलिल्लाहिल हम्द"
और वो कहते हैं कि मुसलमान अपने मज़हब को लेकर कट्टर होता है , दुनिया और देश की परवाह नहीं करता। वह पूछते थे कि देश पहले या इस्लाम ? देखिए कि देश को बचाने के लिए हमने क्या क्या कुरबान कर दिया।
और तुम एक शराब ना छोड़ सके।
Via Zahid