Ashwani Joshi

Ashwani Joshi Awareness, Social Activist, & environmental protection..

07/09/2026
जल संरक्षण के लिए जनजागरूकता अपील *पानी की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती, हमारी लापरवाही की होती है* पानी को लेकर हमारी सो...
19/06/2026

जल संरक्षण के लिए जनजागरूकता अपील
*पानी की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती, हमारी लापरवाही की होती है*
पानी को लेकर हमारी सोच में एक बड़ा विरोधाभास है। हम एक दिन पुराने पानी को फेंक देते हैं, वहीं जमीन के 500 फुट नीचे हजारों साल से संग्रहित पानी को सबसे शुद्ध मानकर पीते हैं।
वास्तव में पानी की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती। इसकी उपयोगिता का निर्धारण समय से नहीं, बल्कि इसकी स्वच्छता, भंडारण की स्थिति और उपलब्धता से होता है।

*जोशी ने बताया कि कैसे बदल जाती है हमारी सोच:*

1. *शहरों में* जहाँ रोज पानी आता है, लोग कल का पानी बासी कहकर फेंक देते हैं। उनके लिए पानी की एक्सपायरी डेट 1 दिन है।
2. *जहाँ हफ्ते में एक बार पानी आता है*, वही पानी 2 से 8 दिन तक बिना हिचक इस्तेमाल होता है।
3. *शादियों और समारोहों में* नई बोतल खुलते ही आधी भरी बोतल फेंक दी जाती है। एक्सपायरी डेट कुछ घंटे।
4. *रेगिस्तान में* यात्रा के दौरान पानी की हर बूंद तब तक ताजा रहती है जब तक अगला स्रोत न मिल जाए।
5. *बांधों और तालाबों का पानी* अगले मानसून तक, और सूखे में 2-3 साल तक लोगों का जीवन चलाता है।
6. *बोरवेल का पानी* सैकड़ों-हजारों साल पुराना हो सकता है, फिर भी हम उसे सबसे सुरक्षित मानते हैं।

जब पानी प्रचुर मात्रा में होता है तो हम उसे “बासी” कह देते हैं। जब अकाल पड़ता है तो वही पानी अमृत बन जाता है।

*हमारी विनम्र अपील:*

यह सिर्फ एक संदेश नहीं, हमारे भविष्य को बचाने का आह्वान है। पानी की बर्बादी बंद करें। हर बूंद को सहेजें।

- पीने का बचा हुआ पानी पौधों में डालें।
- नल को अनावश्यक रूप से खुला न छोड़ें।
- वर्षा जल संरक्षण को अपनाएं।

क्योंकि धरती पर पानी खत्म होने से पहले हमारी लापरवाही हमें प्यासा छोड़ देगी। उन्होंने राजनेताओं से भी अपील की कि वे पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना से प्रेरणा लें कि वह अक्सर हर मंच पर जल बचाने की अपील करते हैं ।

*जल है तो कल है।*
इस संदेश को अपने परिवार, मित्रों और समुदाय तक पहुंचाएं। जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाएं।

*स्वस्थ रहें। सुरक्षित रहें। पानी बचाएं।*

18/06/2026

How justice actually works.

"Law is not just about being right. It is also about proving that you are right through the correct process."

Being right on the facts isn’t enough in court. If you can’t prove it with evidence, follow procedure, and stay within due process, the law can’t act on it.

It’s frustrating, but that’s the trade-off for fairness:
1. It prevents mob justice and arbitrary decisions.
2. It gives both sides a structured chance to be heard.
3. It protects the innocent from being punished on claims alone.

So the law cares about _truth_, but it demands that truth be established cleanly, transparently, and without shortcuts. That’s why cases are won or lost on procedure as much as on substance.

ਕੋਈ ਸੁਣੇ ਨਾ ਪੀੜ ਮੇਰੀ, ਬੋਲ ਮੇਰੇ ਮੂੰਹ 'ਚ ਘੁੱਟ ਕੇ ਰੋਇਆ  ਹੱਸਣ ਵਾਲੇ ਹੱਸਦੇ ਰਹੇ, ਦਿਲ ਮੈਂ ਆਪਣਾ ਟੁੱਟ ਕੇ ਰੋਇਆਜਿਸ ਦਰ 'ਤੇ ਮੈਂ ਮੱਥਾ ਟ...
15/06/2026

ਕੋਈ ਸੁਣੇ ਨਾ ਪੀੜ ਮੇਰੀ, ਬੋਲ ਮੇਰੇ ਮੂੰਹ 'ਚ ਘੁੱਟ ਕੇ ਰੋਇਆ
ਹੱਸਣ ਵਾਲੇ ਹੱਸਦੇ ਰਹੇ, ਦਿਲ ਮੈਂ ਆਪਣਾ ਟੁੱਟ ਕੇ ਰੋਇਆ

ਜਿਸ ਦਰ 'ਤੇ ਮੈਂ ਮੱਥਾ ਟੇਕਿਆ, ਉਹੀ ਦਰ ਮੈਨੂੰ ਧੁੱਟ ਕੇ ਰੋਇਆ
ਮੈਂ ਦਿੱਤਾ ਸੀ ਪਿਆਰ ਸਭ ਨੂੰ, ਉਹੀ ਦਿਲ ਮੇਰਾ ਲੁੱਟ ਕੇ ਰੋਇਆ

ਰਾਤੀਂ ਤਾਰੇ ਗਿਣ ਗਿਣ ਕੇ, ਸਵਾਲ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਤੋਂ ਪੁੱਛ ਕੇ ਰੋਇਆ
ਜੋ ਮਿਲਣਾ ਸੀ ਉਹ ਨਾ ਮਿਲਿਆ, ਜੋ ਮਿਲਿਆ ਸੋ ਛੁੱਟ ਕੇ ਰੋਇਆ

👉ਇਹ ਲਾਈਨਾਂ ਉਸੇ ਫ਼ਲਸਫ਼ੇ ਤੇ ਰੱਖੀਆਂ ਹਨ - ਬਾਹਰੋਂ ਦੁਨੀਆਂ ਲੁੱਟਦੀ-ਲੁੱਟਾਉਂਦੀ ਰਹਿੰਦੀ ਐ, ਪਰ ਅੰਦਰੋਂ ਇਨਸਾਨ ਹੀ ਸਭ ਕੁਝ ਸਹਿ ਕੇ ਘੁੱਟ-ਘੁੱਟ ਕੇ ਰੋਂਦਾ ਐ।

ਸੱਚ ਦੀ ਗੱਲ ਜੇ ਕਹਿ ਦਿੱਤੀ, ਜੱਗ ਸਾਰਾ ਮੈਥੋਂ ਰੁੱਠ ਕੇ ਰੋਇਆ
‘ਜੋਸ਼ੀ’ ਮੈਂ ਚੁੱਪ ਰਹਿ ਕੇ ਬਰਦਾਸ਼ਤ ਕੀਤਾ, ਦਰਦ ਅੰਦਰ ਹੀ ਘੁੱਟ ਕੇ ਰੋਇਆ

*“सुबह 5 बजे भजन नहीं, सोशल स्किल्स का रियाज”*  _वरिष्ठ नागरिकों के लिए हल्की-फुल्की चेतावनी_😂मित्रों, आप वरिष्ठ नागरिक ...
15/06/2026

*“सुबह 5 बजे भजन नहीं, सोशल स्किल्स का रियाज”*
_वरिष्ठ नागरिकों के लिए हल्की-फुल्की चेतावनी_😂

मित्रों, आप वरिष्ठ नागरिक हो गए हो, इसका मतलब ये नहीं कि आप पूरे मोहल्ले के अलार्म क्लॉक बन जाओ।

सुबह 5 बजे “उठो, उठो, सूर्य निकल रहा है” वाली आवाज घर के बाहर से नहीं, बालकनी से आती है। और 5 मिनट बाद पता चलता है कि सूर्य तो क्या, पड़ोसी भी जाग गए हैं और वो भी आपकी मर्जी से नहीं।

समझ लो, सुबह 5 बजे की शांति दुनिया का सबसे कीमती सामान है। उसे “गुड मॉर्निंग” के 47 मैसेज फॉरवर्ड करके मत उड़ाओ।

2. नई पीढ़ी से पंगा मत लो, वो तुम्हारी देखभाल करने वाली है
हाँ, वो मोबाइल में घुसी रहती है। हाँ, वो देर रात तक जागती है। हाँ, वो “भैया, नाश्ते में पराठा नहीं, अवोकाडो टोस्ट खाऊँगी” कहती है।

लेकिन वही नई पीढ़ी कल को तुम्हारी दवाई लाएगी, डॉक्टर को फोन करेगी, और ओटीपी पढ़कर देगी।

अगर आज तुम हर बात पर “हमारे जमाने में ऐसा नहीं होता था” वाला डायलॉग मारोगे, तो कल को वो भी कह देगी, “हमारे जमाने में बुजुर्ग ऐसे नहीं होते थे”।

रिश्ता बराबर का है: तुम अनुभव दो, वो स्पेस दो। जीत दोनों की होगी।

3. सोशल स्किल्स का छोटा सा फॉर्मूला
- *सलाह वही दो जो मांगी जाए*: बिना मांगी सलाह वही काम करती है जो बिना बुलाए मेहमान – सबको असहज।
- *मजाक हल्का हो, चोट न करे*: हंसी अच्छी है, पर अगर हंसी के बाद सन्नाटा छा जाए तो समझ जाओ, निशाना चूक गया।
- *चुप रहना भी एक कला है*: हर बात पर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं। कभी-कभी “हम्म” और मुस्कान से घर में शांति रहती है।

सार की बात
वरिष्ठ होने का मतलब सम्मान पाना है, शोर मचाना नहीं।
नई पीढ़ी को थोड़ी आजादी दो, वो तुम्हें आराम देगी।
और हाँ, अगर सुबह 5 बजे कुछ कहना ही है, तो फुसफुसा कर कहो – “जोशी, चाय पी लोगे?”

बाकी सब ठीक है। मोहल्ला सो रहा है, उसे सोने दो। तुम्हारी समझदारी ही तुम्हारा असली स्टेटस सिंबल है।

कैसा लगा? अच्छा लगा तो इसे “वरिष्ठ नागरिकों से शेयर करना वर्ना डिलीट का ऑप्शन मौजूद है। चिढ़ चिढ़ की आदत सेहत बिगाड़ती है। खुश रहो, स्वस्थ रहो।

Address

Nawanshahr Doaba

Telephone

+919855066710

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ashwani Joshi posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share