05/12/2025
मोहम्मद इकबाल…
पिछले सत्तर सालों से
लिब्रल सेकुलर गिरोह
मुसलमानों को विकल्पहीन बनाकर
अपनी मर्जी से वोट बैंक की तरह प्रयोग कर रहा है,
ये गिरोह कभी भी मुसलमानों के
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार
या मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में
बुनियादी सुविधाओं के लिए काम नहीं करता…
इस गिरोह द्वारा मुसलमानों को हमेशा डराया गया
कि हमें वोट दो वरना बीजेपी आ जाएगी…
अरे ओ काका छोड़िए ये सब बातें…
आइए टेलीकॉम क्षेत्र की बात करते हैं…
आपको याद होगा 2004-2005 में
नई सिम तीन चार सौ कि आती थी
BSNL का तो हजार रुपए देने पर मिलते थे…
और हर महीने सिम चालू रखने के लिए
मिनिमम दो सौ का रिचार्ज करवाना पड़ता था…
कॉल बहुत महंगे होते थे
कई बार लोग मिसकॉल से भी काम चला लेते थे…
काल दर कम करवाने के लिए
तीस रुपए महीने का अलग से रिचार्ज करवाना पड़ता था…
दो राज्यों के बॉर्डर पर रहने वालों का तो जीना दूभर हो गया था
गलती से अपने राज्य का नेटवर्क कमजोर पड़ा
ये दूसरे राज्य का नेटवर्क पकड़ा की
घपाक से 50 रुपया कट जाता था…
फिर अचानक टेलीकॉम क्षेत्र में
यूनिनॉर की एंट्री हुई…
यूनिनॉर ने फोन काल दरों में क्रांति ला दिया
लाइफ टाइम इनकमिंग फ्री
और अनलिमिटेड फोन काल यूनिनॉर ने ही शुरू किया…
दो सिम वाले फोन की एंट्री हो चुकी थी
लोगों ने अपने मोबाइल में
एक अपना पुराना सिम
और दूसरा कालिंग के लिए
यूनिनॉर की सिम रखने लगे…
यूनिनॉर ने सभी टेलीकॉम कंपनियों की नींद हराम कर दिया था…
फिर खेल हुआ परंपरागत टेलीकॉम कंपनियों का
और यूनिनॉर को
भारतीय मार्केट से आउट कर दिया गया
और देखते ही देखते
जनता के हाथों से विकल्प को छीन लिया गया,
आज लाइफ़ टाइम इनकमिंग का सिस्टम खत्म हो चुका है
और रिचार्ज की दरें लगातार बढ़ रही हैं…
AIMIM के भारतीय राजनीति में आने से
लिबरल सेकुलर गिरोहों का
धराऊं वोट बैंक (मुस्लिम) खिसकता नज़र आ रहा है
इसलिए ये गिरोह कैसे भी करके
ओवैसी की राजनीति को भी यूनिनॉर की तरह खत्म कर देना चाहते हैं?