23/04/2026
कभी संसद की गरिमा सोमनाथ चटर्जी, मीरा कुमार और पी. ए. संगमा जैसे नामों से झलकती थी आज वही दृश्य बदला हुआ है।अमित शाह, किरण रिजिजू और ओम बिड़ला की असहज मुद्रा और खामोशी बहुत कुछ कहती है।,नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में सत्ता कागज़ों पर मजबूत हुई जरूर हूई है पर संवाद सिमटता दिखता है।अब तो यह तस्वीर खुद चीख रही है कि लोकतंत्र के लिए कोई जगह नहीं बची।
Tejashwi Yadav Lalu Prasad Yadav R.J.D - राष्ट्रीय जनता दल