AIMIM Mumbai Mohd Sadaf Khan

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I'm AIMIM Mumbai Social Worker ( KHIDMAT-E-KHALQ)
मैं जो कहता हूं दिलसे कहता हूं,
मेरा सब्जेक्ट, सिर्फ मोहब्बत है।
मैं नाम निहाद, तथाकथित धर्मनिरपेक्ष,
सेकुलर पार्टियों, का सख्त ,"मुखालिफ" हूं।

31/08/2026

Hyderabad: Darussalam ka darwaza sabhi ke liye khula hai aur AIMIM awam ki khidmat ke liye hamesha tayyar hai.

30/08/2026

आपका लीडर होगा तो आपकी बात होगी
आपकी पार्टी होगी तो आपका काम होगा
जिसका अपना दल नहीं उसके मसले का हल नहीं
जिसका अपना नेता नहीं उसका कुछ होता नहीं।

जिस के सर पर Nabi के जूती वाली Topi हो
जिस के चेहरे पर सुन्नते Nabi मौजूद हो
जिस के बाल सुन्नत के मुताबिक़ हों
जिसका लिबास Nabi का पसंदीदा लिबास हो
जो अपनी बात Bismillah से शुरू करके Nar-e-तकबीर पर खत्म करता हो
जो बात बात में Insha Allah, Alhumdulilaah कहता हो।
जो Nabi पाक की तरह बच्चों से मोहब्बत और बड़ों की इज्ज़त करता हो
ऐसा इंसान क़ौम का गद्दार या दलाल या मौका परस्त नहीं हो सकता है और ये बात मै खुदा की क़सम खा कर कह सकता हूं

मोमिनों अपने रहबर को पहचानो
तुम्हें इस दुनिया में हाकिम बना कर भेजा गया था तुम किसके महकूम बने हुए हो
सोचो, समझो और फिक्र करो

30/08/2026

जनता को अब चेहरों से नहीं, किरदार और राजनीतिक रिकॉर्ड से फैसला करना चाहिए।

अब्दुल मन्नान का समाजवादी पार्टी में जाना कई सवाल खड़े करता है। जो व्यक्ति कल तक एक राजनीतिक मंच पर था और आज अपने राजनीतिक भविष्य के लिए दूसरे मंच का सहारा ले रहा है, उसकी प्राथमिकता जनता है या अपनी कुर्सी—यह सवाल पूछना ज़रूरी है।

कल तक जिसे “डकैत” बताकर जनता के सामने पेश किया जा रहा था, आज उसी के साथ खड़े होकर राजनीति की जा रही है।
सवाल सीधा है—अगर वह कल तक डकैत था, तो आज अचानक साफ़ कैसे हो गया? या तो कल का आरोप गलत था, या आज की सियासत में सिद्धांत बिक चुके हैं।

अब समझ आया कि आप अलीगढ़ की छात्र राजनीति में भी कभी अपनी जगह क्यों नहीं बना पाए और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्रसंघ का चुनाव क्यों हार गए।

जब राजनीति में सिद्धांत और विचार पीछे छूट जाएँ और निजी स्वार्थ व राजनीतिक सौदेबाज़ी आगे आ जाए, तो छात्र और पढ़ा-लिखा समाज ऐसे रवैये को पहचान लेता है।

जनता सावधान रहे—राजनीति सेवा के लिए है, निजी महत्वाकांक्षा और कुर्सी के लिए नहीं।

30/08/2026

2012/2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगा की दास्तान सुन कर आप भी रोने लगेगे अगर आपके अंदर दिल है...
आप भले ही किसी पार्टी से ताल्लुक रखते हों मगर आप इस वीडियो को जरुर एक बार सुनें...

30/08/2026
30/08/2026

क्या में गैरों की चौखट पे जाके उनसे बोलों.. Barisster Asaduddin Owaisi Sahab का दर्द भरा बयान...

जुम्मन इस पोस्ट के कमेंट में दिखाई नहीं दे‌ रहें जुम्मनो की हालत धोबी के कु@ जैसी हो गई है ना घर के ना घाट केl
जुम्मनो को ना खुदा ही मिला, ना विशाल ए सनम, ना इधर के रहे ना उधर के रहे।

जो सनातन है वही समाजवादी है
इस समाजवाद में अब्दुल शामिल है या नहीं ?
हम उन्हें जुम्मन और मुनाफ़िक़ कह दें तो हो जाते हैं बदनाम
अखिलेश भाईया इनको सनातनी भी कह दें तो चर्चा नहीं होता।।

मगर जुम्मन को गैरों के इधर ही जाकर शकून मिलता समाजवादी पार्टी में हा हा हा वही समाजवादी पार्टी जो कल अखिलेश यादव बोले रहे थे कि समाजवादी ही असली सनातन हैं अब जुम्मन करे तो क्या करे खुलकर विरोध भी नहीं कर सकता दूसरी जगह जाने का भी विकल्प नहीं है हां तो अपना धर्म परिवर्तन करे तब आका खुश होंगे बड़ी समस्या है जुम्मन के पास|

जैसे अखिलेश यादव वोट लेते हैं मुस्लिम समाज का 💯% और आवाज उठाते हैं 1000 किलो मिटर दूर मोहन यादव की कमसेकम ओवेसी साहब 5% भी अपनी कौम.का वोट नहीं पाते आवाज हर मुद्दे पर उठे मुस्लिम समाज के भी गैरों के भी हर मजलूम की आवाज उठते हैं पिछले 68 साल से ओवेसी खानदान हैदराबाद से आवाज उठाते रहे हैं कोई भी मुस्लिम मुद्दे पूरे भारत में कहीं हुए हैं|

कोई बता दे जिस पर असदुद्दीन औवेसी साहब के अब्बा और असदुद्दीन ओवेसी साहब ने ना उठाए हो ज़रूरत पड़ने पर हर मुमकिन तन-मन-धन ताकत माली मदद सब किए हैं चाहे ओह बाबरी मस्जिद का मुद्दा चाहे मुंबई के ढांगे हो चाहे मुजफ्फरपुर नगर का दंगा हो बिना जाती मुफ़ाद के कौम के हर मसले जी जान निछावर किया खानदाने ओवेसी ने|

जैसी ममता हमारी मजहबी किताब को चुनौती देंगे मेरा किया हुआ वादा झूठा नहीं हो सकता कुरान में लिखी बातें गलत हो शक्ति किसी जुम्मन की हिम्मत नहीं हुई तो विरोध करे उल्टा जवानी कुर्बान कर के जिताया टीएमसी को सब लोग बीजेपी में चले गए जुम्मन अकेला रह गया|

यहीं हाल महाराष्ट्र में भी हुवा वोट लेने के बाद सब बीजेपी में चले गए यहीं हाल रहा तो जुम्मानो के पास बटन दबाने के लिए विकल्प खत्म हो जाएंगे ईवीएम में बटन...
1AIMIM 👈
2बीजेपी 👈
3नोटा 👈
जुम्मन AIMIM में अनाही शक्ता|
बीजेपी में जा नहीं सकता|
नोटा दबा नहीं सकता|

30/08/2026

*उत्तरप्रदेश में लगभग 30 से 35 पार्टियां चुनाव लड़ेग*...
*भारत में 29राज्यों में2049 पार्टियाँ चुनाव आयोग ELECTION COMMISINON OFF INDIA में रैजिस्टरड है किसी को किसी के चुनाव लड़ने से दिक्कत नहीं सिर्फ एआईआईएम पार्टी अगर चुनाव लड़ेगी तो 2048 पार्टियों को दिक्कत होने लगती है सेक्युलरिज्म खतरे में पड़ने लगता है बीजेपी हराने का कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ ओवेसी साहब और उनकी Party' AIMIM पर डाल दिया जाता है|*

*जो पिछले 79 साल की आजादी के बाद से मुस्लिम समाज को सियाशी यतीम Jahni गुलाम बना दिया है नसल दर नसल गुलामी का जाह्नों में जुनून भर दिया है अल्लाह सुभाना हिदायत दे मेरी कौम मासूम भोले भले लोगों को कि ओह अपनी कयादत को पहचाने उसको मजबूत करे जो इनके हक वा हुकूक की लड़ाई लड़े और इन्साफ दिला सके•|*

30/08/2026

पूर्व सासद व काग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा है पहले बिहार में शकील ने पार्टी छोड़ी, यूपी में नसीमुद्दीन ने छोड़ी और कर्नाटक में रोशन बेग ने छोड़ी. इसके बाद कांग्रेस पार्टी को इस बात की चिंता होनी चाहिए कि भारत का मुसलमान कांग्रेस को वोट देता है और कांग्रेस पार्टी लगातार मुस्लिम नेताओं को नजरअंदाज कर रही है|

रशीद अल्वी ने कहा मेरा सुझाव है अपनी पार्टी को भी और दूसरी सेक्युलर पार्टियों को भी, अगर मुस्लिम लीडरशिप को नजरअंदाज किया जाएगा तो ओवैसी जैसे लीडर देश में पैदा होते चले जाएंगे, ओवैसी एक ताकत बनते जा रहे हैं, आपने देख बिहार के अंदर, आपने देखा महाराष्ट्र के अंदर कितनी सीटे जीती है, हर जगह उनका कुछ ना कुछ असर बढ़ता जा रहा है|

30/08/2026

अब तेरी हिम्मत और खुद्दारी बहादुरी, दिलेरी का चर्चा ग़ैरों की महफिल में है सलाम ओवैसी साहब|
लफ़्ज़ों में दम हो, तो आवाज़ बन जाती है,
सच की बात हो, तो पहचान बन जाती है।
संसद में जो बेख़ौफ़ अपनी बात रखे,
ऐसी शख़्सियत की मिसाल, असदुद्दीन ओवैसी कहलाती है।

मगर मैंने अपनी सारी ज़िन्दगी ऐसा नेता वाकई में नहीं देखा जो दिलाओ जान से कौम के लिए समर्पित है|

ओवैसी सबको अच्छा लगता है शिवाय लालू माया मुलायम ममता
तेजस्वी अखिलेश उधव ठाकरे शरद पवार राहुल गांधी प्रियंका गांधी सोनिया गांधी के चमचागिरी करने वाले को और भारत में जितनी भी तथाकथित सेक्युलर पार्टियां हैं।
उनकी गुलामी करने वालों को ओवेसी साहब कभी रास नहीं आएंगे क्योंकि ओवेसी साहब गुलामी खतम करने की बात करते हैं खुद्दारी की बात करते हैं आजादी की बात करते हैं हिस्सेदारी की बात करते हैं बाराबरी की बात करते हैं इसी वजह से गुलामो को ओवेसी साहब पसंद नहीं हैं|

30/08/2026

अजीब लोग हैं दुनिया के शैतान के डर से...
वोट अबू जहल जैसे लोगों को देते हैं,
और हाकिम....
हज़रत उमर (रजियल्लाहु तआला अन्हा) जैसा तलाश करते हैं...

Election Ke बाद में बोलेंगे दुआओ असर नहीं बचा है दुआओ में बहुत असर बचा है पर दुआ कर कोन रहा भी तो ऊपर वाला देखता है|

500/500 रुपये में एक-एक प्लेट बिरयानी पर अपने वोट को बेचने वाली कौम बाद में जब जुल्म होगा तो दुआ करेंगे ऐ अल्लाह जालिम बादशाह से मुघे मेरी कौम को बचा लें जब तक बीजेपी का Dar दिल से ख़तम नहीं होगा अल्लाह सुभाना वा ताला पर पूरा तवक्कल और यकीन नहीं होगा|

जब तक तथाकथित सेक्युलर पार्टियों की गुलामी का नसा उतरेगा नहीं तब tak हमारी कौम ऐसे ही जलील वा ख़्वार रुसवा होती रहेगी सारा ठेका सेक्युलरिज्म बचाने का मुसलमानो के हय सर पर बोघ बना कर रख दिया गया धोते रहो पिछले 79 साल से हमारी कौम यहीं कर रही हैं बीजेपी हराने के नाम पर वोट दे राही हैं तथाकथित सेक्युलर पार्टियों ने मुसलमानों को बलि का बकरा बना दिया है|

बाली जब चढनी होगी तो सहाबुद्दीन की आजम खान मुख्तार अंसारी की इरफान सोलंकी जांगीर नवाब मलिक की इन्ही की चढ़ेगी मैलाई खानी होगी तब अखिलेश यादव तेजस्वी यादव उद्धो ठाकरे शरद पवार ममता बेनर्जी राहुल गांधी सोनिया गांधी प्रियंका गांधी मजा यहीं लोग करेंगे सिर्फ सजा भुगतने के लिए हर तथाकथित सेक्युलर पार्टियों में एक न एक बड़ा मुस्लिम नेता रहता हैउसी की ही बलि दी जाती है|

तब तक मेरी कौम की हालत इसे भी बुरे होंगे बदतर होंगे अल्लाह सुभाना वा ताला पर तवक्कल और यकीन रखो अपना फैसला अल्लाह सुभाना वा ताला पर छोड़ आप जो करते हो बेहतर की तलाश में रहते हो|

अल्लाह सुभाना वा ताला पर तवक्कल और यकीन रखो ओह जो करेगा बहतरीन करेगा|

जालिम बादशाह भी अल्लाह सुभाना ताला ने तुम पर मुसल्लत किया है ताकि तुम्हारे Amaal कुछ सही हो Shaken जब तक अल्लाह सुभाना वा ताला नहीं चाहेगा पूरी दुनिया का बिपछ मिल कर हटा भी नहीं सकता जालिम बादशाह को जिस दिन अल्लाह सुभाना वह ताला चाहेगा अक झटके में पूरा तख्त चूर चूर कर देगा|

रह गई रस्म-ऐ-अज़ां, रूह-ऐ-बिलाली ना रही, फ़लसफ़ा रह गया, तलक़ीन-ऐ-ग़ज़ाली ना रही..

मस्जिदें मर्सिया खवां हैं के नमाज़ी ना रहे, यानी वोह साहिब-ऐ-औसाफ़-ऐ-हिजाज़ी ना रहे..

Reh Gyi Rasm-e-Azan, Rooh-e-Bilali Na Rahi Falsafa Reh Gya, Talqeen-e-Ghazali Na Rahi..

Masjidain Marsiya Khawan Hain Ke Namazi Na Rahe Yani Woh Sahib-e-Ausaf-e-Hijazi Na Rahe..

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