26/02/2024
22 फरवरी 20240 को विश्व कविता को हमारी मातृभाषा में अनुदित करने अनुवादक सुरेश सलिल की पुस्तकों का हुआ लोकार्पण विश्वंभर दयालु त्रिपाठी राजकीय जिला पुस्तकालय उन्नाव में वरेण्य साहित्यकारों ने की शिरक़तअतिथियों और सहयोगियों का हुआ सम्मान
उन्नाव। जनपद में जन्मे अंतर्राष्ट्रीय साहित्यकार, कवि, आलोचक सुरेश सलिल की प्रथम पूण्य तिथि पर स्मरण सुरेश सलिल कार्यक्रम का आयोजन पंडित विश्वम्भर दयालु त्रिपाठी राजकीय जिला पुस्तकालय में किया गया। रंग संस्था अनुष्ठान के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अतिवारिष्ठ साहित्यकार डॉ महेश चंद्र मिश्र विधु और मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी नम्रता सिंह, विशिष्ट अतिथियों प्रोफेसर डॉ रश्मि दीक्षित, इतिहासकार सुधीर विद्यार्थी, पूर्व विशेष कार्याधिकारी पुतकालय प्रकोष्ठ उत्तर प्रदेश शासन डॉ मृदुला पंडित, श्री सलिल जी के सुपुत्र नाट्य आलोचक संगम पांडेय, लेखक एवम फ़िल्म व नाट्य निर्देशक विजय पंडित, विश्व स्तरीय कवि श्रमिक जी आदि ने श्री सलिल जी के व्यक्तिगत संकलन से लोकार्पित 1500 पुस्तकों के कक्ष का फीता काट कर उद्घाटन करते हुए माँ सरस्वती की प्रतिमा, जनपद के प्रथम सांसद व स्वतंत्रता सेनानी विश्वम्भर दयालु त्रिपाठी जी और सलिल जी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह शुभारम्भ किया। डॉ मृदुला पंडित ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि श्री सलिल जिला पुस्तकालय के हर पुस्तक महोत्सव में पधार कर उन्नाव वासियों को अपनी विश्व स्तरीय साहित्यिक शैली से आत्मसात कराते थे और उन्नाव से पान बंधवा कर अपने साथ ले जाते थे।अतिथियों सहित पुस्तकालय को पिछले कई दशकों से सहयोग देने वाले सक्रिय सहयोगियों श्रीमती सुरभि श्रीवास्तव, डॉ सुधीर शुक्ला, डॉ मनीष सिंह सेंगर, फ़िल्म एक्टर जब्बार अकरम, डॉ रेनू शुक्ला,नीता, मोहितको सम्मानित किया गया। एस डी एम नमृता सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि मैं पुस्तकालय में स्वयं समय समय पर आकर यहां की व्यवस्थाओं में अपना योगदान दूंगी। डॉ विजय पंडित ने श्री सलिल जी द्वारा अलग अलग भाषाओं की रचनाओं के हिंदी रूपांतरण पर व्यापक व्याख्यान दिया। सलिल जी के सुपुत्र संगम पांडेय ने अपने पिताश्री की वैश्विक साहित्यिक यात्रा को कई अनुकरणीय संस्मरणों के माध्यम से प्रस्तुत किया। इतिहासकार सुधीर विद्यार्थी और वरेण्य साहित्यकार श्रमिक जी ने अवधी पुट रखते हुए सलिल जी की सैकड़ों कृतियों और हज़ारों रचनाओं पर प्रकाश डाला। डॉ विधु जी ने जिला पुस्तकालय और सलिल जी के कई दशकों से रिश्ते की पुष्टि करते हुए उनके स्वाभिमानी व्यक्तित्व की मुखर होकर प्रशंसा की और कहा कि एक विश्व स्तरीय अनुवादक व लेखक के रूप में वे सदैव साहित्य जगत में दीप्तमान रहेंगे। प्रोफेसर रश्मि दीक्षित ने बड़े ही मार्मिक उद्बोधन में कहा कि पुस्तकालय हमारे पिता जी के नाम से स्थापित हुआ और हमारे आवास पर सलिल जी का अक्सर आगमन हम सभी को सदैव भाव विभोर करता था। रेड क्रॉस उप सभापति डॉ मनीष सेंगर ने भी श्री सलिल के अत्यंत सक्रिय साहित्यिक योगदान और उनकी स्मृतियों को करीने से संरक्षित करने में जिला पुस्तकालय की महती भूमिका पर व्याख्यान दिया। पूर्व जॉइन्ट कमिश्नर चकबंदी रवि कुमार रवि द्वारा उन्नाव के गजट में दर्ज़ प्राचीन इतिहास का हिंदी रूपांतरण कर उसमें बहुत से गूढ़ तथ्यों को स्वयं शोध कर जोड़ने के बाद लिखी गयी पुस्तक उन्नाव का इतिहास और सलिल जी के अनुजों राष्ट्रीय स्तर के लेखकों ओम पीयूष और ज्ञानेंद्र पांडेय द्वारा विभिन पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित संस्मरणों और लेखों के अद्भुत संकलन वाली पुस्तक का विमोचन मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया। राधाकृष्णन इंटर कॉलेज की छात्राओं श्रद्धा और साक्षी ने वाणी वंदना और स्वागत गान की सरस प्रस्तुति दी। पूर्व प्राचार्य डॉ राम नरेश ने अपने अनूठे संचालन में सलिल जी के जीवन वृत्त पर अपने उद्गार रखते हुए कहा कि वे हमारे जनपद ही नहीं बल्कि पूरे देश की विरासत हैं। पुस्तकालयाध्यक्षा सुरभि श्रीवास्तव ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में वरेण्य साहित्यिक मनीषी आयोजन के साक्षी बने।