Hindi Shree - हिंदी श्री

Hindi Shree - हिंदी श्री हिंदी हैं हम, वतन है हिंदोस्ताँ हमारा..
साहित्य, संस्कृति और कला
करते हैं सबका भला सदा

हिंदी श्री एक ऐसा मंच है जहाँ कवि, कवयित्री, गायक व लोकगायक अपनी लाइव प्रस्तुति देते हैं। यहां कवि सम्मलेन या किसी अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का वीडियो भी अपलोड किया जाता है। ऑनलाइन कवि सम्मलेन व ऑनलाइन कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते हैं।

संस्थापक-
कुमारी सृष्टि राज
ईमेल- [email protected]
वेब साइट- www.hindishree.xyz

राष्ट्रीय भोजपुरी संस्थान द्वारा गोपालगंज, बिहार में आयोजित छठवें भोजपुरी अधिवेशन में हिंदी श्री पब्लिकेशन की स्टाल...
28/03/2026

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23/03/2026

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This book is a personal memoir that shares the author's lived experiences, observations, and reflections related to diabetes, ealth, lifestyle, and wellness. It is intended solely for informational and educational purposes and does not provide medical, nutritional, or therapeutic advice. The auth...

हिंदी श्री पब्लिकेशन से प्रकाशित 'कही-अनकही’ की गूँज: साहित्यिक गरिमा के बीच डॉ. नीरज त्रिपाठी के काव्य-संग्रह का भव्य व...
17/03/2026

हिंदी श्री पब्लिकेशन से प्रकाशित 'कही-अनकही’ की गूँज: साहित्यिक गरिमा के बीच डॉ. नीरज त्रिपाठी के काव्य-संग्रह का भव्य विमोचन

साहित्य चेतना समाज मीरजापुर इकाई और विन्ध्यवासिनी महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक कार्यक्रम में डॉक्टर नीरज त्रिपाठी कृत "कही-अनकही" पुस्तक का विमोचन मुख्य अतिथि माँ विन्ध्यवासिनी विश्वविद्यालय की प्रथम कुलपति
प्रो. शोभा गौड़ और अध्यक्षता कर रहे डॉ० राकेशधर त्रिपाठी (पूर्व मंत्री उच्च शिक्षा, उत्तर प्रदेश सरकार) के कर कमलों द्वारा हुआ। वरिष्ठ पत्रकार व आध्यात्मिक लेखक सलिल पाण्डेय, साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी, विन्ध्यवासिनी महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ पंकज त्रिपाठी और उक्त पुस्तक के लेखक डॉ नीरज त्रिपाठी मंचासीन रहे।

कार्यक्रम का आरम्भ मुख्य अतिथि द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित कर किया गया। ततपश्चात विन्ध्यवासिनी महाविद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया। कही-अनकही पुस्तक के विमोचन के उपरांत अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि प्रो. शोभा गौड़ ने कहा कि डॉ नीरज त्रिपाठी की कृति "कही-अनकही" की प्रत्येक रचना अपने आप में बेमिसाल है और दिल को छू लेने वाली हैं। उन्होंने इस अवसर पर डॉ त्रिपाठी को ऐसे और काव्य संग्रह लिखने के लिए प्रेरित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि कवि अपने अनुभव, अपनी चिंता, अपने विचार कविताओं के माध्यम से व्यक्त करके समाज का मार्गदर्शन करते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ राकेशधर त्रिपाठी ने कहा कि डॉ नीरज त्रिपाठी ने अपनी चिकित्सकीय सेवा के साथ साथ कविता लेखन का उपयोगी और महत्वपूर्ण कार्य किया है। उनकी ये कविताएं समाज को एक दिशा दिखाने का कार्य करेंगी।

कार्यक्रम का कुशल संचालन आनंद अमित द्वारा व धन्यवाद ज्ञापन विन्ध्यवासिनी महाविद्यालय के प्राचार्य प्रवीण कुमार सेठी द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में जनपद के प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों में चिकित्सक एस एन पाठक, प्रोफेसर रमेश चन्द ओझा, राजपति ओझा, विन्ध्यवासिनी प्रसाद केसरवानी "विप्रक", लल्लू तिवारी, केदार नाथ सविता, विजय श्रीवास्तव, डॉ अनिल पांडेय, अनिल यादव, डॉ ध्रुव जी पांडेय, निभा त्रिपाठी, कविता त्रिपाठी,अनु, इला,आदि उपस्थित रहे।
(आभार सहित)

आज रात 8 बजे देखिएलिंक कमेंट में है
20/02/2026

आज रात 8 बजे देखिए

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डॉ भूपेंद्र कुमार सुल्लेरे कृत लोकमाता अहिल्या - इतिहास की महानतम नायिकाअब अमेजन पर उपलब्ध है।यह पुस्तक अहिल्याबाई को कि...
09/02/2026

डॉ भूपेंद्र कुमार सुल्लेरे कृत लोकमाता अहिल्या - इतिहास की महानतम नायिका

अब अमेजन पर उपलब्ध है।

यह पुस्तक अहिल्याबाई को किसी एक खांचे केवल 'धार्मिक', केवल 'प्रशासक' या केवल 'नारी' में सीमित नहीं करती। यहाँ वे लोकमाता के रूप में उपस्थित हैं-ऐसी माता, जो प्रजा की पीड़ा को अपनी पीड़ा मानती है; ऐसी शासिका, जो दंड से पहले न्याय और प्रतिशोध से पहले समाधान को चुनती है और ऐसी साधिका, जिसके लिए धर्म कर्मकांड नहीं, बल्कि लोकहित का साधन है। आज के समय में, जब शासन और समाज दोनों ही नैतिक संकटों से जूझ रहे हैं, अहिल्याबाई का जीवन एक दर्शन प्रस्तुत करता है। उनका शासन मॉडल हमें बताता है कि सुशासन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि चरित्र से जन्म लेता है। यह पुस्तक उसी चरित्र, उसी दृष्टि और उसी आदर्श को पाठकों तक पहुँचाने का एक विनम्र प्रयास है। यह कृति इतिहास के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, नीति-निर्माताओं, नारी अध्ययन से जुड़े पाठकों और सामान्य जन-सभी के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। यदि यह पुस्तक पाठक के मन में अहिल्याबाई के प्रति श्रद्धा के साथ-साथ अपने समय और समाज के प्रति दायित्वबोध भी जाग्रत कर सके, तो लेखक का यह श्रम सार्थक होगा।

Lokmata Ahilya Itihas Ki Mahantam Nayika

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