24/07/2026
लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे बड़ा सुख यही है कि इसमें प्रत्येक व्यक्ति को लगता है कि वह महत्वपूर्ण है। कोई भी योगदान व्यक्ति की प्रकृति व समय के ऊपर निर्भर करता है। यदि कोई समाज में प्रतिष्ठित है और धन संपन्न भी है,तो यह भी निश्चित है कि उसका समय भी उतना ही कीमती है। वह धन के दान से इस आपूर्ति को पूरी कर सकता है, किसी के पास धन नहीं है पर वह अपना कीमती समय देकर किसी कार्य के लिए अपना योगदान दे सकता है, किसी के पास विचारों का ऐसा तालमेल है कि वह उनके सामने रखने से सुनहरी प्रगति के लिए अपना हाथ बढ़ा सकता है।
सर्वोपरि है कि व्यक्ति किसी भी तरह से हो सही कार्य के लिए आगे बढ़े।
यह सोच की आपका समय बड़ी मौज में निकल रहा है और आप नयेपन से दूरी बनाने में समर्थ हैं। तो यह जान लें कि आपकी कीमत तभी तक है जब तक चीजों के लिए उत्तरदायित्व है जगह बदलते ही आप शून्य पर पहुंच जाएंगे और किसी तरह की चर्चा या सम्मान के लिए आपका नाम कोई नहीं लेने वाला।