16/03/2026
कोई कायर ही होगा जो #जयहिंद नहीं लिखेगा
देश सेवा में शहीद हुए सूबेदार अवनीश यादव को नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई।
बेवर से गांव तक निकली श्रद्धांजलि यात्रा में उमड़ा जनसैलाब*
मैनपुरी/विकासखंड बेवर क्षेत्र के ग्राम अहमदपुर करुआमई नगरिया निवासी सेना के जवान सूबेदार अवनीश उर्फ अविनाश यादव देश सेवा करते हुए तैनाती स्थल पर शहीद हो गए। उनके शहीद होने की खबर मिलते ही पैतृक गांव समेत पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और अंतिम दर्शन के लिए लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम अहमदपुर करुआमई निवासी सूबेदार अवनीश उर्फ अविनाश यादव (43 वर्ष) पुत्र गिरीश चंद्र यादव भारतीय सेना में तैनात थे और वर्तमान में लेह में अपनी सेवाएं दे रहे थे। परिजनों के अनुसार 13 मार्च की रात करीब 11 बजे उन्हें अचानक हार्ट अटैक आया, जिसके बाद उनकी मृत्यु की सूचना परिवार को दी गई। यह खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
रविवार 15 मार्च को शहीद सूबेदार अविनाश यादव का पार्थिव शरीर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव अहमदपुर करुआमई लाया गया। जैसे ही पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, अंतिम दर्शन के लिए क्षेत्र के हजारों लोग उमड़ पड़े।
बेवर से उनके गांव तक निकली श्रद्धांजलि यात्रा में भारी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान लोग “अविनाश यादव अमर रहें” और “भारत माता की जय” के नारों के साथ नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दे रहे थे।
पिता और बड़े भाई भी रह चुके हैं सेना में
शहीद अविनाश यादव के पिता गिरीश चंद्र यादव भी भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। वहीं उनके बड़े भाई आलोक कुमार यादव भी कुछ माह पूर्व सेना से सेवानिवृत्त हुए हैं। परिवार वर्तमान में झांसी में निवास करता है।
शहीद अविनाश अपने पीछे पत्नी साधना देवी, 21 वर्षीय पुत्री कशिश जो झांसी से बीएएमएस और 16 वर्षीय पुत्र कृष्णा जिसने इस वर्ष इंटर की परीक्षा दी है,को छोड़ गए हैं। इनका परिवार जयपुर में निवासरत है। उनके निधन से परिवार सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
शुरुआत से ही पढ़ने में अव्वल रहे अविनाश
शहीद अविनाश का पार्थिक शरीर जब गांव आया तो हर किसी की आंख नम थी।परिजनों ने जानकारी देते हुए बताया कि अविनाश की प्रारंभिक शिक्षा आर्मी स्कूल सिकंदराबाद,कक्षा छह से दस तक केंद्रीय विद्यालय पठानकोट और 12वीं की परीक्षा केंद्रीय विद्यालय हिसार में दी।18वर्ष की आयु में उनकी नियुक्ति सेना के तोपखाना में हो गई।वर्तमान में वे सेना में सूबेदार के पद पर लेह लद्दाख में तैनात थे।