30/09/2024
* पंजाब प्रदेश के सतत् स्वाध्यायशील व्यक्तित्वों में डॉ. राजेन्द्र टोकी की गणना सम्मानपूर्वक की जाती है। रचना, आलोचना, अनुवाद, अनुसन्धान, सम्पादन आदि उनके व्यक्तित्व के कई पहलू हैं।
* गत समय में उन्होंने "ओउम् जय जगदीश हरे" आरती के रचयिता श्रद्धाराम फिल्लौरी पर गम्भीर अनुसन्धानपरक कार्य किया है। लुधियाना शहर के सीमान्त पर बसे 'फिल्लौर' कस्बे में रहने वाले श्रद्धाराम फिल्लौरी की हिन्दी, संस्कृत, उर्दू और पंजाबी की अनुपलब्ध रचनाओं के अन्वेषण के पश्चात् किया गया यह कार्य निश्चित ही श्रमसाध्य एवं महत्वपूर्ण है।
* ध्यान रहे, सन् 1966 ई. में डॉ. सरन दास भनोट द्वारा श्रद्धाराम फिल्लौरी पर किए गए कार्य के पश्चात् डॉ. टोकी का यह एक 'प्रामाणिक' कार्य है। इसकी महत्ता को देखते हुए भारतीय साहित्य अकादेमी ने डॉ. टोकी की पुस्तक को साग्रह प्रकाशित किया है।
* उपर्युक्त पुस्तक में फिल्लौरी के व्यक्तित्व, काव्य, गद्य व विभिन्न उपलब्धियों से इतर, उनकी रचनाओं की प्रामाणिक सूची भी जुटाई गई है। विशेषत: श्रद्धाराम फिल्लौरी के उपन्यास 'भाग्यवती' पर लगभग 15 पृष्ठों का शोधपरक लेख भी पठनीय है।
भारतीय साहित्य अकादेमी के लिए लिखी पुस्तक के निमित्त राजेन्द्र टोकी के प्रति शुभकामनाओं सहित. . .
पुस्तक : भारतीय साहित्य के निर्माता "श्रद्धाराम फिल्लौरी"
लेखक : राजेन्द्र टोकी
प्रकाशक : साहित्य अकादेमी, न. दिल्ली
मूल्य : 50/- (पेपरबैक)
सौजन्य : बलवेन्द्र सिंह