23/10/2024
अलार्म बजते ही मेरी नींद खुल गई|ठीक पांच बजकर एक मिनट हुए थे| मैं एैसे ही अलार्म सेट करता हूँ कि नींद भी पूरी हो जाए और ये तसल्ली भी रहे कि सुबह हो चुकी है| साइट पर समय से पहुँचने के लिए सुबह की पहली ट्रेन पकड़ना सही रहता है|स्टेशन पर टिकट की लाइन में अधिक भीड़ नही थी | रेलवे के एप पर मैंने चेक कर लिया था कि ट्रेन में सबसे आगे स्लीपर कोच फिर एसी बोगियों की कतार और सबसे पीछे जनरल के डिब्बे लगेंगे | मैंने जनरल का टिकट लिया और प्लेटफॉर्म के पिछले हिस्से की ओर बढ़ चला| यूँ तो मैंने ना जाने कितनी बार जनरल डिब्बे में सफ़र किया है |पढ़ाई के दौरान,विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के समय य़ा किसी अन्य कार्य के लिए जाते समय जब परिवार साथ ना हो तो ना चाहते हुए भी यही तरीका सबसे मुफीद रहता है एक तो इसमे टिकट आसानी से मिल जाता है और दूसरा ये सबसे कम खर्चीला भी होता है|ट्रेन आ गयी है और स्टेशन पर खड़ी हो रही है| मैं तेज कदमों से पीछे के डिब्बों की ओर बढ़ता हूँ|खिड़की से झांक कर देखता हूँ कोई सीट खाली दिख जाये | डिब्बों में लोग ही लोग दिखते हैं | मैं कोशिश करके एक बोगी में चढ़ जाता हूँ| घुसते ही एक तीखी गंध मेरे नथुनों में समा ज़ाती है |जो लोग आम तौर पर ऐसी यात्रा करते हैं वो इस तरह की गंध से परचित होते हैं|मुझे घुटन जैसी महसूस होती है|सोचता हूँ यहाँ तो सरवाइव कर पाना मुश्किल है चल कर किसी स्लीपर या ऐसी कोच में देखता हूँ| टीटी से बात कर लूंगा जो होगा समझ लूंगा| मैं नीचे उतर जाता हूँ|धीमे कदमों से आगे की ओर चलता हूँ| पर अब लगता है कोई और भी मेरे साथ चल रहा है जो कह रहा है कि वहाँ भी सीट ना मिली तो ! पैसे ज्यादा देने पड़े तो ! कुछ घंटो का तो सफ़र है अगले स्टेशन पर लोग तो उतरेगें |सीट खाली हो जायेगी| और लोग भी तो चलते हैं | गंध तो कुछ देर लगती है फिर सब अड़जस्ट हो जाता है| फालतू का रिस्क क्यूँ लेना ? ट्रेन अब रेंग रही है| मेरे कदमों की गति मध्यम हो जाती है| मैं पीछे मुड़ता हूँ| जनरल के डिब्बे मेरी ओर आ रहे हैं| मैंने अपने कदम वापस खींच लिए हैं और अब मैं तैयार हूँ एक और रिस्क फ्री य़ात्रा के लिए..