12/12/2021
"विचार लो कि मर्त्य हो, न मृत्यु से डरो कभी
मरो परन्तु यों मरो कि, याद जो करे सभी
हुई न यों सुमृत्यु तो ,वृथा मरे¸ वृथा जिये
नहीं वहीं कि, जो जिया न आपके लिए
यही पशु–प्रवृत्ति है कि , आप आप ही चरे
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।"
अपनी कलम से राष्ट्रवाद की अलख जगाने वाले राष्ट्रवादी कवि श्री मैथिलीशरण जी के निर्वाण दिवस पर शत शत नमन 💐🙏