31/05/2026
भाजपा याद रखे कि जिस हिंसक राजनीति को वह पाल-पोस रही है, वही एक दिन लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकती है। राजनीतिक विरोध का जवाब तर्क और जनसमर्थन से दिया जाता है, हिंसा और हमलों से नहीं। वयोवृद्ध तृणमूल सांसद Kalyan Banerjee पर हुआ जानलेवा हमला बेहद निंदनीय और चिंताजनक है। किसी जनप्रतिनिधि पर हमला लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता की आवाज पर हमला माना जाना चाहिए।
लगातार बढ़ती राजनीतिक हिंसा यह संकेत देती है कि असहमति को दबाने की प्रवृत्ति मजबूत हो रही है, जो किसी भी लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि राजनीतिक मतभेद सड़कों पर हिंसा का रूप लेने लगें, तो लोकतंत्र कमजोर होता है और कानून के राज पर सवाल खड़े होते हैं।
लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को इस गंभीर घटना का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो ताकि यह स्पष्ट संदेश जाए कि लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। राजनीतिक दलों को भी अपने कार्यकर्ताओं को संयम, संवाद और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पाठ पढ़ाना चाहिए। लोकतंत्र बहस से मजबूत होता है, हिंसा से नहीं।