07/03/2026
:डिग्रीधर की चेतावनी:
वर्षों तक फारेन घूम-घूम,
नेता-नेतनी को चूम-चूम,
खा मशरूम, वाइन भर-भर,
खूब निखर गए डिग्रीधर।
एपस्टीन फाइल दबाने को,
गौतम की जाँच रुकाने को,
डोनाल्ड को समझाने को,
दयावान कैपिटल हिल आये,
माई-बाप के सम्मुख गाए।
कर दो थोड़ा सा टैरिफ कम,
पर इसमें भी फटती हो Bum,
कर जाओ हमारे खेत लील,
दे दो कम से कम ट्रेड डील।
हम वहीं खुशी से खायेंगे,
अब्बा पर असि न उठायेंगे!
वह भी दे न सका ट्रम्पेश,
लहरा कर अपने धवल केश,
फेंका पैरों पर घुँघरू दल,
बोला— “चल, नाच जरा छलछल!”
जब मौज ट्रम्प पर छाता है,
भरपूर डांस करवाता है।
डिग्रीधर ने चीत्कार किया,
ट्रम्पेश्वर ने उपकार किया,
डगमग-डगमग घुँघरू खोले,
पैरों में डाल, छमछम डोले।
यह देख, गगन मुझमें लय है,
यह देख, पवन मुझमें लय है,
मुझमें विलीन झंकार सकल,
मुझमें लय है संसार सकल।
नाच देखने आया है?
क्या घुँघरू स्वर्ण के लाया है?
यदि मुझे बाँधना चाहे मन,
पहले तो साध मेरा गौतम।
चल, फाड़ मेरी फाइल झटपट,
अरे छोड़ मेरा आँचल, हलकट!
यहाँ डूबती नाव को खेता हूँ,
जंघा फैलाकर लेटा हूँ।
रण नहीं, अब नर्तन होगा,
मनोरंजन भीषण होगा,
पग के घुँघरू टूटेंगे,
रुबियो- वांस सुख लूटेंगे।
आखिर तू स्माइल देगा,
परमिशन फॉर ऑइल देगा।
था विश्व सन्न, सब लोग डरे,
चुप थे या थे बेहोश पड़े।
केवल दो नर न अघाते थे,
बेंजामिन-ट्रम्प सुख पाते थे।
मदमस्त खड़े, प्रमुदित, निर्भय,
दोनों पुकारते थे— “अए हये!”
दोनों पुकारते थे— “अए हये!”