02/03/2026
“कर्मों की गति पर अवश्य विचार करें…”
यह संसार कर्मप्रधान है।
आज जीव, जीव का भक्षण कर रहा है —
ऐसे समय में हमें अपने प्रत्येक कर्म को सोच-समझकर करना चाहिए।
क्योंकि कर्म ही हमारे भविष्य का निर्माण करते हैं,
कर्म ही सुख-दुःख का कारण बनते हैं,
और कर्मों का फल अवश्य मिलता है।
इसलिए हर कदम सजग होकर बढ़ाएँ,
अधर्म से बचें,
और ऐसे कर्म करें जिनसे मानवता, दया और धर्म की प्रतिष्ठा बढ़े।
कर्मों से डरें नहीं,
बल्कि बुरे कर्म करने से डरें।
@527🙏🏻💐