ʜᴀʀꜱʜ ᴘᴀɴᴅᴇʏ

ʜᴀʀꜱʜ ᴘᴀɴᴅᴇʏ मैंने संभावनाएं ढूंढी है शून्य में भी ,
नकारात्मकता से कोई वास्ता नहीं मेरा !

राधे राधे 💞
ʜᴀʀꜱʜ ᴘᴀɴᴅᴇʏ___🔥

श्री हनुमानजी की बढ़ती पूंछ पर घी तेल वस्त्र लपेटते हुए राक्षस ढोल नगाड़े की आवाज कर रहे हैं और तालियां बजा बजा कर खुशी जत...
31/05/2026

श्री हनुमानजी की बढ़ती पूंछ पर घी तेल वस्त्र लपेटते हुए राक्षस ढोल नगाड़े की आवाज कर रहे हैं और तालियां बजा बजा कर खुशी जता रहे हैं । हनुमानजी की पूंछ इतनी लंबी हो गयी कि पूरी लंका नगरी में फैल गयी । जैसे ही राक्षसों ने श्री हनुमानजी की पूंछ में अग्नि लगाई वैसे ही तुरन्त श्री हनुमानजी ने एकदम छोटा सा रूप धारण कर लिया और आगे की रणनीति सोचने लगे । *आज ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा है ।।राम राम जी।।*

कुछ रास्ते आपको अकेले हीतय करने पड़ते हैं...ना परिवार, ना मित्रऔर ना कोई साथी,बस आप और भगवान !!!
10/05/2026

कुछ रास्ते आपको अकेले ही
तय करने पड़ते हैं...
ना परिवार, ना मित्र
और ना कोई साथी,
बस आप और भगवान !!!

🙏🌹*Jai Shree Mahakal*🌹🙏*श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का भस्म आरती शृंगार दर्शन**08-05-2026 कण-कण में महादेव*
08/05/2026

🙏🌹*Jai Shree Mahakal*🌹🙏
*श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का भस्म आरती शृंगार दर्शन*
*08-05-2026 कण-कण में महादेव*

आज का पंचांग दिनांक 28/04/2026 दिन मंगलवार जय बजरंगबली 🙏🚩🙏
28/04/2026

आज का पंचांग दिनांक 28/04/2026 दिन मंगलवार जय बजरंगबली 🙏🚩🙏

🔱 महाकाल की नगरी… जहां समय भी झुकता है 🔱उज्जैन का वो दरबार…जहां काल भी महाकाल के आगे हार जाता है!सोमवार की ये पावन सुबह…...
13/04/2026

🔱 महाकाल की नगरी… जहां समय भी झुकता है 🔱

उज्जैन का वो दरबार…
जहां काल भी महाकाल के आगे हार जाता है!

सोमवार की ये पावन सुबह…
सिर्फ दर्शन नहीं…
आस्था का अनुभव है 🙏

यहां हर सांस में शिव हैं…
हर धड़कन में “ॐ” गूंजता है 💥

जो भी सच्चे मन से आए…
महाकाल उसकी झोली खाली नहीं छोड़ते

डर खत्म… संकट दूर…
बस रह जाता है शिव का आशीर्वाद ❤️

हर हर महादेव! 🔱

🙏🙏✨✨🌹🌹मेरा सर्वेश्वर - मेरा श्याम 🌹🌹🙏🙏✨ "खाटूश्याम जी" से भव्य अलौकिक " श्रृंगार दर्शन"🌹🌹🙏🙏✨✨🙏🙏✨✨🌹🌹हारे का सहारा बाबा श्...
08/04/2026

🙏🙏✨✨🌹🌹मेरा सर्वेश्वर - मेरा श्याम 🌹🌹🙏🙏✨ "खाटूश्याम जी" से भव्य अलौकिक " श्रृंगार दर्शन"🌹🌹🙏🙏✨✨
🙏🙏✨✨🌹🌹हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा🌹🌹🙏🙏✨✨
🙏🙏✨✨🌹🌹जय श्री श्याम जी🌹🌹🙏🙏✨✨

*नवरात्रि पूजन विधि* 🌷➡ *19 मार्च 2026 गुरुवार से चैत्री-वासंती नवरात्रि प्रारंभ ।*🙏🏻 *नवरात्रि के प्रत्येक दिन माँ भगवत...
18/03/2026

*नवरात्रि पूजन विधि* 🌷
➡ *19 मार्च 2026 गुरुवार से चैत्री-वासंती नवरात्रि प्रारंभ ।*
🙏🏻 *नवरात्रि के प्रत्येक दिन माँ भगवती के एक स्वरुप श्री शैलपुत्री, श्री ब्रह्मचारिणी, श्री चंद्रघंटा, श्री कुष्मांडा, श्री स्कंदमाता, श्री कात्यायनी, श्री कालरात्रि, श्री महागौरी, श्री सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। यह क्रम चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को प्रातःकाल शुरू होता है। प्रतिदिन जल्दी स्नान करके माँ भगवती का ध्यान तथा पूजन करना चाहिए। सर्वप्रथम कलश स्थापना की जाती है।*
➡ *कलश / घट स्थापना विधि*
🌷 *घट स्थापना शुभ मुहूर्त 19 मार्च*
🙏🏻 *देवी पुराण के अनुसार मां भगवती की पूजा-अर्चना करते समय सर्वप्रथम कलश / घट की स्थापना की जाती है। घट स्थापना करना अर्थात नवरात्रि की कालावधि में ब्रह्मांड में कार्यरत शक्ति तत्त्व का घट में आवाहन कर उसे कार्यरत करना । कार्यरत शक्ति तत्त्व के कारण वास्तु में विद्यमान कष्टदायक तरंगें समूल नष्ट हो जाती है। धर्मशास्त्रों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश के मुख में विष्णुजी का निवास, कंठ में रुद्र तथा मूल में ब्रह्मा स्थित हैं और कलश के मध्य में दैवीय मातृशक्तियां निवास करती हैं।*
🌷 *सामग्री:*
👉🏻 *जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र*
👉🏻 *जौ बोने के लिए शुद्ध साफ़ की हुई मिटटी*
👉🏻 *पात्र में बोने के लिए जौ*
👉🏻 *घट स्थापना के लिए मिट्टी का कलश (“हैमो वा राजतस्ताम्रो मृण्मयो वापि ह्यव्रणः” अर्थात 'कलश' सोने, चांदी, तांबे या मिट्टी का छेद रहित और सुदृढ़ उत्तम माना गया है । वह मंगल कार्यों में होता है )*
👉🏻 *कलश में भरने के लिए शुद्ध जल, गंगाजल*
👉🏻 *मौली*
👉🏻 *इत्र*
👉🏻 *साबुत सुपारी*
👉🏻 *दूर्वा*
👉🏻 *कलश में रखने के लिए कुछ सिक्के*
👉🏻 *पंचरत्न*
👉🏻 *अशोक या आम के 5 पत्ते*
👉🏻 *कलश ढकने के लिए ढक्कन*
👉🏻 *ढक्कन में रखने के लिए बिना टूटे चावल*
👉🏻 *पानी वाला नारियल*
👉🏻 *नारियल पर लपेटने के लिए लाल कपडा*
👉🏻 *फूल माला*
🌷 *विधि*
🙏🏻 *सबसे पहले जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र लें। इस पात्र में मिट्टी की एक परत बिछाएं। अब एक परत जौ की बिछाएं। इसके ऊपर फिर मिट्टी की एक परत बिछाएं। अब फिर एक परत जौ की बिछाएं। जौ के बीच चारों तरफ बिछाएं ताकि जौ कलश के नीचे न दबे। इसके ऊपर फिर मिट्टी की एक परत बिछाएं। अब कलश के कंठ पर मौली बाँध दें। कलश के ऊपर रोली से ॐ और स्वास्तिक लिखें। अब कलश में शुद्ध जल, गंगाजल कंठ तक भर दें। कलश में साबुत सुपारी, दूर्वा, फूल डालें। कलश में थोडा सा इत्र डाल दें। कलश में पंचरत्न डालें। कलश में कुछ सिक्के रख दें। कलश में अशोक या आम के पांच पत्ते रख दें। अब कलश का मुख ढक्कन से बंद कर दें। ढक्कन में चावल भर दें। श्रीमद्देवीभागवत पुराण के अनुसार “पञ्चपल्लवसंयुक्तं वेदमन्त्रैः सुसंस्कृतम्। सुतीर्थजलसम्पूर्णं हेमरत्नैः समन्वितम्॥” अर्थात कलश पंचपल्लवयुक्त, वैदिक मन्त्रों से भली भाँति संस्कृत, उत्तम तीर्थ के जल से पूर्ण और सुवर्ण तथा पंचरत्न मई होना चाहिए।*
🙏🏻 *नारियल पर लाल कपडा लपेट कर मौली लपेट दें। अब नारियल को कलश पर रखें। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है: “अधोमुखं शत्रु विवर्धनाय,ऊर्ध्वस्य वस्त्रं बहुरोग वृध्यै। प्राचीमुखं वित विनाशनाय, तस्तमात् शुभं संमुख्यं नारीकेलं”। अर्थात् नारियल का मुख नीचे की तरफ रखने से शत्रु में वृद्धि होती है।नारियल का मुख ऊपर की तरफ रखने से रोग बढ़ते हैं, जबकि पूर्व की तरफ नारियल का मुख रखने से धन का विनाश होता है। इसलिए नारियल की स्थापना सदैव इस प्रकार करनी चाहिए कि उसका मुख साधक की तरफ रहे। ध्यान रहे कि नारियल का मुख उस सिरे पर होता है, जिस तरफ से वह पेड़ की टहनी से जुड़ा होता है।*
🙏🏻 *अब कलश को उठाकर जौ के पात्र में बीचो बीच रख दें। अब कलश में सभी देवी देवताओं का आवाहन करें। "हे सभी देवी देवता और माँ दुर्गा आप सभी नौ दिनों के लिए इसमें पधारें।" अब दीपक जलाकर कलश का पूजन करें। धूपबत्ती कलश को दिखाएं। कलश को माला अर्पित करें। कलश को फल मिठाई अर्पित करें। कलश को इत्र समर्पित करें।*
🌷 *कलश स्थापना के बाद माँ दुर्गा की चौकी स्थापित की जाती है।*
🙏🏻 *नवरात्रि के प्रथम दिन एक लकड़ी की चौकी की स्थापना करनी चाहिए। इसको गंगाजल से पवित्र करके इसके ऊपर सुन्दर लाल वस्त्र बिछाना चाहिए। इसको कलश के दायीं ओर रखना चाहिए। उसके बाद माँ भगवती की धातु की मूर्ति अथवा नवदुर्गा का फ्रेम किया हुआ फोटो स्थापित करना चाहिए। मूर्ति के अभाव में नवार्णमन्त्र युक्त यन्त्र को स्थापित करें। माँ दुर्गा को लाल चुनरी उड़ानी चाहिए। माँ दुर्गा से प्रार्थना करें "हे माँ दुर्गा आप नौ दिन के लिए इस चौकी में विराजिये।" उसके बाद सबसे पहले माँ को दीपक दिखाइए। उसके बाद धूप, फूलमाला, इत्र समर्पित करें। फल, मिठाई अर्पित करें।*
🙏🏻 *नवरात्रि में नौ दिन मां भगवती का व्रत रखने का तथा प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करने का विशेष महत्व है। हर एक मनोकामना पूरी हो जाती है। सभी कष्टों से छुटकारा दिलाता है।*
🙏🏻 *नवरात्रि के प्रथम दिन ही अखंड ज्योत जलाई जाती है जो नौ दिन तक जलती रहती है। दीपक के नीचे "चावल" रखने से माँ लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है तथा "सप्तधान्य" रखने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते है*
🙏🏻 *माता की पूजा "लाल रंग के कम्बल" के आसन पर बैठकर करना उत्तम माना गया है*
🙏🏻 *नवरात्रि के प्रतिदिन माता रानी को फूलों का हार चढ़ाना चाहिए। प्रतिदिन घी का दीपक (माता के पूजन हेतु सोने, चाँदी, कांसे के दीपक का उपयोग उत्तम होता है) जलाकर माँ भगवती को मिष्ठान का भोग लगाना चाहिए। मान भगवती को इत्र/अत्तर विशेष प्रिय है।*
🙏🏻 *नवरात्रि के प्रतिदिन कंडे की धुनी जलाकर उसमें घी, हवन सामग्री, बताशा, लौंग का जोड़ा, पान, सुपारी, कर्पूर, गूगल, इलायची, किसमिस, कमलगट्टा जरूर अर्पित करना चाहिए।*
🙏🏻 *लक्ष्मी प्राप्ति के लिए नवरात्रि में पान और गुलाब की ७ पंखुरियां रखें तथा मां भगवती को अर्पित कर दें*
🙏🏻 *मां दुर्गा को प्रतिदिन विशेष भोग लगाया जाता है। किस दिन किस चीज़ का भोग लगाना है ये हम विस्तार में आगे बताएँगे।*
🙏🏻 *प्रतिदिन कन्याओं का विशेष पूजन किया जाता है। श्रीमद्देवीभागवत पुराण के अनुसार “एकैकां पूजयेत् कन्यामेकवृद्ध्या तथैव च। द्विगुणं त्रिगुणं वापि प्रत्येकं नवकन्तु वा॥” अर्थात नित्य ही एक कुमारी का पूजन करें अथवा प्रतिदिन एक-एक-कुमारी की संख्या के वृद्धिक्रम से पूजन करें अथवा प्रतिदिन दुगुने-तिगुने के वृद्धिक्रम से और या तो प्रत्येक दिन नौ कुमारी कन्याओं का पूजन करें।*
🙏🏻 *यदि कोई व्यक्ति नवरात्रि पर्यन्त प्रतिदिन पूजा करने में असमर्थ हैं तो उसे अष्टमी तिथि को विशेष रूप से अवश्य पूजा करनी चाहिए। प्राचीन काल में दक्ष के यज्ञ का विध्वंश करने वाली महाभयानक भगवती भद्रकाली करोडो योगिनियों सहित अष्टमी तिथि को ही प्रकट हुई थीं।*

हर्ष वर्धन पाण्डेय ........... 🙏🏻🚩

लघु विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र💫21 दिनों में बदल देगा जीवन - सिद्ध प्रयोगएक ऐसा अद्भुत और शक्तिशाली स्तोत्र जो विष्णु पुरा...
01/03/2026

लघु विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र

💫21 दिनों में बदल देगा जीवन - सिद्ध प्रयोग

एक ऐसा अद्भुत और शक्तिशाली स्तोत्र जो विष्णु पुराण में वर्णित है। यह है लघु विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र - जो 1000 नामों का संक्षिप्त लेकिन अत्यंत प्रभावशाली रूप है। जो लोग विष्णु सहस्त्रनाम जैसी कठिन साधना नहीं कर सकते, उनके लिए यह स्तोत्र वरदान है। नियमित पाठ से विष्णु सहस्त्रनाम के बराबर फल की प्राप्ति होती है।
🌹इस स्तोत्र के अद्भुत लाभ:🌹
ग्रह शांति - सभी नवग्रह शांत होते हैं। कुंडली के सभी दोष दूर होते हैं। मंगल, शनि, राहु-केतु के दुष्प्रभाव समाप्त होते हैं।
शीघ्र विवाह - विवाह में आ रही सभी बाधाएं दूर होती हैं। अच्छे वर/वधू की प्राप्ति होती है। विवाह के योग बनते हैं।
दिव्य तेज - चेहरे पर दिव्य कांति आती है। व्यक्तित्व में निखार आता है। आत्मविश्वास बढ़ता है।
धन समृद्धि - वैश्यों के लिए धनवृद्धि होती है। व्यापार में लाभ होता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
विजय - क्षत्रियों के लिए शत्रुओं पर विजय मिलती है। मुकदमों में सफलता मिलती है। प्रतिस्पर्धा में विजय प्राप्त होती है।
विद्या - विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवृद्धि होती है। परीक्षा में सफलता मिलती है। बुद्धि तेज होती है।
सभी भयों से मुक्ति - अग्नि भय, चोर भय, सर्प भय, राक्षस भय, रोग भय - सभी से रक्षा होती है। जैसा कि फलश्रुति में कहा गया है - "नाग्निराजभयं तस्य न चोरात् पन्नगाद्भयम्। राक्षसेभ्यो भयं नास्ति व्याधिभिर्नैव पीड्यते॥"
लक्ष्मी की प्राप्ति - जहाँ विष्णु होंगे, वहाँ लक्ष्मी स्वयं आएंगी। घर में सुख-समृद्धि का वास होगा।
शत्रु नाश - यह स्तोत्र युद्ध में शत्रुओं के विनाश के लिए अर्जुन को दिया गया था। इसके पाठ से शत्रुओं का नाश होता है।
मोक्ष की प्राप्ति - अंततः यह स्तोत्र मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। विष्णु भगवान की कृपा से जीवन सफल होता है।
🥀यह है संपूर्ण लघु विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र:🪷

॥ अथ लघु विष्णुसहस्त्रनाम स्तोत्रम् ॥

अलं नामसहस्रेण केशवोऽर्जुनमब्रवित्।

श्रुणु मे पार्थ नामानि यैश्च तुष्यामि सर्वदा॥१॥

केशवः पुण्डरीकाक्षः स्वयंभूर्मधुसूदनः।

दामोदरो हृषीकेशः पद्मनाभो जनार्दनः॥२॥

विष्वक्सेनो वासुदेवो हरिर्नारायणस्तथा।

अनंतश्च प्रबोधश्च सत्यः कृष्णः सुरोत्तमः॥३॥

आदिकर्ता वराहश्च वैकुण्ठो विष्णुरच्युतः।

श्रीधरः श्रीपतिः श्रीमान् पक्षिराजध्वजस्तथा॥४॥

एतानि मम नामानि विद्यार्थी ब्राह्मणः पठेत्।

क्षत्रियो विजयस्यार्थे वैश्यो धनसमृद्धये॥५॥

नाग्निराजभयं तस्य न चोरात् पन्नगाद्भयम्।

राक्षसेभ्यो भयं नास्ति व्याधिभिर्नैव पीड्यते॥६॥

इदं नामसहस्त्रं तु केशवेनोद्धृतं स्तवम्।

उद्धृत्य चार्जुने दत्तं युद्धे शत्रुविनाशनम्॥७॥

॥ इति श्री विष्णुपुराणे लघु विष्णुसहस्त्रनामस्तवः ॥

🪷 स्तोत्र का सरल अर्थ:🪷

श्लोक 1: केशव (भगवान श्रीकृष्ण) ने अर्जुन से कहा - हे पार्थ! हजारों नामों की आवश्यकता नहीं। मेरे उन नामों को सुनो जिनसे मैं सदा प्रसन्न होता हूँ।

श्लोक 2-4: इन श्लोकों में भगवान के 28 प्रमुख नामों का वर्णन है - केशव, पुण्डरीकाक्ष, स्वयंभू, मधुसूदन, दामोदर, हृषीकेश, पद्मनाभ, जनार्दन, विष्वक्सेन, वासुदेव, हरि, नारायण, अनंत, प्रबोध, सत्य, कृष्ण, सुरोत्तम, आदिकर्ता, वराह, वैकुण्ठ, विष्णु, अच्युत, श्रीधर, श्रीपति, श्रीमान, पक्षिराजध्वज (गरुड़ध्वज)।

श्लोक 6: इसके पाठ से अग्नि का भय नहीं रहता, चोरों का भय नहीं रहता, सर्पों का भय नहीं रहता, राक्षसों का भय नहीं रहता और व्याधियों से पीड़ा नहीं होती।

श्लोक 7: यह नामसहस्त्र स्तव केशव (श्रीकृष्ण) द्वारा कहा गया है और अर्जुन को दिया गया है जो युद्ध में शत्रुओं का विनाश करने वाला है।

⚡ पूरी साधना विधि - 21 दिन का सिद्ध प्रयोग:

🥥 आवश्यक सामग्री:

✅ केले का पेड़ (या केले का पौधा)

✅ चने की दाल

✅ पीला आसन

✅ हल्दी

✅ गुड़

✅ पीले फूल

🌳 स्थान:

✅ केले के पेड़ के पास यह साधना करनी है

✅ केले के पेड़ को भगवान विष्णु का प्रतीक माने

✅ अगर केले का पेड़ न हो तो केले के पौधे को गमले में लगाकर भी कर सकते हैं

🪷 आसन और दिशा:

✅ पीला आसन बिछाएँ

✅ पीले वस्त्र पहनें (यदि संभव हो)

✅ दिशा - पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें

✅ आसन केले के पेड़ के सामने हो

⏰ समय:

✅ सुबह - सूर्योदय से पहले या सूर्योदय के समय

✅ अगर सुबह न कर पाएं तो शाम को भी कर सकते हैं

✅ लेकिन सुबह का समय सर्वोत्तम है

चरण 1: केले के पेड़ को स्नान कराएँ

· सबसे पहले केले के पेड़ को जल से स्नान कराएँ

· पेड़ की जड़ में थोड़ा जल डालें

· पेड़ पर हल्दी का तिलक लगाएँ

चरण 2: संकल्प लें

· हाथ में जल लेकर संकल्प करें

· "मैं (अपना नाम, गोत्र) ग्रह शांति, शीघ्र विवाह एवं सभी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु 21 दिनों तक 28 बार लघु विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करूंगा/करूंगी। हे विष्णु भगवान! मेरी साधना स्वीकार करें।"

चरण 3: पाठ शुरू करें

· पीले आसन पर बैठकर 28 बार इस स्तोत्र का पाठ करें

· ना ज्यादा, ना कम - ठीक 28 बार

· पाठ करते समय पूरा ध्यान केले के पेड़ और भगवान विष्णु पर रखें

चरण 4: चने की दाल अर्पित करें

· एक पाठ पूरा होने के बाद, एक चुटकी चने की दाल लें

· इस दाल को केले के पेड़ को समर्पित करें

· इसी तरह 28 पाठ पूरे होने तक 28 बार चुटकी दाल अर्पित करें

· हर पाठ के बाद एक चुटकी दाल अर्पित करना है

चरण 5: हल्दी का तिलक

· केले के पेड़ पर रोज हल्दी का तिलक लगाएँ

· पीले फूल चढ़ाएँ

चरण 6: गुड़-चना भोग

· थोड़ा सा गुड़ और चना (या चने की दाल) का भोग लगाएँ

· यह भोग केले के पेड़ को अर्पित करें

⚔️ साधना काल के नियम:

✅ ब्रह्मचर्य का पालन - 21 दिनों तक पूर्ण ब्रह्मचर्य रखें

✅ तामसिक चीजों का त्याग - मांस-मदिरा, प्याज-लहसुन का त्याग करें

✅ सात्विक भोजन - सात्विक भोजन करें

✅ मौन - हो सके तो साधना के समय मौन रहें

✅ भूमि शयन - जमीन पर सोएं (यदि संभव हो)

💫 21 दिन बाद:

✅ दान - 21 दिन की साधना पूरी होने पर सभी चने की दाल को किसी मंदिर में दान करें

✅ शिव मंदिर - शिव मंदिर में दान करना सबसे उत्तम है

✅ खीर दान - गरीबों में मीठी खीर बांटें

✅ गुड़-चना - बच्चों में गुड़-चना वितरित करें

🔥 21 दिन बाद नित्य साधना:

21 दिन की साधना पूरी होने के बाद अब आप रोज 11 बार इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।

यह नित्य साधना आपको निरंतर लाभ पहुँचाती रहेगी।

🌟 विशेष - होली के दिन:

होली के दिन कम से कम 101 बार इस स्तोत्र का पाठ करें।

इससे आपकी आस्था और प्रबल होगी और ग्रहों के दुष्प्रभाव और तेजी से दूर होंगे।

📈 जैसे-जैसे आस्था बढ़ेगी: जैसे-जैसे आपकी आस्था प्रबल होती जाएगी, वैसे-वैसे ग्रहों के दुष्प्रभाव दूर होते जाएंगे।

आपका जीवन बहुत शांतिपूर्ण तरीके से विकसित होगा।

हर क्षेत्र में सफलता मिलेगी।

दोस्तों, इस साधना को करते समय थोड़ा सा होश रखिए। देखिए कि कैसे केले का पेड़ भगवान विष्णु का प्रतीक बनकर आपकी साधना ग्रहण कर रहा है।

हर पाठ के साथ महसूस करें कि भगवान विष्णु की कृपा आप पर बरस रही है।

बस देखते रहिए। साक्षी बने रहिए। जब साक्षी भाव आएगा, तो यह साधना और भी गहरा असर दिखाएगी।

यह साधना बहुत सरल है लेकिन अत्यंत शक्तिशाली है। केले के पेड़ को भगवान विष्णु का प्रतीक मानकर की गई यह साधना निश्चित ही फलदायी होती है।

21 दिन की इस साधना के बाद आप खुद महसूस करेंगे कि ग्रह शांत हुए, विवाह के योग बने, चेहरे पर दिव्य तेज आया और जीवन में सुख-शांति का वास हुआ।

जहाँ विष्णु होंगे, वहाँ लक्ष्मी स्वयं आएंगी। यह वचन सत्य है।।

महाशिवरात्रि की **चार प्रहर पूजा विधान**  (शिवमहापुराण, कोटिरूद्रसंहिता, अध्याय 38 के अनुसार मुख्य रूप से चार प्रहरों मे...
14/02/2026

महाशिवरात्रि की **चार प्रहर पूजा विधान**
(शिवमहापुराण, कोटिरूद्रसंहिता, अध्याय 38 के अनुसार मुख्य रूप से चार प्रहरों में अलग-अलग स्नान/अभिषेक का विधान है, साथ ही सामान्य पूजा-उपचार बढ़ते क्रम में)

शिवमहापुराण (कोटिरूद्रसंहिता, अध्याय 38) के अनुसार महाशिवरात्रि की रात्रि में चार प्रहरों में चार बार अलग-अलग पूजा का विधान है। मुख्य रूप से अभिषेक (स्नान) इस प्रकार है:

**दुग्धेन प्रथमे स्नानं दध्ना चैव द्वितीयके।**
**तृतीये तु तथाऽऽज्येन चतुर्थे मधुना तथा॥**

- **प्रथम प्रहर** — दुग्ध (दूध) से ईशान मूर्ति का अभिषेक
- **द्वितीय प्रहर** — दधि (दही) से अघोर मूर्ति का अभिषेक
- **तृतीय प्रहर** — आज्य (घृत/घी) से वामदेव मूर्ति का अभिषेक
- **चतुर्थ प्रहर** — मधु (शहद) से सद्योजात मूर्ति का अभिषेक

प्रत्येक प्रहर में शिवलिंग की स्थापना/पूजा भक्ति से करें। सामान्य पूजा में जलधारा, चन्दन, अक्षत, काले तिल, पुष्प, धूप-दीप-नैवेद्य आदि अर्पित करें। प्रत्येक प्रहर में पूजा की मात्रा/उपचार बढ़ते जाते हैं।

# 1. प्रथम प्रहर की पूजा
- संध्या/रात्रि प्रारम्भ में संकल्प लें।
- भक्ति से शिवलिंग स्थापित कर जलधारा अवश्य दें।
- **108 बार** "ॐ नमः शिवाय" मंत्र जप कर जलधारा से पूजा करें।
- सुगन्धित चन्दन, अखण्डित चावल (अक्षत), काले तिल अर्पित करें।
- **कमल** तथा **कनेर** के पुष्पों से पूजन।
- शिव के **आठ नामों** से पुष्प अर्पण: भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्र, महान् (महादेव), भीम, ईशान।
- धूप, दीप, नैवेद्य (पक्वान्न) अर्पित करें।
- **श्रीफल** (नारियल) युक्त अर्घ्य दें, ताम्बूल समर्पित करें।
- नमस्कार, ध्यान, गुरु-मंत्र या **शिव पंचाक्षर मंत्र** जप।
- धेनु मुद्रा दिखाकर निर्मल जल से तर्पण।
- सामर्थ्यानुसार **5 ब्राह्मणों** को भोजन।
- पूजा फल शिव को समर्पित कर विसर्जन।

# # # 2. द्वितीय प्रहर की पूजा
- संकल्प लें।
- पूर्ववत पूजा, जलधारा दें।
- **पूर्व से दुगुनी** (अधिक) शिवार्चना करें।
- **तिल, यव (जौ)** तथा **कमल पुष्प** अर्पित करें।
- विशेष रूप से **बिल्वपत्र** से पूजन।
- **बिजौरा नींबू** युक्त अर्घ्य।
- नैवेद्य में **खीर** समर्पित करें।
- ब्राह्मण भोजन का संकल्प।

# # # 3. तृतीय प्रहर की पूजा
- पूर्ववत पूजन।
- यव के स्थान पर **गोधूम (गेहूं)** चढ़ाएं।
- **आक के पुष्प** अर्पित करें।
- विविध धूप, नानाविध दीप।
- नैवेद्य में **मालपुए** तथा अनेक प्रकार के शाक।
- **कर्पूर** से आरती।
- **अनार** युक्त अर्घ्य।
- दक्षिणा सहित ब्राह्मण भोजन का संकल्प।

# # # 4. चतुर्थ प्रहर की पूजा
- पूर्ववत समस्त विधान से पूजन।
- **उड़द, कंगुनी, मूंग, सप्तधान्य, शंखपुष्पी** तथा **बिल्वपत्र** से पूजन।
- मधुर पदार्थों से बने नैवेद्य (या **उड़द** के पक्वान्न)।
- **केले** के फल युक्त अर्घ्य (या अन्य विविध फल)।
- यथाशक्ति ब्राह्मण भोजन।
- भक्तों के साथ **गीत, वाद्य, नृत्य** से महोत्सव कर अरुणोदय तक जागरण।
- पुष्पांजलि अर्पित करें।
- ब्राह्मणों से आशीर्वाद व तिलक लें।
- शिव का आशीर्वाद लेकर विसर्जन करें।

**नोट:** प्रत्येक प्रहर में आधारभूत पूजा (जलाभिषेक, बेलपत्र, चन्दन, धूप-दीप, मंत्र जप आदि) अनिवार्य है। अभिषेक मुख्यतः दूध-दही-घी-शहद से अलग-अलग मूर्तियों को समर्पित। यह पूजा भक्ति, श्रद्धा और सामर्थ्य अनुसार करें। शिवजी प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें।

ॐ नमः शिवाय! हर हर महादेव!

आज का पंचांग दिनांक 13/02/2026 दिन शुक्रवार जय मां लक्ष्मी 🙏🚩🙏
13/02/2026

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