02/09/2026
उत्तराखंड के सम्माननीय केंद्रीय अध्यक्ष श्री सुरेंद्र कुकरेती जी की व्यक्तिगत बातचीत को काट-छाँट करके मीडिया में डलवाकर श्री सुरेंद्र कुकरेती जी के मान-सम्मान को ठेस पहुँचाने वाला आशुतोष नेगी एक निकृष्ट किस्म का व्यक्ति है।
आशुतोष नेगी पत्रकारिता के नाम पर एक ब्लैकमेलिंग-वसूली गैंग का सदस्य रहा है। उसका इतिहास लोगों पर बेवजह, बिना सबूत आरोप लगाने का रहा है। पौड़ी कोर्ट में इसके ऊपर कई मुकदमे दर्ज हैं।
इस व्यक्ति का चरित्र निकृष्ट किस्म का है और झूठे आरोप लगाना इसका धंधा है। इसने ऋषिकेश नगर निगम चुनाव में मेयर का चुनाव लड़ रहे दिनेश चंद्र मास्टर पर आरोप लगाया कि उन्होंने यूकेडी से कहा कि मुझे पैसे दो, मैं यूकेडी से चुनाव लड़ूंगा। यह कई मीडिया चैनलों की डिबेट में मिल जाएगा। इसने दिनेश चंद्र मास्टर द्वारा पैसे माँगने का आज तक कोई सबूत नहीं दिया है। आज वही दिनेश चंद्र मास्टर यूकेडी में हैं, क्या यह उनका अपमान नहीं है?
इसने मूल निवास और भू-कानून का आंदोलन चला रहे यूकेडी के मोहित डिमरी और लूशुन टोडरिया पर आरोप लगाया कि वे कांग्रेस के एजेंट हैं और गणेश गोदियाल से पैसे ले रहे हैं। इसने आज तक उस आरोप का भी कोई सबूत नहीं दिया। इसके आरोपों के कारण ही लूशुन टोडरिया, मोहित डिमरी आदि युवाओं को यूकेडी छोड़नी पड़ी थी।
इसने अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले का भी राजनीतिक फायदा उठाया। उसके भोले-भाले माँ-पिता का फायदा उठाया, अंकिता की माँ को अपने चुनाव में घुमाया और सभाओं में उनको रुलाता रहा। चुनाव के बाद इसने अंकिता भंडारी के माँ-पिता को फोन करना बंद कर दिया और उनसे मिलना भी बंद कर दिया।
अंकिता भंडारी का मामला जब फिर से वर्ष 2026 में उछला और लोग सड़कों पर उतरे तो इसने फिर से इसका राजनीतिक फायदा उठाने के लिए अंकिता के माँ-पिता को फोन किया। जब उन्होंने इसको मुँह नहीं लगाया तो इसने मीडिया में अंकिता भंडारी के माँ-पिता के खिलाफ भी बयानबाजी की, जिससे अंकिता की माँ बहुत दुखी हुईं।
इसने अंकिता भंडारी मामले में केस लड़ने को लेकर खूब चंदा बटोरा, लेकिन आज तक उसका हिसाब-किताब नहीं दिया। इसने अंकिता भंडारी हत्याकांड का कौन-सा केस लड़ा? अंकिता भंडारी हत्याकांड में वकील अवनीश नेगी और नवनीश नेगी ने तो बिना पैसे लिए ईमानदारी से केस लड़ा है। इसने अंकिता भंडारी मामले में केवल वसूली की और उसका राजनीतिक फायदा उठाया है।
ये वर्ष 2020 में आम आदमी पार्टी का प्रवक्ता रहा। जब वहाँ इसकी दाल नहीं गली तो ये उनके ऊपर आरोप लगाने लगा और वहाँ से निकाला गया। फिर इसने पत्रकारिता के नाम पर वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के मंत्रियों धन सिंह रावत और सतपाल महाराज का प्रचार किया।
अंकिता भंडारी हत्याकांड के मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाकर ये वर्ष 2024 में यूकेडी में आया और यूकेडी का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए करने लगा। अब ये यूकेडी के उन शीर्ष नेताओं पर आरोप लगा रहा है, जिन्होंने उत्तराखंड राज्य के लिए लड़ाई लड़ी थी।
ये यूकेडी से निकाले जाने पर उसके नेताओं पर 20 करोड़ रुपये लेने का आरोप लगा रहा है। जैसे पहले ये करता आया है, इसका भी कोई सबूत नहीं देता है। ये यूकेडी में विभाजन करने के लिए गढ़वाल-कुमाऊँ वाला मुद्दा उठा रहा है और यूकेडी के कुमाऊँ के नेताओं के ऊपर आरोप लगा रहा है।
यूकेडी में आकर इसे पद और प्रतिष्ठा मिली, जिसका इसने फायदा उठाया और बिना पूछे अपने आपको रायपुर विधानसभा का प्रत्याशी घोषित कर दिया। यहाँ तक कि कुछ लोगों को विधानसभाओं में यूकेडी का प्रत्याशी घोषित करने लगा और बेवजह की बयानबाजी करने लगा, जिससे पार्टी के अंदर असंतोष बढ़ने लगा। कई लोगों ने इसकी शिकायत की, जिसके कारण पार्टी ने इसे नोटिस देकर निष्कासित किया है।
कहावत है कि कुत्ते की दुम कभी सीधी नहीं होती और न ही कुत्ते को घी हज़म होता है। वही इस पर लागू होता है—न इसकी हरकतें सुधरीं और न ही पार्टी में रहकर इसको मिली इज़्ज़त हज़म हुई।
इस आदमी का कोई व्यक्तित्व नहीं है। पौड़ी, जहाँ ये पला-बढ़ा, वहाँ चार आदमी इसके साथ खड़े नहीं होते हैं, क्योंकि पौड़ी में इसका चरित्र सब जानते हैं। पौड़ी में ये पार्षद का चुनाव भी नहीं जीत पाएगा, इसे यह पता है। इसलिए पौड़ी में यह कोई कार्यक्रम नहीं करता है।
ये बस यूकेडी के नाम का फायदा उठाता रहा है और वहाँ रहकर भी अपनी वही पुरानी हरकतें करता रहा है। सुनने में आया है कि ये किसी उत्तराखंड क्रांति दल-डी नाम की अनजान-सी पार्टी से डील कर रहा है और वहाँ जाने की तैयारी कर रहा है, जिससे लोगों के बीच उत्तराखंड क्रांति दल के नाम से भ्रम पैदा किया जाए।
इसे नाम उत्तराखंड क्रांति दल ही चाहिए, क्योंकि उसके बिना इसका कोई राजनीतिक वजूद नहीं है।
ऐसे भ्रष्ट व्यक्ति को जो पार्टी में वापस लेने की वकालत कर रहा है, वो दरअसल उत्तराखंड क्रांति दल के हितैषी नहीं हैं। इसे बिल्कुल भी पार्टी में वापस नहीं लिया जाए। ये कुछ दिन तक बिलबिलाएगा, इसके गुर्गे शोर मचाएँगे, सोशल मीडिया में बयानबाजी करेंगे, फिर वापस ये अपने ब्लैकमेलिंग और वसूली के धंधे में लग जाएगा।
उत्तराखंड क्रांति दल को बनाने के लिए इंद्रमणि बडोनी, देवी दत्त पंत, बिपिन त्रिपाठी, दिवाकर भट्ट, त्रिवेंद्र सिंह पंवार, जसवंत सिंह बिष्ट, बी. डी. रतूड़ी, काशी सिंह ऐरी और सुरेंद्र कुकरेती जी जैसे लोगों ने अपना जीवन लगा दिया है। उस पार्टी का इस जैसे भ्रष्ट चरित्र के व्यक्ति के जाने से क्या बिगड़ेगा? बल्कि इससे पार्टी का भला ही होगा।
हमारे सम्माननीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती जी के मान-सम्मान को ठेस पहुँचाने वाले आशुतोष नेगी को उत्तराखंड क्रांति दल का हर एक सच्चा कार्यकर्ता जवाब देगा।
उत्तराखंड क्रांति दल जिंदाबाद।
जय उत्तराखंड।
UKD Pauri
UKD Yamkeshwar
UKD Srinagar
UKD Chaubattakhal
UKD Lansdowne
UKD Kotdwar