अक्षरवाणी काव्य-मंजरी

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अक्षरवाणी काव्य-मंजरी रचनाकारों के काव्य सृजन का प्रकाशन और वितरण

अक्षरवाणी काव्य-मंजरी संस्था , किसी व्यक्ति विशेष की संस्था नहीं है यह एक न्यास है जो कि सार्वजनिक है । अक्षरवाणी काव्य-मंजरी का उद्देश्य कलमकारों की रचनाओं को प्रकाश में लाना है ।

30/01/2026

षोड़शी दोहा,दीवाली दोहा,दीपावली दोहे,आचार्य प्रताप,हिंदी दोहे,दोहा संग्रह,दिवाली विशेष

30/01/2026

SHIVA

30/01/2026

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14/01/2026
 #कौन_पहेली_को_सुलझाएगीतआधार छन्द-द्विगुणित चौपाई छन्दविषय-कौन पहेली को सुलझाये?***************************************अ...
16/11/2025

#कौन_पहेली_को_सुलझाए

गीत
आधार छन्द-द्विगुणित चौपाई छन्द
विषय-कौन पहेली को सुलझाये?
***************************************
अपनी ढपली से ही अपना राग अलापें हमने देखा।
बने स्वार्थी खुदगर्जी जो लाँघ रहे मर्यादित रेखा।
प्रश्न अनेकों आते जाते उत्तर कहीं हमें मिल जाये।
कौन पहेली को सुलझाये???

कल्पबृक्ष जिसको समझा था वह निकली काँटो की झाड़ी।
चीर हरण कर विश्वासों का फाड़ गया लज्जा की साड़ी।
कलियाँ सिसक रहीं बागों में है कोई जो मन बहलाये।
कौन पहेली को सुलझाये ???

स्वच्छ धवल खादी पहने हैं, रखते सँग में कई मुखोटे।
जीत चाहिए छल बल से ही,करते काम घिनोने खोटे।
सुरसा सा मुँह खोले फिरते जिसको जनता समझ न पाये।
कौन पहेली को सुलझाये???

गिरगिट जैसा रंग बदलकर,बन जाते मनमोहक अपने।
छूकर पैर अनेकों कसमें खाकर दिखा रहे नित सपने।
वोट चाहिए केवल इनको,कैसे भी हो वह मिल जाये।
कौन पहेली को सुलझाये ???

-रा.क प्रजापति 'साथी'

सम्बन्ध कोई भी हों लेकिनयदि दुःख में साथ न दें अपना‚फिर सुख में उन सम्बन्धों कारह जाता कोई अर्थ नहीं।मन कटुवाणी से आहत ह...
15/11/2025

सम्बन्ध कोई भी हों लेकिन
यदि दुःख में साथ न दें अपना‚
फिर सुख में उन सम्बन्धों का
रह जाता कोई अर्थ नहीं।

मन कटुवाणी से आहत हो
भीतर तक छलनी हो जाये‚
फिर बाद कहे प्रिय वचनों का
रह जाता कोई अर्थ नहीं।

– रामधारी सिंह दिनकर
#अक्षरवाणी #साहित्यप्रेमी #काव्यमंजरी

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