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प्रेस रिलीज़किसान मज़दूर मोर्चा (KMM)तारीख: 8 जनवरी 2026स्थान: किसान भवन, चंडीगढ़किसान मज़दूर मोर्चा (KMM) द्वारा आज किस...
09/01/2026

प्रेस रिलीज़

किसान मज़दूर मोर्चा (KMM)
तारीख: 8 जनवरी 2026
स्थान: किसान भवन, चंडीगढ़

किसान मज़दूर मोर्चा (KMM) द्वारा आज किसान भवन, चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर पंजाब तथा देशभर में लागू किए जा रहे किसान-मज़दूर विरोधी क़ानूनों और सरकारी नीतियों के खिलाफ आने वाले आंदोलनों का ऐलान किया गया।

KMM चैप्टर पंजाब की पंजाब सरकार के साथ पंजाब भवन, चंडीगढ़ में हुई बैठक बेनतीजा रहने के बाद गुरुद्वारा अंब साहिब, मोहाली में मनजीत सिंह राय की अध्यक्षता में एक और बैठक हुई, जिसमें आगामी समय की संघर्षात्मक रणनीति तय की गई।

आने वाले आंदोलन
1. 13 जनवरी 2026 को बिजली संशोधन बिल 2025, बीज क़ानून 2025 और VB ग्राम योजना से जुड़े संशोधन क़ानूनों की प्रतियां पंजाब के गांव-स्तर पर लोहड़ी की अग्नि में जलाई जाएंगी।
2. 21 और 22 जनवरी 2026 को स्मार्ट मीटर उतारकर दूसरे चरण के तहत नज़दीकी बिजली दफ्तरों में जमा करवाए जाएंगे।
3. 18 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री भगवंत मान के मजीठा (अमृतसर) दौरे के दौरान शंभू-खनौरी मोर्चा उजाड़ने, ट्रॉलियों की चोरी और अन्य मांगों को लेकर सवाल उठाए जाएंगे।
4. 5 फ़रवरी 2026 को पंजाब के मंत्रियों और विधायकों के घरों के सामने धरने दिए जाएंगे।
5. 24–25 जनवरी 2026 को राजस्थान में KMM चैप्टर इंडिया की बैठक आयोजित की जाएगी।

सरकार की नाकामी की निंदा

प्रेस को संबोधित करते हुए KMM नेताओं ने कहा कि भगवंत मान सरकार बैठक का न्योता देकर भूल गई, जिसकी मोर्चा कड़े शब्दों में निंदा करता है। शंभू-खनौरी मोर्चों के दौरान हुए नुक़सान का मुआवज़ा देने से सरकार बच रही है, जबकि कई मांगों पर पहले ही सहमति बन चुकी थी।

मोर्चा ने निम्नलिखित मांगों को तुरंत लागू करने की मांग की:

1. आंदोलनों के दौरान शहीद हुए किसानों और मज़दूरों के परिवारों को मुआवज़ा और सरकारी नौकरियां।
2. दिल्ली आंदोलन-2 (शंभू-खनौरी) के दौरान घायल हुए किसानों-मज़दूरों को मुआवज़ा।
3. पराली जलाने, रेड एंट्रियों, जुर्मानों तथा आंदोलनों के दौरान दर्ज किए गए पुलिस और रेलवे पुलिस के सभी मामलों को वापस लिया जाए।
4. बाढ़ से प्रभावित किसानों को लंबित मुआवज़ा तुरंत जारी किया जाए।

बिजली संशोधन बिल और अन्य क़ानून

मुख्यमंत्री द्वारा बिजली संशोधन बिल का केवल मौखिक विरोध किया गया है, जबकि KMM की मांग है कि इस बिल के खिलाफ पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया जाए। बीज बिल, भारत-अमेरिका समझौते और VB ग्राम योजना पर पंजाब सरकार अपना स्पष्ट रुख सार्वजनिक करे तथा केंद्र सरकार को भेजी गई चिट्ठी को सामने लाया जाए।

बैठक में पारित प्रमुख प्रस्ताव

1. पंजाब में नशों की बेलगाम बिक्री पर गहरी चिंता जताई गई और इसके लिए केंद्र सरकार, पंजाब सरकार, नशा माफिया और पुलिस के गठजोड़ को जिम्मेदार ठहराया गया। नशों के खिलाफ संयुक्त जन आंदोलन का आह्वान किया गया।
2. पंजाब में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के लिए केंद्र और पंजाब सरकार की नीतियों को जिम्मेदार बताया गया।
3. प्रेस की आवाज़ दबाने के प्रयासों की निंदा करते हुए पत्रकार समुदाय के आंदोलन को समर्थन दिया गया।
4. हवा और पानी को प्रदूषित करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।

अंत में

KMM ने कहा कि देश और पंजाब में कृषि संकट बेहद गहरा हो चुका है। कर्ज़ में डूबे किसान लगातार आत्महत्याएं कर रहे हैं। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने का वादा पूरी तरह विफल साबित हुआ है। केंद्र और पंजाब सरकार की कॉर्पोरेट-पक्षधर नीतियां किसानों, मज़दूरों, कर्मचारियों, दुकानदारों और छोटे व्यापारियों से रोज़गार छीनने की ओर बढ़ रही हैं।

किसान मज़दूर मोर्चा पंजाब के सभी लोगों से आने वाले आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी की अपील करता है, क्योंकि इस कॉर्पोरेट हमले का मुकाबला केवल संयुक्त और संगठित संघर्ष से ही किया जा सकता है।

बैठक में उपस्थित नेता और संगठन:

सरवण सिंह पंधेर (किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी पंजाब),
मनजीत सिंह राए (बीकेयू दोआबा),
जसविंदर सिंह लोंगोवाल (बीकेयू आज़ाद),
बलदेव सिंह जीरा (बीकेयू क्रांतिकारी),
जंग सिंह भनेड़ी (बीकेयू भनेड़ी),
बलकार सिंह बैंस (बीकेएमयू पंजाब),
बलवंत सिंह बहरामके (बीकेयू बहरामके),
अमरजीत मोहड़ी (बीकेयू शहीद भगत सिंह),
और किसान मज़दूर हितकारी सभा।

प्रेस नोट: किसान मज़दूर मोर्चा (KMM) *मनरेगा योजना को समाप्त करने के खिलाफ 29 दिसंबर को पंजाब भर के डीसी कार्यालयों के स...
24/12/2025

प्रेस नोट: किसान मज़दूर मोर्चा (KMM)

*मनरेगा योजना को समाप्त करने के खिलाफ 29 दिसंबर को पंजाब भर के डीसी कार्यालयों के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले जलाए जाएंगे*

24/12/2025:
आज किसान मज़दूर मोर्चा (KMM) की एक ज़ूम बैठक आयोजित की गई। बैठक के बाद KMM की पंजाब इकाई ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा कि जब से मोदी सरकार केंद्र में आई है, तब से किसानों और मज़दूरों से जुड़े कानूनों में बड़े बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों से कृषि क्षेत्र और मज़दूरों के रोज़गार की सुरक्षा कमजोर हुई है, शोषण के रास्ते खुले हैं और उद्योगपतियों व कॉरपोरेट घरानों को एकतरफा लाभ पहुंचाया गया है।

KMM ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना को खत्म करने की कोशिशों के खिलाफ 29 दिसंबर को पूरे पंजाब में डीसी कार्यालयों के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले जलाए जाएंगे। KMM नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार ने अब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005 के मूल सिद्धांतों पर सीधा हमला किया है और नए VB G RAM के माध्यम से मनरेगा की पूरी अवधारणा को बदलने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि ये बदलाव मज़दूरों द्वारा वर्षों के संघर्ष से हासिल किए गए अधिकारों पर सीधा हमला हैं। नेताओं ने दोहराया कि मनरेगा एक सामाजिक सुरक्षा कानून है, जिसका उद्देश्य “काम का अधिकार” सुनिश्चित करना है और हर ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल श्रम करने को तैयार हों, एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का गारंटीकृत रोज़गार देना है।

नई योजना की प्रमुख खामियों को रेखांकित करते हुए KMM ने कहा:
1. 100 दिनों के गारंटीकृत रोज़गार के कानूनी अधिकार को कमजोर किया जा रहा है, जिससे अधिकार आधारित कानून को सरकार की इच्छा पर निर्भर योजना बनाया जा रहा है।

2. अत्यधिक केंद्रीकरण और नौकरशाही दखल, जिससे काम की मंज़ूरी और मज़दूरी भुगतान में देरी होगी।

3. सामाजिक सुरक्षा के उद्देश्य को कमजोर करना, जिससे सबसे गरीब ग्रामीण परिवार योजना से बाहर हो जाएंगे।

KMM नेताओं ने कहा कि पहले से कर्ज़ में डूबे राज्यों पर 40% की अतिरिक्त वित्तीय हिस्सेदारी डाली जा रही है, जिससे एक तरह से केंद्र सरकार ने 40% रोज़गार खत्म करने की व्यवस्था कर दी है।

उन्होंने पंजाब की भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार की भी कड़ी निंदा की और आरोप लगाया कि यह सरकार भाजपा के साथ खड़ी है और केंद्र सरकार की लाइन पर चल रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब की आप सरकार भाजपा शासित राज्यों से भी अधिक उत्साह के साथ भाजपा की नीतियों को लागू कर रही है, बिना किसानों और मज़दूरों के हितों की चिंता किए।

KMM नेताओं ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार ने हमेशा गरीब भारतीयों, किसानों और मज़दूरों की पीड़ा को नजरअंदाज किया है और राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप किया है, जो देश की संघीय व्यवस्था और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।

20/12/2025

किसानों-मज़दूरों के संघर्ष का असर, बिजली संशोधन बिल के खिलाफ पंजाब सरकार ने तोड़ी चुप्पी, के.एम.एम. की बड़ी मांगों पर बनी सहमति, 22 तारीख को चंडीगढ़ में अगली बैठक, 20 दिसंबर का रेल रोको स्थगित

20/12/2025
के.एम.एम. — किसान मज़दूर मोर्चा द्वारा बिजली संशोधन बिल के खिलाफ चल रहे संघर्ष के दौरान चंडीगढ़ में मोर्चे के नेताओं और सरकार के बीच करीब 9 घंटे चली बैठक में पंजाब सरकार ने अपनी लंबी चुप्पी तोड़ी। पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा सरकार के स्तर पर बिजली संशोधन बिल का विरोध करने का बयान दिया गया।
18 और 19 दिसंबर को पंजाब भर के डीसी कार्यालयों पर चले मोर्चों तथा 20 दिसंबर से पंजाब में रेल रोको आंदोलन के आह्वान के बीच, सरकार द्वारा किसान मज़दूर मोर्चा के साथ चंडीगढ़ में बुलाई गई बैठक 19 दिसंबर को घंटों चली और देर रात समाप्त हुई। बैठक में सरकार की ओर से एस.पी.एस. परमार (आईपीएस, लॉ एंड ऑर्डर), अरशदीप सिंह थिंद (आईएएस, प्रशासनिक सचिव—कृषि एवं किसान कल्याण), बसंत गर्ग (आईएएस, प्रशासनिक सचिव—पावर), सनाली गिरी (आईएएस, सचिव—राजस्व एवं पुनर्वास) उपस्थित रहे।

20 दिसंबर को चंडीगढ़ के किसान भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में के.एम.एम. के नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान भले ही देर से आया हो, लेकिन यह सही दिशा में उठाया गया पहला कदम है। नेताओं ने कहा कि 5 दिसंबर के सांकेतिक रेल रोको के आह्वान, 10 दिसंबर को पूरे पंजाब में प्रीपेड मीटर उतारकर बिजली घरों में जमा कराने के कार्यक्रम को मिला व्यापक समर्थन, तथा दो दिनों तक डीसी कार्यालयों पर चले मोर्चों में जनता की बड़ी भागीदारी का ही प्रभाव है कि आज पंजाब सरकार बिजली बिल के खिलाफ बोलने को तैयार हुई है। उन्होंने मांग की कि पंजाब सरकार द्वारा बुलाए गए विधानसभा सत्र में इस बिल के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया जाए।

उन्होंने बताया कि सरकारी अधिकारियों के अनुसार पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार को लिखित रूप में अपना विरोध दर्ज करा दिया है, जिसकी प्रति अगली बैठक में के.एम.एम. को उपलब्ध कराई जाएगी। शंभू और खनौरी मोर्चों पर पंजाब सरकार द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान चोरी हुई ट्रॉलियों व अन्य सामान की भरपाई के मुद्दे पर समिति बनाने के प्रस्ताव पर सहमति बनी, लेकिन समिति के सदस्यों के नामों पर मोर्चे के नेताओं की आपत्तियों के चलते, समिति के सदस्यों पर 22 तारीख (सोमवार) को सरकार और के.एम.एम. नेताओं के बीच होने वाली अगली बैठक में पुनः चर्चा होगी।

नेताओं ने कहा कि बड़ी संख्या में बाढ़-पीड़ित लोगों को मुआवज़े से वंचित रहने के मुद्दे पर सरकार ने तत्काल प्रभाव से मुआवज़ा जारी करने पर सहमति दे दी है। के.एम.एम. द्वारा अभियान चलाकर मुआवज़े से वंचित पीड़ितों की सूचियां तैयार कर सरकार तक पहुंचाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि फसलों के 100% नुकसान पर 20 हजार की जगह 70 हजार रुपये मुआवज़ा तथा खेत मज़दूरों के लिए शेष नुकसान के साथ-साथ अतिरिक्त 10% मुआवज़ा देने की मांग सरकार के समक्ष जोरदार तरीके से रखी गई है।

नेताओं ने यह भी बताया कि पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आए किसानों-मज़दूरों के कर्ज़ माफ़ करने के मुद्दे पर अगली बैठक में संबंधित विभाग के अधिकारियों को बुलाकर स्थिति स्पष्ट करने पर सहमति बनी है। विभिन्न किसान आंदोलनों व प्रदर्शनों के दौरान दर्ज पुलिस, आरपीएफ तथा सभी प्रकार के मामलों को रद्द करने पर भी सहमति बनती दिखाई दे रही है।

आज की बैठक में बनी सहमति और अन्य अहम मुद्दों पर तय अगली बैठक के मद्देनज़र 20 तारीख को घोषित रेल रोको आंदोलन को फिलहाल स्थगित किया जा रहा है। हालांकि, यदि अगली बैठक में कोई प्रभावी कदम उठते दिखाई नहीं देते, तो के.एम.एम. तत्काल बैठक बुलाकर आगे के एक्शन प्रोग्राम की घोषणा करेगा।

नेताओं ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा बुलाए गए विधानसभा सत्र में जहां बिजली बिल के खिलाफ प्रस्ताव लाया जाए, वहीं बीज बिल, अमेरिका सहित विभिन्न देशों के साथ किए जा रहे फ्री ट्रेड समझौते, मनरेगा योजना समाप्त करने, मज़दूरों के श्रम कानून खत्म करने, ‘एक राष्ट्र-एक पंजीकरण’ जैसे संघीय ढांचे को कमजोर करने वाले फैसलों के खिलाफ भी प्रस्ताव पारित किए जाएं। किसान मज़दूर मोर्चा भारत सरकार द्वारा मनरेगा योजना समाप्त करने के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करता है और श्रम कानूनों की बहाली की मांग करता है।

इस अवसर पर के.एम.एम. की ओर से सरवण सिंह पंधेर, बलदेव सिंह जीरा, मनजीत सिंह राय, मनजीत सिंह नयाल, बलवंत सिंह बहिरामके, गुरअमनीत सिंह मांगट, दिलबाग सिंह गिल, ध्यान सिंह सिउणा, गुरविंदर सिंह लहरा, बलकार सिंह बैस, मलकीत सिंह गुलामीवाला, ओकार सिंह पुराना भंगाला, देविंदर सिंह संधवां उपस्थित रहे।

Leaders of KMM held an urgent meeting at Kisan Bhawan, Chandigarh today.This development comes after the State Governmen...
19/12/2025

Leaders of KMM held an urgent meeting at Kisan Bhawan, Chandigarh today.

This development comes after the State Government has called KMM leaders for a meeting in view of the sustained agitation being carried out by KMM in front of District Commissioner (DC) offices across Panjab, highlighting the unresolved demands of farmers and agricultural workers.

It is pertinent to mention that the ongoing DC Office protests were to be followed by a statewide “Rail Roko” protest on 20 December 2025, in case the demands of the farmers remain unaddressed.

तत्काल प्रेस सूचनाचंडीगढ़ | 19 दिसंबर 2025चल रहे राज्य-व्यापी आंदोलन के मद्देनज़र किसान मज़दूर मोर्चा (KMM) के नेता आज स...
19/12/2025

तत्काल प्रेस सूचना

चंडीगढ़ | 19 दिसंबर 2025

चल रहे राज्य-व्यापी आंदोलन के मद्देनज़र किसान मज़दूर मोर्चा (KMM) के नेता आज सुबह 11:00 बजे किसान भवन, चंडीगढ़ में पहुँचकर एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे।

यह बैठक राज्य सरकार द्वारा किसान मज़दूर मोर्चा के नेताओं को बातचीत के लिए बुलाए जाने के संदर्भ में आयोजित की जा रही है। वर्तमान में KMM द्वारा पंजाब के सभी ज़िला मुख्यालयों में उपायुक्त (DC) कार्यालयों के सामने किसानों और खेत मज़दूरों की माँगों को लेकर लगातार धरने दिए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि यदि किसानों की जायज़ माँगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो DC कार्यालयों के सामने चल रहे आंदोलन के बाद 20 दिसंबर 2025 को राज्य-व्यापी “रेल रोको” आंदोलन करने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है।

बैठक में लिए गए निर्णयों के बारे में प्रेस को बाद में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।

— किसान मज़दूर मोर्चा (KMM)

25/11/2025

प्रैस नोट: किसान मजदूर मोर्चा

बिजली संशोधन बिल पर भगवंत मान की चुप्पी, किसान मज़दूर मोर्चा की लुधियाना में प्रेस कॉन्फ़्रेंस—किए बड़े ऐलान

25/11/2025 किसान मज़दूर मोर्चा की ओर से लुधियाना में महत्वपूर्ण कॉन्फ़्रेंस की गई। इस मौके पर वरिष्ठ किसान नेता सर्वन सिंह पंधेर, मनजीत सिंह राय और दिलबाग सिंह गिल ने संबोधित करते हुए कहा कि जिस तरह मुख्यमंत्री भगवंत मान सहित सभी राजनीतिक पार्टियाँ केंद्र द्वारा लाए जा रहे बिजली संशोधन बिल 2025 पर चुप हैं, उससे साफ़ पता चलता है कि केंद्र द्वारा पंजाब के अधिकारों पर किए जा रहे हमले में ये सभी दल सहमत हैं। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर अपना स्टैंड स्पष्ट करना चाहिए और पंजाब सरकार को तुरंत विधानसभा सत्र बुलाकर इस बिल के खिलाफ प्रस्ताव पास करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि बिजली बिल और अन्य मांगों को लेकर 1 दिसंबर को KMM की ओर से पंजाब भर के DC दफ्तरों में मांग-पत्र दिए जाएंगे और 5 दिसंबर को 2 घंटे का सांकेतिक रेल रोको धरना दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिजली संशोधन बिल 2025 को रद्द किया जाए और बिजली विभाग का निजीकरण बंद किया जाए। पावर कॉम में निजीकरण के तहत लागू ठेकाकारी नीति को खत्म कर स्थायी कर्मचारियों की भर्ती की जाए ताकि ठेकेदारों द्वारा जनता की लूट बंद हो सके। उन्होंने कहा कि निजीकरण के तहत उपभोक्ताओं के घरों पर जबरन लगाए जा रहे चिप वाले मीटर बंद किए जाएँ और पहले वाले मीटर ही लगाए जाएँ।

उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने अमेरिका से जीरो टैरिफ पर कपास, सोयाबीन, मक्का और दूध उत्पाद आयात करने का समझौता कर लिया है। लोगों के हित में इसे तुरंत रद्द किया जाए और अन्य देशों के साथ किए गए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट रद्द कर आगे नए समझौते न किए जाएँ।

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को प्रदूषण-रोधी कानून से बाहर रखा जाए और हवा-पानी को प्रदूषित करने वाली इंडस्ट्री को बंद किया जाए। पंजाब जल प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण एक्ट में पंजाब सरकार द्वारा की गई वह संशोधन, जिसमें हवा-पानी प्रदूषित करने वालों के लिए 6 साल की सजा का प्रावधान हटाकर केवल आर्थिक जुर्माना रखा गया है, उसे वापस लिया जाए और सजा का प्रावधान बहाल किया जाए।

उन्होंने कहा कि पराली से जुड़े किसानों पर लगे सभी केस रद्द किए जाएँ। पंजाब सरकार किसानों को तीन-तीन सज़ाएँ दे रही है—पुलिस केस, जुर्माना और रेड एंट्री—इन्हें तुरंत बंद किया जाए क्योंकि सरकार पराली प्रबंधन में असफल रही है।

उन्होंने आगे कहा कि शंभू और खन्नौरी बॉर्डरों पर 14 महीने चले किसान-मज़दूर मोर्चे को भगवंत मान सरकार ने जबरन हटाया, मोर्चे के नेताओं को धोखे से गिरफ्तार कर नेतृत्व विहीन किया और मोर्चे का सामान व ट्रैक्टर-ट्रालियाँ तक लुटवाईं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार जनता की मेहनत की कमाई से बने इस सामान का 3,77,00,948 रुपये का मुआवजा दे। इस नुकसान की जानकारी 26/06/2025 को संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली किसान आंदोलन 01, आंदोलन 02 और पंजाब में चले संघर्षों के दौरान किसानों और कार्यकर्ताओं पर दर्ज सारे केस तुरंत वापस लिए जाएँ। रेलवे विभाग द्वारा भेजे जा रहे नोटिस तुरंत रद्द किए जाएँ। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलनों में शहीद हुए किसानों के परिवारों को मुआवजा और नौकरी दी जाए तथा घायलों को मुआवजा दिया जाए।

उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर कॉर्पोरेट कब्जे के लिए की जा रही उपजाऊ भूमि की अधिग्रहण प्रक्रिया बंद की जाए और भूमि अधिग्रहण कानून 2013 में की गई संशोधन वापस ली जाए। भारतमाला परियोजना और आगामी बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत किसानों का उजाड़ा बंद किया जाए। मोर्चा मांग करता है कि सभी काबिज़ आबादकारों को मालिकाना हक़ दिए जाएँ और उन्हें उजाड़ना बंद किया जाए।

उन्होंने कहा कि MSP गारंटी कानून बनाया जाए, किसानों-मज़दूरों को कर्ज़ मुक्त किया जाए, मनरेगा के तहत खेत मज़दूरों और छोटे किसानों को 200 दिन काम दिया जाए, मनरेगा मजदूरी 700 रुपये की जाए और शंभू-खन्नौरी मोर्चे की मांगें पूरी की जाएँ।

उन्होंने कहा कि गांवों की सहकारी सभाओं के माध्यम से किसानों को नैनो खाद जैसी बेकार वस्तुएँ जबरन थोपकर आर्थिक लूट की जा रही है। यह बंद होना चाहिए। केंद्र सरकार सहकारी सभाओं का केंद्रीकरण बंद करे। किसानों को कर्ज़ देने की सीमा 3300 करोड़ से घटाकर 1100 करोड़ कर दी गई है, जिससे किसानों को कर्ज़ नहीं मिल पा रहा। इस सीमा को बहाल कर बढ़ाया जाए।

उन्होंने कहा कि पंजाब के गंभीर मुद्दों में से एक पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ की सीनेट चुनाव तुरंत करवाए जाएँ। चंडीगढ़ और पंजाब के अधिकारों को खत्म करने की प्रक्रिया बंद की जाए। चंडीगढ़ UT में सरकारी भर्तियों के अधिकार नए नियमों के तहत गवर्नर को दे दिए गए हैं, यानी अप्रत्यक्ष रूप से केंद्र ने पंजाब का अधिकार छीन लिया है। सरकारी भर्तियों का पूरा अधिकार पंजाब सरकार को दिया जाए।

उन्होंने कहा कि मानसून सीज़न में पंजाब बड़े स्तर पर बाढ़ की मार झेल चुका है। फसलें, घर और पशुओं का बहुत नुकसान हुआ है। ये बाढ़ प्राकृतिक छेड़छाड़ और बांधों के गलत प्रबंधन के कारण आई हैं। कई लोगों और पशुओं की मौतें हुई हैं। इसलिए प्रति मृतक परिवार को 1 करोड़ रुपये, घरों के नुक़सान की 100% भरपाई, फसल नुक़सान के लिए प्रति एकड़ 70,000 रुपये, गन्ने के लिए 1,00,000 रुपये, प्रति पशु 1,25,000 रुपये, बुआई के लिए मुफ्त बीज-खाद और प्रति परिवार 1 लाख रुपये का पुनर्वास भत्ता दिया जाए।

खेती मज़दूरों को अन्य मुआवजों के साथ फसल नुक़सान का 10% मुआवजा दिया जाए। बाढ़ प्रभावित किसानों-मज़दूरों का कर्ज़ माफ़ किया जाए। जिन किसानों की ज़मीनें नदी में बहती हैं, उन्हें बराबर ज़मीन बाहर अलॉट की जाए और नुकसान की भरपाई की जाए या भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत पुनर्वास किया जाए।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार इन मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं करती तो 1 और 5 दिसंबर के कार्यक्रमों के बाद 17–18 को DC दफ्तरों पर 2 दिन के धरने होंगे, और यदि फिर भी सुनवाई नहीं हुई तो 19 तारीख को रेल चक्का जाम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 10 तारीख को प्रीपेड मीटर तोड़कर बिजली दफ्तरों में फेंके जाएँगे।

इस मौके पर युगराज सिंह ददाहूर, चमकौर सिंह उस्मान वाला, राजू पत्तो, मनजीत सिंह अरोड़ा और बलविंदर सिंह दोआबा मौजूद रहे।

03/11/2025
https://youtu.be/xo4aQLZHWdg?si=aAvsTMI9D1STR_mo
18/10/2025

https://youtu.be/xo4aQLZHWdg?si=aAvsTMI9D1STR_mo

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