08/11/2022
बच्चे की लक्ष्मण रेखा होना जरूरी है
यह एक बहुत अहम प्रश्न है कि क्या हमें अपने बच्चों की सीमाएँ तय करनी चाहियंे? सीमा का अर्थ है कि बच्चे को क्या खाना है, कब खेलना है, कब टी.वी. देखना है, कब पढ़ाई करनी है कब क्या करना है इसकी एक सीमा तय होनी चाहिए और इस पर अभिभावकों का नियंत्राण होना चाहिए। अगर आप आज बचपन में ही अपने बच्चे की इन सब आदतों की सीमाएँ तय नहीं करते तो बाद में वह आपको ही कोसेंगे।
अगर आप बच्चे को पूरी आजादी दे देंगे कि वह जो चाहे वह करेगा। हर बच्चा इधर-उधर घूमना, जंक फूड खाना पसंद करता है उसे फल आदि सब समझ नहीं आते यह तो हमें बताना पड़ेगा।
किसी भी बच्चे के लिए एक दम से टी.वी से हटना मुमकिन नहीं होता। टीवी. देखने बैठते हैं बच्चे तो उसी में बहुत समय लगा देते हैं हमें ही उसके लिए समय की सीमा निर्धारित करनी होगी कि उसे कितने समय टी.वी देखना है? आज के समय में हर माता-पिता की सबसे बड़ी परेशानी मोबाईल है। मोबाइल में बच्चे गेम खेलना शुरू करते हैं तो उसे छोड़ते नहीं। समय तो खराब होता है साथ ही बच्चे अपने आस पास की असली दुनिया से हटकर आभासी दुनिया में चले जाते हैं परन्तु जबवह उससे हट कर अपनी असली दुनिया में वापिस आते हैं तो उन्हें परेशानी आती है। उसको कितनी देर मोबाईल या टी.वी देखना है उसकी समय सीमा अभिभावकों को तय करनी होगी। यह बहुत महत्वपूर्ण है। बच्चा कब सोएगा, कब उठेगा यह भी निर्धारित होना चाहिए । अगर वह अपनी मर्जी से टी.वी., मोबाईल देखेगा तो देर से सोएगा, देर से सोने पर देर से उठेगा। अगर उसे जल्दी उठा भी दिया तो फिर स्कूल में उसे नींद आएगी वह कक्षा में वह ठीक से सीख नहीं पाएगा जो सिखाया जा रहा है।
इन सब पर आपका नियन्त्रण होना चाहिए। यह हमारी जिम्मेदारी है कि बचपन से ही इन सब पर नियंत्रण करके चलें। यह नहीं कि वह कुछ भी माँगे और हम उसे दे दें।। अभिभावक होने के नाते हमारी जिम्मेदारी हे कि हम उस पर नियंत्रण रखें इससे उसकी आदतें अच्छी रहेगीं और वह बड़े होने पर निश्चित ही आपको धन्यवाद बोलेगा।
याद रखें यह तभी सम्भव होगा जब आप अभिभावक होकर भी बच्चों के सामने स्वयं के लिए भी एक सीमा तय करें और अनुशासित होकर उनकी पालना करें।
#स्कूल bihar