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​"विचार मेरा, सुझाव आपका! 💡
​हर मुद्दे के दो पहलू होते हैं—एक जो हम देखते हैं और दूसरा जो आप महसूस करते हैं। इस पेज का उद्देश्य सिर्फ अपनी बात कहना नहीं, बल्कि आपकी राय से कुछ नया सीखना भी है। 🤝

13/04/2026

"क्या हम भावनाओं के प्रदर्शन में गरिमा खोते जा रहे हैं?"
​हाल ही में तलाक के बाद जश्न मनाने के बढ़ते चलन ने एक नई बहस छेड़ दी है। जहाँ एक ओर इसे 'आजादी' कहा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल उठता है कि क्या हर चीज का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालना जरूरी है?
​विचारणीय बिंदु:
​शालीनता बनाम शोर: क्या एक कठिन दौर के खत्म होने का सुकून घर के भीतर अपनों के बीच शांति से नहीं मनाया जा सकता?
​दिखावे की संस्कृति: क्या हम वाकई खुश हैं, या हम सिर्फ दुनिया को (और शायद अपने पूर्व साथी को) यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि हम 'बहुत खुश' हैं?
​संस्कार और समझ: रिश्ते का टूटना एक असफलता हो सकती है या एक जरूरत, लेकिन क्या इसे 'इवेंट' बनाना समाज के ताने-बाने के लिए सही है?
​निष्कर्ष:
मजबूत होना और खुश रहना बहुत जरूरी है, लेकिन खुशी और 'नुमाइश' के बीच एक बारीक रेखा होती है। हमें अपनी बेटियों को बहादुर बनाना चाहिए, लेकिन साथ ही उन्हें यह भी सिखाना चाहिए कि मुश्किल वक्त से शालीनता (Grace) के साथ कैसे बाहर निकला जाता है।
​आपका क्या सोचना है? क्या यह 'जश्न' बदलाव की निशानी है या सिर्फ सोशल मीडिया पर अटेंशन पाने का एक और तरीका?

"क्या आपको लगता है कि आज के डिजिटल युग में हमारी 'प्राइवेसी' पूरी तरह खत्म हो चुकी है? आपकी क्या राय है?""मेरा ओपिनियन य...
13/04/2026

"क्या आपको लगता है कि आज के डिजिटल युग में हमारी 'प्राइवेसी' पूरी तरह खत्म हो चुकी है? आपकी क्या राय है?

""मेरा ओपिनियन यह है कि डिजिटल युग में प्राइवेसी 'खत्म' नहीं हुई है, बल्कि इसके 'मायने' बदल गए हैं। तकनीक ने हमें एक्सपोज तो किया है, लेकिन नियंत्रण अभी भी काफी हद तक हमारे हाथ में है—जैसे हम क्या पोस्ट करते हैं और किन ऐप्स को परमिशन देते हैं। खतरा तकनीक से उतना नहीं है, जितना हमारी लापरवाही से है।"
सवाल: "क्या आप मेरी बात से सहमत हैं कि सावधानी बरतकर प्राइवेसी बचाई जा सकती है, या खेल हाथ से निकल चुका है? सुझाव दें।"

आशा भोसले जी के निधन से गहरा दुख हुआ, जिनकी असाधारण आवाज़ ने भारतीय संगीत की पीढ़ियों को परिभाषित किया। बहुत कम कलाकार उ...
12/04/2026

आशा भोसले जी के निधन से गहरा दुख हुआ, जिनकी असाधारण आवाज़ ने भारतीय संगीत की पीढ़ियों को परिभाषित किया। बहुत कम कलाकार उनकी बहुमुखी प्रतिभा या दीर्घायु की बराबरी कर पाए हैं। उनके गीत समय के साथ गूंजते रहेंगे। उनके परिवार और अनगिनत प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं। 🕉️ शांति!

भारत में बेरोजगारी: डिग्री की भीड़ या स्किल की कमी? 🤔​आज हमारे देश में बेरोजगारी का मुद्दा केवल 'नौकरियों की कमी' नहीं, ...
12/04/2026

भारत में बेरोजगारी: डिग्री की भीड़ या स्किल की कमी? 🤔
​आज हमारे देश में बेरोजगारी का मुद्दा केवल 'नौकरियों की कमी' नहीं, बल्कि 'सही कौशल (Skills) की कमी' भी है। इसके पीछे मुख्य कारण ये हैं:
​📚 शिक्षा बनाम हुनर: हमारी शिक्षा व्यवस्था थ्योरी और डिग्री पर ज्यादा जोर देती है, जबकि बाजार को 'प्रैक्टिकल स्किल' वाले युवाओं की जरूरत है।
​🏭 मैन्युफैक्चरिंग में सुस्ती: सर्विस सेक्टर (IT) तो बढ़ा, लेकिन फैक्ट्रियां और निर्माण क्षेत्र उतनी तेजी से नहीं बढ़े जो बड़े पैमाने पर रोजगार दे सकें।
​📈 आबादी का बोझ: हर साल लाखों युवा नौकरी की रेस में शामिल होते हैं, लेकिन अवसरों की संख्या उस अनुपात में कम है।
​🏛️ सरकारी नौकरी का मोह: सालों तक केवल सरकारी भर्ती के इंतजार में बैठना भी युवाओं के कीमती समय और ऊर्जा को खत्म कर रहा है।
​निष्कर्ष: बेरोजगारी का असली दोषी 'आउटडेटेड सिलेबस' और 'स्किल गैप' है। वक्त की मांग है कि हम केवल डिग्री के पीछे न भागकर खुद को नई टेक्नोलॉजी और बिजनेस के लिए तैयार करें।
​आपकी क्या राय है? क्या सरकार को स्कूल लेवल से ही व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Training) को अनिवार्य कर देना चाहिए? 💬👇

"चेहरे पर मुस्कान और मन में शांति... यही आज की सबसे बड़ी जरूरत है। खुश रहिए और खुशियां बांटते रहिए! 😊 सुप्रभातम। ❤️
12/04/2026

"चेहरे पर मुस्कान और मन में शांति... यही आज की सबसे बड़ी जरूरत है। खुश रहिए और खुशियां बांटते रहिए! 😊 सुप्रभातम। ❤️

"नमस्कार दोस्तों! 🙏​आज मैंने एक छोटा सा कदम उठाया है—एक ऐसा मंच बनाने का जहाँ 'सिर्फ मेरी बात' नहीं, बल्कि 'हमारी बात' ह...
10/04/2026

"नमस्कार दोस्तों! 🙏
​आज मैंने एक छोटा सा कदम उठाया है—एक ऐसा मंच बनाने का जहाँ 'सिर्फ मेरी बात' नहीं, बल्कि 'हमारी बात' होगी। अक्सर हम सोशल मीडिया पर बहुत कुछ देखते हैं, पर अपनी बात कहने का मौका नहीं मिलता।
​मेरा विचार (My Opinion): समाज तब तक नहीं बदलता जब तक आम आदमी अपनी राय रखना शुरू न करे।
​आपका सुझाव (Your Suggestion): मैं चाहता हूँ कि यह पेज मेरा नहीं, आपका हो। अभी हमारे साथ सिर्फ 15 लोग हैं, लेकिन मुझे विश्वास है कि सच और समझदारी की बात करने वाले लाखों लोग जल्द हमसे जुड़ेंगे।
​आज आप बस इतना करें: कमेंट में अपने शहर का नाम लिखें और इस पेज को अपने कम से कम 2 दोस्तों के साथ शेयर करें जो समाज में बदलाव देखना चाहते हैं। देखते हैं हमारी पहुँच कहाँ तक है! 🇮🇳 👇
​ #जुड़िये"

25/01/2026

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​"विचार मेरा, सुझाव आपका! 💡
​हर मुद्दे के दो पहलू होते हैं—एक जो हम देखते हैं और दूसरा जो आप महसूस करते हैं। इस पेज का उद्देश्य सिर्फ अपनी बात कहना नहीं, बल्कि आपकी राय से कुछ नया सीखना भी है। 🤝

25/01/2026

📢 यूजीसी एक्ट 2026: समानता या नया संकट? आवाज़ उठाना ज़रूरी है! 📢

​विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी नए 'Equity Regulations, 2026' उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नई बहस खड़ी कर रहे हैं। समानता (Equity) के नाम पर लाए गए ये नियम कैंपस के शांतिपूर्ण और निष्पक्ष माहौल के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।
​हमें इस एक्ट का विरोध क्यों करना चाहिए? (मुख्य बिंदु):

​1. 'झूठी शिकायतों' के लिए कोई सजा नहीं:
पुराने नियमों में झूठी या द्वेषपूर्ण शिकायत करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान था। लेकिन 2026 के नए नियमों में इस सुरक्षा चक्र को हटा दिया गया है। इससे कानून के दुरुपयोग की संभावना बढ़ गई है, जिससे किसी भी निर्दोष छात्र या शिक्षक को निशाना बनाया जा सकता है।

​2. एकतरफा और पक्षपाती समितियाँ:
इक्विटी समितियों (Equity Committees) के गठन में संतुलन का अभाव है। यदि शिकायत निवारण समितियों में सभी वर्गों का निष्पक्ष प्रतिनिधित्व नहीं होगा, तो लिए गए निर्णय पारदर्शी और न्यायसंगत कैसे हो सकते हैं?
​3. अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रहार:

'भेदभाव' की परिभाषा इतनी अस्पष्ट और व्यापक रखी गई है कि कैंपस में होने वाली सामान्य शैक्षणिक बहस या असहमतियों को भी 'उत्पीड़न' का नाम दिया जा सकता है। यह अकादमिक स्वतंत्रता को खत्म करने जैसा है।
​4. संस्थानों की स्वायत्तता का हनन:

इन नियमों के उल्लंघन पर सीधे फंड रोकने या मान्यता रद्द करने जैसी कठोर धमकियाँ दी गई हैं। यह संस्थानों को डराने और उन्हें स्वतंत्र रूप से कार्य करने से रोकने का एक तरीका है।
​हमारी मांगें:

​⚖️ निष्पक्ष जांच: कानून ऐसा हो जो हर छात्र के साथ न्याय करे, चाहे वह किसी भी वर्ग का हो।
​🚫 दुरुपयोग पर रोक: झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान वापस जोड़ा जाए।

​🤝 सबका साथ: समितियों में छात्रों और शिक्षकों के सभी वर्गों का आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो।
​शिक्षा संस्थानों को राजनीति का अखाड़ा और निगरानी शिविर (Surveillance Zone) मत बनाइए। समानता का मतलब किसी एक को विशेषाधिकार देना और दूसरे को असुरक्षित करना नहीं होता!

​जागो छात्रों, जागो शिक्षकों! आज चुप रहे तो कल न्याय के लिए जगह नहीं बचेगी।

25/01/2026

न कोई ईर्ष्या, न कोई द्वेष, हम सबकी एक मांग .

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