18/05/2024
अंतिम पोस्ट
विवेक भाई चूंकि अब उपवास रखते हुए मोक्ष प्राप्ति के मार्ग पर अग्रसर है इसलिए अब इसके बारे में अब बहुत कुछ नहीं लिखा जाएगा। जल उपवास रखते हुए 46 साल में ही विवेकांडू भाई एकदम बुढ़ाने लगा है। मतलब इस आदमी का भी दुःख देखिए काम धाम क्या करता है कुछ नहीं मालूम, कभी जूस बनाने की विधि बताता है, कभी सलाद कभी भोजन कभी पैदल चलना दौड़ना। यही सब करते रहता है। कुछ और काम धाम जीवन रूपी जिम्मेदारी कुछ है ही नहीं। घर जमाई बनकर आस्ट्रेलिया में बैठा हुआ है। कोई बात करने को दोस्त यार नहीं, रिश्तेदार नहीं, ऐसा दुख प्रभु किसी को न दे। इसलिए भी इसका चेहरा बुढ़ाने लगा है। आदमी बिना सामाजिक हुए स्वस्थ नहीं रह सकता है। विडंबना देखिए कि ये महान आदमी खुद को सामाजिक यायावर कहता था, आज क्या हालत बना रखी है।
अकेले रहते हुए वहां आस्ट्रेलिया में पगलाता रहता है इसलिए दिन रात बस सोशल मीडिया में ही नये नये दोस्त यार खोजते रहता है, चूंकि यह विदेश में रहता है तो कोई नया नवेला युवा इसे बड़ा भौकाली समझ कर कमेंट करके तारीफ करता है और उत्सुकता वश कुछ पूछता है तो अगला तुरंत नंबर दीजिए चर्चा करते हैं कहने लगता है और घंटों उसका समय लेता है और सिर्फ बकैती करते हुए उसका ब्रेनवाश करता है क्योंकि आदमी वहां पूरा खाली है, घर जमाई लोग और क्या ही करेंगे। और जैसे ही इसे लगता है कि अब जीने लायक कुछ नहीं बचा, खतरा महसूस करता है तो फिर भारत लौटने की तिथि घोषित करने लगता है, फलां फलां किताबें छापने की बात करता है, पिछले 5 सालों से अपना पीआर बनाए रखने के लिए यही सब जुमलेबाजी कर रहा है। लोग भी अब मजा लेने लगे हैं, आइए भारत में स्वागत हैं कहते रहते हैं, किताब की बात करता है तो किताब की प्रतीक्षा है कह देते हैं, भाई को पूरा खुश रखते हैं।
अंत में हमारी ओर से भी भाई को अपनी आने वाली किताबों के लिए अग्रिम शुभकामनाएँ, और भारत आने की भी शुभकामनाएँ, जल्द आइए और यहां सामाजिक कार्यों की लड़ी लगा दीजिए।
आपके इंतजार में प्रतीक्षारत....