21/05/2020
मारा गया गिलानी से भी कट्टर अलगाववादी अशरफ सहराई का आतंकी बेटा जुनैद सहराई
जम्मू कश्मीर में अलगाववाद की आग लगा रहे अलगावदियों के कारण कई युवा आतंकवाद का रास्ता पकड़ लेते हैं. इनमें से कुछ आतंकवाद का असली चेहरा देखकर सेना की मदद से आम जिंदगी में लौट आते हैं, तो कुछ मुठभेड़ में अपनी जान गंवा देते हैं. लेकिन इन सब के बीच आग लगाने वाले अलगाववादी और उनका परिवार सुरक्षित अपने घरों में बैठा रहता है.
ऐसे ही अलगाववादियों में से एक है अशरफ सहराई. अशरफ सहराई तहरीक-ए-हुर्रियत (Tehreek-e-Hurriyat) का प्रमुख है और एक वरिष्ठ अलगाववादी भी. अशरफ सहराई के बेटे जुनैद सहराई (Junaid Sehrai) ने दो साल पहले आतंक का रास्ता पकड़ा था, जिसके बाद वह हिजबुल मुजाहिदीन में रियाज नायकू के बाद दूसरा सबसे बड़ा कमांडर बन गया था. अब रियाज को मार गिराए जाने के चंद दिनों बाद मंगलवार को सुरक्षाबलों ने जुनैद को भी एक मुठभेड़ में मार गिराया है.
यह पहली बार है जब किसी बड़े अलगाववादी के आतंकी बेटे को मुठभेड़ में मार गिराया गया हो. जुनैद को उसके एक साथी के साथ श्रीनगर के नवाकदल के पास रातभर चली एक मुठभेड़ के बाद मार गिराया गया. श्रीनगर (Srinagar) में साल 2018 के बाद पहली बार कोई मुठभेड़ हुई, जिसमें श्रीनगर का लिस्टेड आतंकी जुनैद मारा गया.
जुनैद की मौत के बाद अलगाववादी नेता और उसके पिता अशरफ सहराई को भी यह संदेश पहुंच गया होगा कि आतंकवाद का रास्ता पकड़ने वालों का अंजाम यही होगा. मालूम हो कि अशरफ को गिलानी से भी कट्टर अलगाववादी माना जाता है.
आतंकी जुनैद सहराई ने कश्मीर विश्वविद्यालय से एमबीए की अपनी डिग्री पूरी की थी. लाइव हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर के मुताबिक अशरफ सहराई अधिक कट्टर माने जाते हैं. उन्होंने बेटे के आतंकी बनने के बाद मीडिया इंटरव्यू में कहा था कि जम्मू और कश्मीर की मौजूदा पीढ़ी पढ़ी-लिखी है. यह पीढ़ी अपना रास्ता खुद चुन सकती है. भारत सरकार को इस बात का अहसास होना चाहिए कि आज की पीढ़ी 1950 की नहीं है, जब शेख अब्दुल्ला लोगों की अगुआई कर रहे थे. उन्होंने कहा था कि यह पीढ़ी 1990 की है. ये पीढ़ी हर बात समझती है. वे लोग किसी दबाव को नहीं सहेंगे. अगर उनका अधिकार छीना जाता है तो वह सवाल करते हैं और लड़ने के लिए बंदूक उठाते हैं.
बता दें कि अलगाववादी संगठन तहरीक-ए-हुर्रियत के अध्यक्ष अशरफ सहराई ने 23 मार्च, 2018 को श्रीनगर के सदर पुलिस स्टेशन में बेटे जुनैद की गुमशुदगी की सूचना दी थी. तब जुनैद की उम्र 28 साल थी. पुलिस ने उनकी सूचना पर जुनैद की तलाश शुरू की थी. लेकिन 24 घंटे बाद ही आतंकी बने जुनैद की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी. उसके हाथों में एके-47 राइफल थी.
अशरफ सहराई ने बेटे जुनैद से आतंकवाद से दूर रहने की अपील करने से भी मना कर दिया था. उस समय जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद्य ने भी उनसे अपील की थी कि वह अपने बेटे से आतंक छोड़ने की अपील करें. लेकिन उन्होंने मना कर दिया था. बता दें कि यह पहला ऐसा मामला है, जब जम्मू कश्मीर के किसी अलगाववादी नेता का बेटा आतंकी संगठन में शामिल हुआ हो.