05/09/2021
शिक्षक दिवस पर राष्ट्र पिता,व राष्ट्र माता को शत शत नमन।
👉5 सितम्बर ( शिक्षक दिवस ) पर विशेष तथ्य*
आज मै विदेशी मूल के'' *सर्वपल्ली राधाकृष्णन* '' और मूलनिवासी
बहुजन '' *राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले''*
दोनो के ''एजुकेशन'' के लिए किये गए कार्यो
को बताउंगा ,
फिर फैसला आपलोग ही करना की किसका
जन्मदिन ''राष्ट्र गुरु'' / टीचर दिवस के रूप में
मनाना चाहिए ,
1)तथाकथित सर्वपल्ली राधाकृष्णन के पैदा
होने के 40 साल पहले से ही ''राष्ट्रपिता
ज्योतिराव फुले'' ने आधुनिक भारत में एजुकेशन के
फिल्ड में क्रांति सुरु कर दी थी (सबूत =
''राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले'' का जन्म 11
अप्रैल 1827 में हुआ और उन्होंने क्रांति की
सुरुवात 1848 को कर ही दिया जबकि
विदेशी ब्राह्मण जात ''सर्वपल्ली
राधाकृष्णन'' का जन्म 5 sep 1888 को हुआ मतलब
फुले की क्रांति के 40 साल बाद )!
2)''राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले'' ने 1848 से
शुरू कर 4 साल के अन्दर ही करीब 20 स्कूल खोल
डाले ,जब की ब्राह्मण सर्वपल्ली ने एक भी स्कूल
नहीं खोला !
3)''राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले ने पिछड़ी
जात के लोगो को बिना पैसे लिए एजुकेशन
दिया ,जब की ब्राह्मण श्रेष्ठ सर्वपल्ली ने
जिंदगी भर पैसे की लालच में लोगो को
पढ़ाया !
4)''राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले'' ने खुद की
जेब से पैसे खर्च कर लोगो को education दी
,जबकि उच्चगवर्णी सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने एजुकेशन देने के
नाम पर खूब पैसा कमाया !
5)गाव देहातो में ''राष्ट्रपिता
ज्योतिराव फुले'' ने 20 स्कूल खोले ,जब की
ब्राह्मण जात सर्वपल्ली गावो में स्कूल खोलने
गया ही नहीं
6)सबको बैज्ञानिक सोच वाली एजुकेशन
''राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले ने दिया ,जब
की ब्राह्मण सर्वपल्ली ने ''ब्राह्मण
धर्म'' (हिन्दू धर्म) की गैर बराबरी और
अंधविश्वास वाली एजुकेशन का कट्टर समर्थक
था !
7)''बालविवाह'' का विरोध और ''विधवा
विवाह'' को बढ़ावा दिया "'राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले ने जबकि
ब्राह्मण सर्वपल्ली जी बाल विवाह का
समर्थक थे,और विधवा विवाह के
विरोधी !
8)महिलाओं के लिए पहला स्कूल अगस्त 1848 को
''राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले ने खोला जब
की ब्राह्मणी व्यवस्था के समर्थक सर्वपल्ली स्त्री एजुकेशन के
विरोधी थे!
9)''राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले ने अपनी
पत्नी को सबसे पहले एजुकेशन दी ,जबकि
सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपनी औरत को ही अनपढ़ बनाए रखे!
उपर्युक्त में आपको अपना विचार सादर आमंत्रित है।