08/06/2025
जसरोटा राजवंश का गौरवशाली इतिहास (1019 ईस्वी – 1836 ईस्वी)जसरोटा राजवंश भारत के प्राचीन और गौरवशाली राजवंशों में से एक रहा है, जिसकी स्थापना महाराजा जसदेव सिंह जसरोटिया जी ने 1019 ईस्वी में की थी। यह राजवंश डोगरा संस्कृति, वीरता, धर्मनिष्ठा और जनसेवा का प्रतीक रहा है। महाराजा जसदेव सिंह जी न केवल एक महान योद्धा थे, बल्कि एक कुशल प्रशासक, राष्ट्रनिर्माता और संस्कृति प्रेमी शासक भी थे। जसरोटा राजवंश की स्थापना:महाराजा जसदेव सिंह जी ने 1019 ईस्वी में जसरोटा नगरी की नींव रखी और उसे एक शक्तिशाली रियासत में परिवर्तित किया। जसरोटा धीरे-धीरे एक समृद्ध सांस्कृतिक, सैन्य और प्रशासनिक केंद्र बना। ऐतिहासिक किले:इस महान राजवंश ने कई भव्य और सुरक्षित किलों का निर्माण करवाया, जो आज भी डोगरा शौर्य की गवाही देते हैं:जसरोटा किला – राजवंश की राजधानी और रणनीतिक केंद्र।मस्तगढ़ किला – सुरक्षा और सैन्य अभियानों का प्रमुख स्थल।लखनपुर किला – व्यापारिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण।बसोहली किला – कला, संस्कृति और पहाड़ी चित्रकला का पालक। 26 से अधिक महान शासक:1019 ईस्वी से लेकर 1836 ईस्वी तक, जस्रोटा रियासत पर 26 से अधिक डोगरा महाराजाओं ने शासन किया। इन सभी शासकों ने जनता की भलाई, क्षेत्रीय सुरक्षा, मंदिर निर्माण, संस्कृति संरक्षण और न्याय प्रणाली को मजबूती प्रदान की। प्रमुख विशेषताएँ:धर्म और संस्कृति के संरक्षकबहादुरी और युद्ध कौशल में निपुणलोकसेवा और न्यायप्रियता में अग्रणीकलाओं एवं स्थापत्य शैली के संरक्षक🌄 जसरोटा की विरासत:आज भी जस्रोटा राजवंश की कीर्ति जम्मू-कश्मीर की भूमि में जीवित है। उनके द्वारा बनाए गए किले, मंदिर, संस्कृति और परंपराएं वर्तमान पीढ़ियों को प्रेरणा देती हैं।"जहां न्याय की नींव हो जसदेव सिंह का राज,वहीं फूले डोगरों का स्वाभिमान और समाज।"वर्ल्ड Champion Powerlifter 🏆 Bablu Singh JasrotiaKathua J&K M no 9419160635