25/09/2024
कोटा डायरी
ज़िला व्यावहारिक प्रशिक्षण में मैंने कोटा रिपोर्ट किया। ऐसा शहर जहां बरसों पहले इंजीनियर बनने के सपने को संजोये आया था, उस वक़्त सोचा भी ना था इस शहर से दुबारा वास्ता वर्दी के साथ पड़ेगा। कई बार ख़्याल आया कि आईपीएस छोड़कर आईएएस के लिए कोशिश की जाये, उन्हीं उधेड़बुन में ट्रेनिंग भी चल रही थी। ख़ैर विचारों की इसी ख़यालात के बीच कोटा ट्रेनिंग का हिस्सा बना ।मैंने पुलिस गेस्ट हाउस में अपना बेग रखा ही था कि कुछ देर बाद कंट्रोल रूम से मेसेज आया-“ श्रीमान टाइगर सर का मेसेज है आप श्रीनाथपुरम स्टेडियम रिपोर्ट करिए। “मैं तुरंत रवाना हुआ, बार बार गूँजते कंट्रोल रूम के मेसेज से पता चला कि कोई हत्या हुई है। मेरे एसपी साहब अपने पिता के देहांत के कारण छुट्टी पर थे। मैं जैसे ही स्टेडियम की बाहरी रोड पर पहुँचा, पुलिस गाड़ियों का क़ाफ़िला, झिलमिलाती पुलिस बतियाँ , साइरन की आवाजे , मीडिया का जमावड़ा । इन सब के बीच मैं गाड़ी से उतारा। मेरे सामने मेरे एसपी दीपक भार्गव सर वर्दी में सड़क के बीच खड़े थे, इस तरह मैने पहला सैलूट मेरे एसपी को क्राइम सीन पर किया। ये रोंगटे खड़े कर देने वाला एहसास था। थोड़ी दूरी पर मृत शरीर था, रंजीसवश किसी गैंग के हाथों हत्या हुई। इस घटना के बाद मौक़े की कार्यवाही के बाद एसपी सर रात्रि के बाद देर सवेरे तक थाने में डटे रहे, ताकि बेहतर प्लानिंग के साथ मुलज़िम गिरफ़्तार हो। इस घटना ने अंतर्मन पर गहरे प्रभाव छोड़े। छुट्टी पर होने के बावजूद एसपी सर छुट्टी रद्द कर घटना स्थल आये, बड़ी आपराधिक घटना के बाद पुलिस टीम अपने पुलिस कप्तान के हार्डवर्क को देखती और महसूस करती है, तीसरा संगठित अपराध के द्वारा किया गया अपराध अन्य अपराधों की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है, अतः उसकी कसावट उसी गंभीरता से हो।
अल सुबह एसपी सर क़रीब 4 बजे थाने से आवास के लिए प्रस्थान हुए। उन्हें गाड़ी में छोड़ते वक़्त सैलूट किया। सब उधेड़बुन ख़त्म हुए , पुलिस से बेहतर कुछ नहीं।
दीपक सर को तहे दिल से शुक्रिया ।
उनके सामने हमेशा प्रोबेशनर होने का एहसास होता है।
जय हिन्द