17/08/2024
संदर्भ - कोलकाता में डॉक्टर का बलात्कार और हत्या
*****************************************
भारतीय समाज स्त्रियों के प्रति कठोर और असंवेदनशील है इसलिए ये घटनाएँ दरिन्दगी की सीमा पार करती जा रहीं हैं ,सरकारें भी पुरुषवादी सरकारें हैं उनका नज़रिया भी असंवेदनशील और महिलाओं के मसले पर हद दर्ज़े की लापरवाही से भरा पड़ा है .
राजनैतिक दलों से जुड़ी महिलाएं अपने राजनैतिक हितों को देखते हुए अपनी पार्टी के ख़िलाफ़ बोल नहीं पातीं . उन्हें भी सदियों से पुरुषसत्ता के तले ख़ून के घूंट पीना सिखाया गया है - चाहे घर हो या बाहर -
अक्सर ही महिला मुद्दों पर महिलाएं बेबस ख़ामोशी में घुट कर रह जाती हैं .
कोलकाता डॉक्टर रेप मर्डर केस में CBI ने दो पीजी ट्रेनी डॉक्टर और एक हाउस स्टाफ को पूछताछ के लिए बुलाया है. घटना वाली रात ये लोग पीड़ित डॉक्टर के साथ ड्यूटी पर थे. राधागोविंद कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को हिरासत में ले लिया गया है.जिन्हें राज्य सरकार ने दूसरे कॉलेज़ में ट्रान्सफ़र करके पल्ला झाड़ने का बेहूदा प्रयास किया था. अब उन्हें बर्ख़ास्त कर दिया गया है . गिरफ़्तार आरोपी संजय रॉय को घटना का सीन रीक्रिएट करने के लिए राधागोविंद कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया है .संजय रॉय को 9 अगस्त को ही पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया था.
वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी एक नया आदेश जारी किया है - मंत्रालय ने कहा है कि मेडिकल संस्थानों को हेल्थकेयर वर्कर्स पर हमले के 6 घंटे के अंदर ही FIR दर्ज़ करानी होगी. मंत्रालय का ये फ़ैसला मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर से हुए रेप-मर्डर मामले और 14 अगस्त को इसी कॉलेज में हुई हिंसा को लेकर आया है .
सुलगते सवाल हैं लेकिन जवाब देने वाले सब ज़िम्मेदार आराम से हैं उन्हें कोई बेचैनी नहीं .
राम रहीम गुरमीत को बार बार पैरौल दिए जाने पर ज़िम्मेदार लोग ख़ामोश हैं . रेप और तमाम आपराधिक कृत्यों में क़ैद गुरमीत को 2020 से अब तक 10 बार फरलो या पैरोल मिल चुकी है. अब हरियाणा चुनाव से ठीक पहले फिर राम रहीम के बाहर आने से सियासी गलियारे में चर्चाएं भी जोरो पर हैं. वो अक्सर ही चुनावों से पहले पैरौल पा जाता है . सचमुच, जेल न हो गई सराय खाना हो गया. क़ानून न हुआ तमाशा हो गया. सजा न हुई किश्तों की दिहाड़ी हो गई.
कौन कहता है क़ानून सबके लिए बराबर होता है. छोटा, बड़ा, अमीर ग़रीब, कमज़ोर ताक़तवर में फ़र्क नहीं करता. इस एक अकेले शख़्स ने ये साबित कर दिया, कि भले ही कोई रेप करे, किसी का कत्ल करे. 20-20 साल की दो दो उम्र क़ैद की सजा झेले, तो भी जेल के बाहर आराम से आज़ाद रहा जा सकता है.
और जिन्हें जेल भेजा ही नहीं गया ,जिन पर कोई कार्यवाही की ही नहीं गई बल्कि उनके आपराधिक कृत्यों को नज़रंदाज़ करते हुए उनके प्रमोशन किये गए 😠 ऐसे उदाहरण भी बहुत ज़्यादा हैं .
हम कैसे भूल सकते हैं महिला पहलवानों के आंदोलन का हश्र 😥😠
घर में ही देख लीजिए - ज़्यादातर पुरुष परजीवी होते हैं .उन्हें एक स्त्री चाहिए जो बाथरूम में उनके अंडर गारमेंट्स पहुंचाये. जो टेबिल पर उन्हें चाय नाश्ता भोजन परोसे , उनके जूठे बर्तन टेबल से उठाए ,उन्हें मांजे धोए .यहां तक कि पुरूष (पिता,पति,बेटा कोई भी) जब बाहर से घर आयें तो उन्हें पानी का गिलास दे. यहां तक कि बिस्तर पर भी स्त्री की इच्छा अनिच्छा का कोई मतलब होता नहीं.
तब इन स्थितियों के चलते स्त्रियों के प्रति मान सम्मान, केयर ,बराबरी का भाव वग़ैरह ये सब दावे - पाखण्ड के सिवा और कुछ नहीं.
जब तक ये पाखण्ड जारी है स्त्री 'यूज़ एंड थ्रो' है .
उपयोग और उपभोग की वस्तु है . जी हाँ वस्तु .
उसे इन्सान समझते मानते तो परिदृश्य इतना बदसूरत नहीं होता .
स्त्रियों पर अत्याचार ,उनके प्रति जघन्य अपराध, उनका मानसिक शारीरिक शोषण करने के लाख़ बहानों को आप उचित ठहराते रहिए लेकिन ये सच है पुरुषवादी समाज अभी सभ्यता की बेहद निचली पायदान पर है उसे अभी शिक्षित और सभ्य होने के लिए कड़े क़ानूनों और कड़े परिश्रम की तुरन्त और बहुत ज़्यादा ज़रूरत है .
इस उस पर आरोप प्रत्यारोप का मेरा कोई इरादा नहीं है .
बात कड़वी और स्पष्ट है जब तक समाज का पुरुषवादी नज़रिया बदलेगा नहीं - स्त्रियों के साथ ख़ून और आंसुओं से भरी दरिन्दगी की ये घटनाएं घटती रहेंगी .
कब तक उनके शोक में मोमबत्तियां जला कर हम अपने फ़र्ज़ की इतिश्री करते रहेंगे .