04/01/2026
देवरी (निवाई) में मिले प्राचीन देग से जुड़ी ऐतिहासिक मान्यता की कर रहे कल्पना , दिल्ली–जयपुर की सेनाओं से जुड़ा बताया जा रहा खजाना
टोंक | निवाई
राजस्थान के टोंक जिले की निवाई तहसील के देवरी गांव में हाल ही में जमीन से मिले प्राचीन देग (घड़े) को लेकर अब ऐतिहासिक मान्यताओं और लोककथाओं की चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय जानकारों और ग्रामीणों का दावा है कि यह देग मध्यकालीन दौर में दिल्ली और जयपुर की सेनाओं द्वारा गुजरात से लूट कर लाए गए खजाने को छुपाने के लिए गाड़ा गया हो सकता है।
🏺 सैन्य अभियानों से जुड़ी मानी जा रही कहानी
इतिहासकारों के अनुसार, मध्यकाल में जब दिल्ली सल्तनत, मुगल या राजपूत सेनाएँ गुजरात की ओर सैन्य अभियानों पर जाती थीं, तो युद्ध के दौरान प्राप्त सोना-चांदी, सिक्के और बहुमूल्य वस्तुएँ रास्ते में ही सुरक्षित स्थानों पर छुपा दी जाती थीं।
रेगिस्तानी और अर्ध-पठारी क्षेत्रों वाले राजस्थान को इसके लिए उपयुक्त माना जाता था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि देवरी क्षेत्र पुराने सैन्य और व्यापारिक मार्गों पर स्थित रहा है, जिससे यहाँ ऐसे गुप्त धन-पात्र गाड़े जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
⚔️ सैनिकों द्वारा धन छुपाने की प्रथा
ऐतिहासिक दस्तावेजों और लोककथाओं के अनुसार:
सैनिक लूट का पूरा हिस्सा राजा या सरदार को नहीं देना चाहते थे
युद्ध में मृत्यु का खतरा रहता था
वापसी से पहले धन को अस्थायी रूप से जमीन में गाड़ दिया जाता था
कई बार सैनिक लौट नहीं पाए और खजाना सदियों तक जमीन में ही दबा रह गया।
🏛️ प्रशासनिक जांच जारी
हालांकि प्रशासन और पुरातत्व विभाग की ओर से अभी तक आधिकारिक रूप से यह पुष्टि नहीं की गई है कि देग में वास्तव में सोना या बहुमूल्य धातु है, लेकिन इसे पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण खोज माना जा रहा है। क्षेत्र को सील कर जांच की जा रही है।
📌 लोककथा या इतिहास – फैसला जांच के बाद
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैज्ञानिक परीक्षण और ऐतिहासिक अध्ययन पूरे नहीं हो जाते, तब तक इसे ऐतिहासिक संभावना से जुड़ी लोकमान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
यह केवल कल्पना मात्र है इसका सचाई से कोई सम्बन्ध नही है क्योकि अभी जाॅच होना बाकी है .....