Narendra Upadhyay

Narendra Upadhyay ।।कर्म ही पूजा है।।
"सत्यमेव जयते"
Love U all
उदार हृदय वाले लोगों की तो (सम्पूर्ण) धरती ही परिवार है।

जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं भाई Ankit Bhardwaj ji cmo और Dharmi meena ji
12/07/2026

जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं भाई Ankit Bhardwaj ji cmo और Dharmi meena ji

30/06/2026

प्रभु की कृपा से सेवा का संकल्प
— नरेन्द्र उपाध्याय
जीवन में कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं जो इंसान की पूरी दिशा बदल देती हैं। आज मैं जो भी कर रहा हूँ, वह मेरी योग्यता नहीं, बल्कि प्रभु की असीम कृपा और उनके दिए हुए अवसर का परिणाम है।
एक समय ऐसा था जब मेरा जीवन भी सामान्य लोगों की तरह परिवार, काम और भविष्य की योजनाओं में व्यतीत हो रहा था। लेकिन धीरे-धीरे प्रभु ने मुझे यह एहसास कराया कि मनुष्य का जीवन केवल अपने लिए कमाने और जीने के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में आशा, विश्वास और सेवा का दीप जलाने के लिए मिला है।
जीवन में कई कठिन परीक्षाएँ आईं। ऐसे क्षण भी आए जब सब कुछ समाप्त होता हुआ दिखाई दिया। लेकिन हर बार ऐसा लगा मानो किसी अदृश्य शक्ति ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे गिरने से बचा लिया। उसी समय मन में यह संकल्प जागा कि यदि प्रभु ने मुझे नया जीवन दिया है, तो यह जीवन अब केवल उनका होगा।
मैंने निर्णय लिया कि अपने शेष जीवन को धर्म, सेवा और समाज के लिए समर्पित करूँगा। धीरे-धीरे प्रभु के धामों की यात्राएँ शुरू हुईं, संतों का सान्निध्य मिला, शास्त्रों का अध्ययन किया और जो कुछ भी सीखा, उसे लोगों तक पहुँचाने का प्रयास शुरू किया।
आज प्रभु की कृपा से मुझे हजारों श्रद्धालुओं से जुड़ने का सौभाग्य मिला है। अनेक परिवारों को धार्मिक यात्राएँ करवाईं, अनेक लोगों को सनातन संस्कृति, सेवा और आध्यात्मिक जीवन से जोड़ने का अवसर मिला। जब किसी श्रद्धालु की आँखों में श्रद्धा, संतोष और आनंद देखता हूँ, तो लगता है कि यही मेरे जीवन की सबसे बड़ी कमाई है।
मैं किसी संस्था का प्रचार नहीं करता, न ही स्वयं को बड़ा बताना चाहता हूँ। मैं तो केवल प्रभु का एक छोटा-सा सेवक हूँ। यदि मेरे माध्यम से किसी एक व्यक्ति के जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन आता है, तो मैं अपने जीवन को सफल मानता हूँ।
मेरा विश्वास है—
"नर सेवा ही नारायण सेवा है।"
यदि आपके मन में भी ब्रज, सनातन संस्कृति, सेवा, आध्यात्मिक यात्रा या समाज के लिए कुछ करने की भावना है, तो आइए, हम सब मिलकर इस पुण्य कार्य में सहभागी बनें।
मैं आपका मार्गदर्शक नहीं, आपका अपना साथी बनकर साथ चलना चाहता हूँ।
आपका अपना
नरेन्द्र उपाध्याय
सनातन सेवा ही जीवन का उद्देश्य

30/06/2026

प्रभु ने जीवन दिया... इसलिए यह जीवन अब समाज और सनातन की सेवा के नाम
– नरेन्द्र उपाध्याय
हर व्यक्ति के जीवन में एक ऐसा मोड़ आता है, जहाँ उसे तय करना होता है कि वह केवल अपने लिए जिएगा या दूसरों के लिए भी।
मेरे जीवन में भी ऐसा ही एक मोड़ आया।
एक समय मैं भी अपने परिवार, काम और भविष्य की योजनाओं में व्यस्त था। समाज सेवा की इच्छा तो थी, लेकिन उसे जीवन का उद्देश्य बनाने का साहस नहीं था। फिर प्रभु ने ऐसी परिस्थितियाँ पैदा कीं कि मुझे यह समझ में आ गया—जो कुछ भी हमारे पास है, वह उनका दिया हुआ है और एक दिन सब कुछ यहीं रह जाएगा।
उसी दिन मैंने मन ही मन संकल्प लिया—
"अब मेरा जीवन केवल मेरे लिए नहीं, बल्कि प्रभु, समाज और मानवता की सेवा के लिए होगा।"
मैंने छोटे-छोटे कार्यों से शुरुआत की। लोगों की समस्याएँ सुनीं, ज़रूरतमंदों की सहायता की, युवाओं को जोड़ने का प्रयास किया, धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय हुआ। हर सेवा के बाद ऐसा लगा कि देने वाला मैं नहीं, बल्कि प्रभु हैं; मैं तो केवल एक माध्यम हूँ।
आज जब पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो लगता है कि प्रभु ने मेरी कल्पना से कहीं अधिक दिया। सैकड़ों नहीं, हजारों लोग प्रेम और विश्वास के साथ जुड़े। अनेक सामाजिक और धार्मिक कार्यों में साथ मिला। हर नया परिवार मेरे लिए एक रिश्ते जैसा बन गया।
मैं कोई संत, महात्मा या बड़ा समाजसेवी नहीं हूँ। मैं भी आपकी तरह एक साधारण व्यक्ति हूँ, जिसने बस इतना निर्णय लिया कि शिकायत कम और सेवा अधिक करनी है।
मेरा विश्वास है—
किसी भूखे को भोजन देना, किसी निराश व्यक्ति को हिम्मत देना, किसी बुजुर्ग का सम्मान करना, किसी युवा को सही दिशा देना और सनातन संस्कृति की सेवा करना—यही सच्ची पूजा है।
यदि मेरे किसी कार्य, किसी विचार या किसी प्रयास से आपके मन में सेवा का भाव जागता है, तो यही मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
आइए, हम सब मिलकर ऐसा समाज बनाएँ जहाँ धर्म केवल मंदिरों तक सीमित न रहे, बल्कि हमारे व्यवहार, सेवा और संस्कारों में दिखाई दे।
नर सेवा ही नारायण सेवा है।
आपका अपना,
नरेन्द्र उपाध्याय

30/06/2026

"कभी-कभी भगवान हमारी सारी योजनाएँ इसलिए बदल देते हैं, क्योंकि उन्हें हमारी ज़िंदगी से कुछ बड़ा काम लेना होता है..."
आज जब लोग मुझसे पूछते हैं—
"नरेन्द्र जी, आप दिन-रात समाज सेवा, सनातन धर्म और लोगों की मदद में क्यों लगे रहते हैं? आपको इससे क्या मिलता है?"
तो मैं मुस्कुराकर सिर्फ इतना कहता हूँ—
"मुझे कुछ नहीं मिलता... मुझे तो वह लौटाने का अवसर मिलता है, जो प्रभु ने मुझे बिना माँगे दिया है।"
सच कहूँ तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा जीवन इस दिशा में जाएगा। मैं भी एक सामान्य व्यक्ति था। अपने परिवार, काम और भविष्य की चिंता करता था। लेकिन प्रभु की इच्छा कुछ और ही थी।
धीरे-धीरे जीवन ने मुझे ऐसे अनुभव दिए जिन्होंने मेरी सोच बदल दी। मुझे महसूस हुआ कि धन, पद और प्रतिष्ठा सब यहीं रह जाते हैं, लेकिन किसी की आँखों के आँसू पोंछ देने का पुण्य हमेशा साथ चलता है।
उसी दिन मैंने निश्चय किया कि अब जितनी साँसें प्रभु ने दी हैं, वे केवल मेरे लिए नहीं, बल्कि समाज और सनातन धर्म की सेवा के लिए होंगी।
मैंने बिना किसी स्वार्थ के लोगों के बीच जाना शुरू किया। किसी को मार्गदर्शन चाहिए था, किसी को सहयोग, किसी को केवल यह विश्वास कि वह अकेला नहीं है। हर दिन मुझे लगा कि सेवा करने वाला मैं नहीं, बल्कि प्रभु मुझे माध्यम बनाकर अपना कार्य करवा रहे हैं।
आज जब किसी माँ का आशीर्वाद मिलता है, किसी बुजुर्ग के चेहरे पर मुस्कान आती है, किसी युवा को सही दिशा मिलती है या कोई परिवार यह कहता है कि "आपके कारण हमारे जीवन में उम्मीद लौटी"—तो लगता है कि यही मेरी सबसे बड़ी कमाई है।
मैं किसी से कुछ लेने नहीं निकला हूँ। मैं तो लोगों का विश्वास जीतने निकला हूँ।
मेरा सपना है कि ऐसे लोग जुड़ें जो धर्म को केवल पूजा तक सीमित न रखें, बल्कि सेवा, संस्कार और मानवता को भी धर्म का हिस्सा मानें।
यदि आप भी मानते हैं कि जीवन का सबसे बड़ा सुख किसी के काम आने में है, तो आइए... हम साथ चलें।
हो सकता है हम दुनिया न बदल पाएँ, लेकिन किसी एक व्यक्ति की दुनिया ज़रूर बदल सकते हैं।
यही मेरा संकल्प है... यही मेरी साधना है... यही मेरे जीवन का उद्देश्य है।
आपका अपना
नरेन्द्र उपाध्याय
"नर सेवा ही नारायण सेवा है।"

30/06/2026

"जब भगवान किसी से बड़ा काम लेना चाहते हैं, तो पहले उसे जीवन का सही अर्थ समझाते हैं..."
– नरेन्द्र उपाध्याय
कभी मैंने भी सोचा था कि जीवन का उद्देश्य केवल परिवार, व्यवसाय और अपनी जिम्मेदारियाँ निभाना है। लेकिन समय के साथ प्रभु ने मुझे समझाया कि मनुष्य का जन्म केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाने के लिए भी हुआ है।
एक दिन मैंने स्वयं से प्रश्न किया—
"यदि आज मेरा जीवन समाप्त हो जाए, तो लोग मुझे किस बात के लिए याद करेंगे?"
इस प्रश्न ने मेरी पूरी सोच बदल दी।
मैंने निर्णय लिया कि अब जितना समय और सामर्थ्य प्रभु ने मुझे दिया है, उसे समाज, सनातन धर्म और मानव सेवा में लगाऊँगा।
शुरुआत आसान नहीं थी। कई लोगों ने कहा—"इससे क्या मिलेगा?" कुछ ने मज़ाक उड़ाया, कुछ ने रोकने की कोशिश की। लेकिन मैंने एक बात हमेशा याद रखी—
"सही रास्ते पर चलने वाले को सबसे पहले परीक्षा देनी पड़ती है, पुरस्कार बाद में मिलता है।"
धीरे-धीरे प्रभु ने ऐसे लोगों से मिलवाया जिनके आशीर्वाद ने मेरी हिम्मत बढ़ाई। हर दिन सेवा का दायरा बढ़ता गया। आज जब किसी श्रद्धालु के चेहरे पर संतोष देखता हूँ या कोई व्यक्ति कहता है कि "आपकी वजह से हमें नई प्रेरणा मिली", तो लगता है कि प्रभु ने मेरे जीवन को सार्थक बना दिया।
मैं कोई महान व्यक्ति नहीं हूँ। मैं भी आपकी तरह एक साधारण इंसान हूँ। फर्क सिर्फ इतना है कि मैंने अपने जीवन का उद्देश्य बदल लिया।
आज मेरा विश्वास पहले से कहीं अधिक मजबूत है—
धन से बड़ा दान, समय का दान है।
शब्दों से बड़ा उपदेश, अपना आचरण है।
और पूजा से बड़ी साधना, मानव सेवा है।
यदि आपके मन में भी समाज, राष्ट्र और सनातन के लिए कुछ करने की भावना है, तो आइए... हम एक परिवार बनकर इस यात्रा को आगे बढ़ाएँ।
आपका अपना
नरेन्द्र उपाध्याय
"सेवा ही साधना है, और साधना ही जीवन की सबसे बड़ी सफलता है।"

30/06/2026

"जिस दिन मैं इस दुनिया से जाऊँ... उस दिन लोग यह न कहें कि एक आदमी चला गया। बल्कि यह कहें कि एक ऐसा इंसान चला गया, जिसने बिना किसी स्वार्थ के लोगों के दिलों में जगह बनाई थी।"
मैं नरेन्द्र उपाध्याय हूँ।
न मैं कोई बड़ा नेता हूँ, न कोई प्रसिद्ध संत और न ही करोड़पति।
मैं एक साधारण इंसान हूँ, जिसने जीवन की एक सच्चाई बहुत जल्दी समझ ली—
खाली हाथ आए थे... खाली हाथ ही जाना है।
फिर क्यों न इस जीवन में कुछ ऐसे काम किए जाएँ, जिनकी खुशबू हमारे जाने के बाद भी लोगों के दिलों में बनी रहे?
इसी सोच ने मेरी ज़िंदगी बदल दी।
मैंने तय किया कि अब जहाँ तक संभव होगा, लोगों की मदद करूँगा, सनातन संस्कृति के लिए कार्य करूँगा, युवाओं को जोड़ूँगा, ज़रूरतमंदों के साथ खड़ा रहूँगा और धर्म तथा समाज सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाऊँगा।
मैं किसी से नाम, प्रसिद्धि या सम्मान नहीं चाहता।
मुझे सबसे अधिक खुशी तब मिलती है, जब किसी की आँखों में उम्मीद लौट आती है, किसी बुजुर्ग का आशीर्वाद मिलता है, कोई युवा सही रास्ते पर चलने का संकल्प लेता है या कोई परिवार यह महसूस करता है कि इस दुनिया में अभी भी निस्वार्थ लोग हैं।
मेरा विश्वास है—
भगवान मंदिरों में उतने ही मिलते, जितने किसी दुखी इंसान के चेहरे पर मुस्कान लाने में मिलते हैं।
यदि मेरी एक छोटी-सी कोशिश किसी एक व्यक्ति का जीवन बेहतर बना दे, तो यही मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।
मैं चाहता हूँ कि आने वाले वर्षों में एक ऐसा परिवार बने, जो जाति, राजनीति और स्वार्थ से ऊपर उठकर केवल सेवा, संस्कार और सनातन के लिए कार्य करे।
यदि आपके मन में भी यही भावना है, तो आइए...
हम परिचित नहीं, परिवार बनते हैं।
क्योंकि जीवन बहुत छोटा है, लेकिन अच्छे कर्मों की पहचान पीढ़ियों तक जीवित रहती है।
आपका अपना
नरेन्द्र उपाध्याय
🌿 "नाम कमाने से बड़ा काम है, विश्वास कमाना। और विश्वास केवल निस्वार्थ सेवा से मिलता है।"

निर्जला एकादशी की सभी भक्तजनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं..जय श्री राम
25/06/2026

निर्जला एकादशी की सभी भक्तजनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं..
जय श्री राम

18/06/2026

Address

Jaipur

Opening Hours

Monday 12am - 12pm
Tuesday 12am - 12pm
Wednesday 12am - 12pm
Thursday 12am - 12pm
Friday 9am - 5pm
Saturday 9am - 5pm
Sunday 9am - 5pm

Telephone

+919929092373

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Narendra Upadhyay posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share