18/04/2026
नारी शक्ति वंदन अधिनियम का कल पास न हो पाना मेरे लिए सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि एक महिला होने के नाते गहरी निराशा का कारण है। जब हम वर्षों से अपने अधिकारों, समान प्रतिनिधित्व और निर्णय लेने की शक्ति के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब इस तरह की रुकावटें दिल को चोट पहुंचाती हैं।
एक महिला के रूप में मैं यह महसूस करती हूं कि यह अधिनियम केवल कानून का एक मसौदा नहीं था, बल्कि हमारे सपनों, हमारी आवाज़ और हमारी भागीदारी को मजबूत करने का एक अवसर था। अगर किसी भी राजनीतिक कारण से इसे रोका गया, तो यह केवल एक पार्टी या विचारधारा की हार नहीं, बल्कि उन करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों पर आघात है जो बदलाव चाहती हैं।
हम महिलाओं को हमेशा कहा जाता है कि आगे बढ़ो, नेतृत्व करो, अपने हक के लिए खड़ी रहो। लेकिन जब हमारे सशक्तिकरण से जुड़े अहम फैसले ही राजनीति के बीच अटक जाएं, तो सवाल उठता है कि हमारी प्राथमिकता वास्तव में क्या है?
मैं यह नहीं कहती कि किसी एक दल को पूरी तरह दोषी ठहराना ही समाधान है, लेकिन यह जरूर कहना चाहूंगी कि महिलाओं के अधिकारों को राजनीति से ऊपर रखना चाहिए। हमें एकजुट होकर यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक केवल बहस का विषय न बनें, बल्कि जल्द से जल्द हकीकत बनें।
आज एक महिला के तौर पर मेरी आवाज़ यही कहती है — हमें हमारे अधिकार चाहिए, न कि केवल बाते वो भी सिर्फ़ राजनीति की कांग्रेस तथा अन्य विरोधी पार्टी वालो ने केवल विरोध करने के लिए ये सब किया मैं पूछना चाहती हूँ क्या सत्तर साल राज और इतने लंबे समय तक चुनाव जीत कर सरकार में क्या आप सिर्फ़ पुरुषों के वोट से ही गए थे क्या आपको महिला ने नहीं वोट किया था मैं तो कहना चाहती हूँ ये एक सुनहरा मौक़ा था सभी विपक्षी पार्टियो के लिए जो उन्होंने गवां दिया अब तो आप सिर्फ़ सपने में ही किसी महिला के वोट के अधिकारी बन सकते है जमीन पर तो आपको कोई महिला वोट नहीं करेगी और इस कृत्य के लिए आपको माफ भी नहीं किया जाएगा मैं हमेशा सोचती हूँ जो आज सही साबित होता दिख रहा है - महिला को उसके अधिकार देना सिर्फ़ बातो और भाषणों में ही होता रहता है सच में तो जब मौक़ा आता है तो कोई भी राजनीतिक पार्टी जो विपक्ष में होती है महिला का साथ देना नहीं चाहती सिर्फ़ और सिर्फ़ निचले स्तर की राजनीति ही करती है
डॉ रजनी भंडारी
१८-४-२०२६