भिक्षा मांग कर भोजन करना भारतीय परंपरा का प्राचीन काल से ही अंग रहा है। ऐसा करने वाले परिव्राजक कहलाते थे ।परन्तु यह रास्ता सबके लिये नहीं खुला था। यह केवल दार्शनिकों और संतों के लिये था। दार्शनिक मौलिक विचारक होते थे। उन्हें सोचने के लिये इतना समय चाहिये होता था कि उनके भरण पोषण का दायित्व समाज को लेना पड़ता था। संत अपने अहंकार को नष्ट करने और अपनी अकिंचनता को अंतरतम तक महसूस करने को भिक्षा मांग
कर खाते थे। वर्तमान समय के ऋषि दयानन्द और विवेकानन्द आदि भी इस दौर से गुज़रे। जैनियों और बौद्धों ने भिक्षा मांगी। इन परिस्थितियों में इस परंपरा में कुछ भी बुरा नहीं था। यह नागरिकों और संतों के बीच का एक silent social contract होता था और इससे दोनों पक्ष लाभान्वित होते थे। अब यह अपराध है। मप्र भिक्षावृत्ति निवारण अधिनियम 1973 के तहत भीख मांगना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। इस कानून के तहत भिखारियों के पुनर्वास और ट्रेनिंग देकर सामान्य जीवन में लौटने के उपाय करने का भी प्रावधान है। इसके लिए नए कानून बनाने की कवायद भी चल रही है। इसी के तहत भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने देश को भिक्षुक मुक्त बनाने के लिए 2021 में देश के 10 प्रमुख शहरों को बैगर फ्री यानी भिक्षुक मुक्त करने का पायलेट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसमें मुंबई, हैदराबाद, चैन्नई, कोलकाता, बैंगलोर, नागपुर, लखनऊ, पटना, हैदराबाद के साथ इंदौर को भी शामिल किया गया है। इंदौर में इस पायलेट प्रोजेक्ट के लिए नगर निगम को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है। इंदौर नगर निगम ने संस्था प्रवेश को इस अभियान से जोड़कर शहर में नो-भिक्षा अभियान शुरू किया है। इसके तहत भिक्षुकों को भिक्षा नहीं की सीख देकर उनका पुनर्वास किया जा रहा है।
इंदौर नगर निगम इसकी नोडल एजेसी हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन विभाग, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक न्याय विभाग, व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, यातायात विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग इस अभियान के स्टेक होल्डर्स हैं। भिक्षुक मुक्त इंदौर प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी ने 31 मई 2022 को NO भिक्षा अभियान लांच किया था। 1 जून 2022 से यह अभियान धरातल पर उतारकर हमने इंदौर के पूर्ण रूप से भिक्षुक मुक्त करने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया है। नगर निगम और संस्था प्रवेश के जियो टैगिंग सर्वे के मुताबिक इंदौर शहर में करीब 3500 भिक्षुक हैं। इनमें से अब तक 512 को रेस्क्यू कर लिया गया है। इनमें से ज्यादातर का पुनर्वास हो चुका है। 100 भिक्षुक सामाजिक न्याय परिसर स्थित भिक्षुक पुनर्वास केंद्र पर रह रहे हैं। इंदौर की पांचों विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों, 85 वार्डों के पार्षद, सांसद, राज्य और केंद्र शासन के अधिकारी, पत्रकार, साहित्यकार, शिक्षाविद, समाजसेवी और सोशल मीडिया इंफ्लूएंशर NO भिक्षा अभियान से जुड़े हैं। परमपूज्य रक्षक आदिनाथ वेलफेर एंड एजूकेशनल सोसायटी (संस्था प्रवेश) स्वच्छता में 6 बार देश में नंबर वन रैंक हासिल करने वाले इंदौर शहर को अब भिक्षुक मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।